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अलर्ट! अगले महीने से बढ़ने वाला है आपके फोन और इंटरनेट का बिल

पिछले कुछ दिनों से टेलीकॉम कंपनियों में आगे निकलने की और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जुटाने की होड़ लगी हुई है. ऐसे में टेलीकॉम कंपनियां लगातार डेटा को सस्ता करती गईं. लेकिन मौजूदा वक्त में जिस तरह से खबरें आ रही हैं उससे ज़ाहिर है कि घटी हुई दरों पर कंपनियों को चला पाना आसान नहीं रह गया है. इसकी वजह से वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल जैसी टेलीकॉम कंपनियों ने अपने सभी टैरिफ को बढ़ाने की घोषणा की है.

खास बात ये है कि अब कॉलिंग के साथ साथ डेटा भी महंगा होगा. वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा घाटा हुआ है. इतना ही नहीं सितंबर महीने में कंपनी के 25.7 लाख कस्टमर्स कम हो गए हैं. इन तीनों कंपनियों ने टैरिफ रेट बढ़ाने के पीछे जो वजह बताई है वो AGR है. जितना एजीआर टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को चुकाना है उसमें आधे से ज्यादा हिस्सा वोडाफोन आइडिया का है.

BSNL की बात करें तो इस सरकारी टेलीकॉम कंपनी की हालत बद से बदतर होती जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएसएनल को बेचने की तैयारी चल रही है. कर्मचारियों की छटनी काफी पहले से शुरू हो चुकी है. सरकार अगर 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज़ नहीं चुकाती है तो शायद बीएसएनल के 1 लाख कर्मचारियों पर बेरोजगारी की तलवार लटक सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पेंडिंग पेमेंट की वजह से पूरे सिस्टम पर असर पड़ रहा है.

टैरिफ बढ़ाने के पीछे है ये वजह-

हालांकि, टैरिफ बढ़ाने के पीछे Vodafone-Idea ने कहा कि अपने कस्टमर्स को वर्ल्ड क्लास डिजिटल एक्सपीरियंस देना जारी रखना के लिए वोडाफोन आइडिया 1 दिसंबर 2019 से बढ़ाने वाली है. एयरटेल की ओर से बयान में कहा गया कि दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से बदलती टेक्नॉलजी के साथ काफी पूंजी की आवश्यकता होती है. इसमें लगातार निवेश की जरूरत होती है. इस कारण यह बहुत जरूरी है कि डिजिटल इंडिया के विचार का समर्थन करने के लिए उद्योग को व्यवहारिक बनाए रखा जाए. इसे देखते हुए एयरटेल दिसंबर महीने में उचित दाम बढ़ाएगी.

अगले महीन से टैरिफ रेट होंगे रिवाइज-
1 दिसंबर से भारत की सभी टेलीकॉम कंपनियों के टैरिफ रेट रिवाइज होंगे. इसमें कॉलिंग से लेकर डेटा तक महंगे किए जाएंगे. हालांकि एक बार में कंपनियां कस्टमर्स को ज्यादा बड़ा बोझ नहीं देंगी, लेकिन टेलीकॉम सेक्टर में जिस तरह की क्राइसिस चल रही है इससे लगता है कि आने वाले समय में फिर से कंपनियां टैरिफ रेट बढ़ा सकती हैं.आसान शब्दों में कहें तो अब रिवाइवल के लिए कंपनियां सरकार से उम्मीद लगा कर बैठी हैं. टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच AGR को लेकर जो बातचीत चल रही थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हित में फैसला लेते हुए कंपनियों को AGR चुकाने का आदेश दिया है जो 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है.

RJS Exam 2018 Results: राजस्थान में इन मुस्लिम बेटियाें की कामयाबी के चर्चे

जयपुर. शिक्षा के लिहाज से पिछड़े माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय में बेटियां (Muslim Girls) उम्मीद की किरण बनकर उभर रही हैं. इसकी ताजा मिसाल बनी हैं, राज्य न्यायिक सेवा (RJS 2018 Results) में चयनित 5 मुस्लिम युवतियां. नतीजा यह है कि मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) के सोशल मीडिया समूहों (Social Media Groups) में इनकी कामयाबी के चर्चे हैं और तुलना कर यह भी बताया गया है कि एक के मुकाबले पांच का यह आंकड़ा समाज को अशिक्षा के अंधियारे से बाहर निकालने में बड़ा रोल अदा करेगा. एक यानी एक मुस्लिम युवक का चयन और पांच यानी पांच मुस्लिम बेटियों का राजस्थान की इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिया चयन हुआ. अक्सर इस तरह की कामयाबी और समाज की कमियों को अपने लोगों के बीच ले जाने वाले शेखावाटी के सामाजिक कार्यकर्ता अशफाक कायमखानी इसे नई शुरुआत बताते हैं. वो कहते हैं, ‘ये कामयाबी इसलिए अहम है क्योंकि पांच बेटियों ने अपनी मेहनत और शिक्षा के बूते कामयाबी का आसमान छूने में सफलता हासिल की है.’

पुराने आंकड़ों पर गौर करते हुए अशफाक थोड़ा हताश नजर आते हैं. कहते हैं कि ‘2001 के मुकाबले ये कामयाबी कमतर है. उस वक्त कुल 97 आरजेएस में से छह मुस्लिम समुदाय के थे, जबकि इस बार कुल 197 में छह का चयन हुआ है.’ लेकिन अगले ही क्षण वह इस बात पर संतोष जताते हैं कि, ‘इस कामयाबी में बड़ा हिस्सा बेटियों के पास है और बेटियां न्याय के क्षेत्र में आगे बढ़ेगी तो समाज में शिक्षा के प्रति एक नई ललक जगेगी.’

राजस्थान में यूं तो इस बार बेटियों ने न्यायिक सेवा की इस परीक्षा में जमकर परचम फहराया है लेकिन मुस्लिम बेटियों द्वारा हासिल की गई यह कामयाबी बड़ी इसलिए है क्योंकि ये समुदाय शिक्षा के लिहाज से सत्तर साल बाद भी दूसरों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है. 30वीं रैंक पर आईं सानिया मनिहार की कामयाबी तो इसलिए भी अहम है क्योंकि मनिहार समुदाय में सानिया के जरिए पहली बार कोई प्रशासनिक अधिकारी के ओहदे तक पहुंचा है.मोहम्मद हसन गौरी के यहां जन्मी जोधपुर की बेटी और झुंझुनूं की बहू सोनिया के अलावा इस बार साजिदा पुत्री अब्दुल शाहिद ने 37वीं रैंक, सना पुत्री हकीम खान ने 130वीं रैंक, हुमा खोहरी पुत्री फिरोज खान ने 136वीं रैंक, शहनाज खान लोहार पुत्री सलीम खान ने 143वीं रैंक हासिल कर सफलता हासिल की है. जबकि अल्पशिक्षित समुदाय के फैसल पुत्र याकूब खान 107वीं रैंक हासिल कर आरजेएस बनने वाले अकेले मुस्लिम युवक हैं.

महिला अधिकारों के लिए बीते तीन दशक से काम कर रही निशात हुसैन इस कामयाबी को कुछ अलग नजरिये से देख रही हैं. नेशनल मुस्लिम वुमेन वेलफेयर सोसायटी की संस्थापक अध्यक्ष निशात हुसैन कहती हैं, ‘तीस साल से मैं बेटियों में एक ही तड़प देख रही हूं. और यह तड़फ है अशिक्षा और कुरीतियों से बाहर निकल कुछ हासिल करने की. ये बेटियां उस समुदाय से हैं जिन्हें मौका नहीं मिलता. मौका मिलते ही वह आसमान छूती हैं, उड़ान भरती हैं और स्पष्ट करती हैं कि वह कैद में नहीं रहना चाहती.’अपनी बात को मजबूती देते हुए निशात कहती हैं, ‘इल्म हम सबकी जरूरत है. अफ़सोस कि उसकी जरूरत को हम आज भी पूरी तरह नहीं समझ पा रहे, जबकि कुरआन की पहली आयत में ही इल्म हासिल करने पर खास तवज्जोह दी गयी है.’

मुस्लिम समुदाय में शैक्षणिक/आर्थिक/सामाजिक परिस्थितियां कितनी गंभीर हैं, इसका खुलासा जस्टिस सच्चर कमिटी ने भी 2006 में उस वक्त किया था, जब प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी गयी रिपोर्ट में देश के हर हिस्से का अध्ययन कर हालात को रेखांकित किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा के लिहाज से दक्षिणी राज्यों में भले ही मुस्लिम समुदाय की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति थी, देश के उत्तरी राज्यों में हालात बेहद बुरे थे.

निकाय प्रमुख का चुनाव: बाड़ाबंदी जोरों पर, BJP-कांग्रेस की नजरें निर्दलियों पर

जयपुर. स्थानीय निकाय चुनाव (Local body elections) के तहत पार्षदों के बाद अब निकाय प्रमुख के चुनाव में जुटी कांग्रेस-बीजेपी (Congress, BJP) अपना पूरा फोकस बाड़ेबंदी पर कर रखा है. दोनों ही पार्टियां अपने-अपने पार्षदों के साथ अब निर्दलीय पार्षदों (Independent Councilors) को भी अपने खेमों में शामिल करने के लिए जोर-शोर से जुटी है. आलम यह है कि पार्टियां द्वारा अपने पार्षदों को टूटने से बचाने के लिए बाड़ेबंदी के स्थान भी बदले (Location Change) जा रहे हैं. दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं (Senior leaders) की निगरानी में पार्षदों की बाड़ेबंदी चल रही है.

कांग्रेस ने 961 और बीजेपी ने जीते हैं 737 वार्ड
49 निकायों के चुनाव परिणामों कांग्रेस ने बीजेपी के मुकाबले बढ़त ले रखी है. 2105 वार्डों में से कांग्रेस ने 961 और बीजेपी ने 737 वार्ड जीते हैं. इनके अलावा 386 वार्डों पर निर्दलीय काबिज हुए हैं, जबकि बसपा महज 16, माकपा 3 और एनसीपी 2 ही वार्ड जीत पाई हैं. परिणामों के बाद अब 20 निकायों में कांग्रेस और 6 में बीजेपी का बोर्ड बनना तय हो गया है.

निर्दलियों की जमकर हो रही है मान मनुहार

शेष निकायों में निर्दलीय अहम भूमिका निभाएंगे, लिहाजा अभी उनकी जमकर मान मनुहार हो रही है. बीजेपी-कांग्रेस ने अपने-अपने पार्षदों की तो पहले से ही बाड़ाबंदी कर रखी है. अब उनकी नजरें निर्दलीय पार्षदों पर है, क्योंकि 23 निकायों में उनके बूते ही पार्टियों की नैया पार होनी है. इसलिए अब दोनों पार्टियों ने निर्दलियों के दबदबे वाले निकायों में बोर्ड बनाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को लगा दिया है.

कल नामांकन का आखिरी दिन है
गुरुवार को निकाय प्रमुखों के नामांकन का आखिरी दिन है. इससे पहले बुधवार रात को बाड़ाबंदी में लिए गए पार्षदों से राय मशविरा किया जाएगा. उसके बाद सभापति/चेयरमैन/मेयर के नाम पर मुहर लगाई जाएगी. बीजेपी-कांग्रेस के जहां बोर्ड बनना तय है, वहां पार्टियों में जबर्दस्त लॉबिंग चल रही है. दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेता इस लॉबिंग पर भी नजर बनाए हुए हैं. निकाय प्रमुख के लिए मतदान 26 नवंबर को होगा. उसके तत्काल बाद मतगणना होगी.

केन्द्र सरकार के खिलाफ राजस्थान में आज कांग्रेस का हल्ला बोल

जयपुर. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता गुरुवार को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर धरना (Congress Protest) देंगे. पायलट ने कहा है कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों (Centre Economic Policies) के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता 21 तारीख को राज्यभर में हर जिला मुख्यालय पर धरना देंगे और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे. वहीं, 28 तारीख को जयपुर शहर में राज्य स्तरीय आंदोलन किया जाएगा. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस लिए जाने पर पायलट ने कहा कि उनकी सुरक्षा में जो कटौती की गयी है, वह हीन भावना से की गयी है और जनता सब देख रही है.

आर्थिक मंदी पर केंद्र को घेरेगी कांग्रेस
केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस इस आंदोलन में आर्थिक मंदी का मुद्दा भी उठाएगी. जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन में सभी प्रभारी मंत्रियों और संगठन प्रभारियों को जिलों में जाने के निर्देश दिए गए हैं. पीसीसी की ओर सोमवार को इस प्रदर्शन की तैयारियों में जुटने के निर्देश जारी करने के साथ ही 28 को राजधानी जयपुर में कांग्रेस के राज्यव्यापी प्रदर्शन की बात कही गई थी.

निकाय चुनाव में जीत पर जाहिर की खुशी

डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने नगर निकाय चुनाव के परिणामों पर खुशी जताते हुए इसे जनता का कांग्रेस की सरकार व संगठन को आशीर्वाद बताया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन परिणामों ने भाजपा के इस भ्रम को तोड़ दिया है कि शहरी क्षेत्र के मतदाताओं में उसकी पकड़ ज्यादा अच्छी है. उल्लेखनीय है कि राज्य के 49 नगर निकायों में 2100 से अधिक पार्षदों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने 965 वार्ड में जीत दर्ज की और कई प्रमुख जगहों पर उसका बोर्ड बनना तय है.

कचरे से सड़ रहा है करौली शहर , केवल फोटो में सिमट कर रह गया स्वच्छ भारत अभियान- Spacial Report

 

भरतीय जनता पार्टी के स्वच्छ भारत अभियान जो राजस्थान के करौली मे केवल एक राजनीतिक मुद्दा होता नज़र आ रहा है कुछ ही समय पूर्व करौली के भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने हाथों में झाड़ू लिए फ़ोटो खिंचाकर खूब वाहवाही लूटी थी लेकिन नगर परिषद करौली में सफाई कर्मचारियों द्वारा कार्य बहिष्कार करने के बाद आज पूरे करौली में सफाई व्यवस्था को नहीं संभाल पा रहे है, वो भी तब जब करौली को इन बिषम परिस्थितियों में सही मायने में सफाई की आवश्यकता है हर जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं लोगो मे बीमारियां फैलने लगी हैं लेकिन जब करौली को इन बिषम परिस्थितियों में सही मायने में सफाई की आवश्यकता है तब एक भी भाजपाई नजर नही आ रहे हैं अब कहाँ गया स्वच्छ भारत अभियान?
क्या अब भाजपा पदाधिकारियों के अपने क्षेत्र करौली में ही ठप सफाई व्यवस्था को देखकर क्यो इन्हे याद नही आता वो समय जब ये स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर हाथों में झाड़ू लिए सड़कों पर निकले थे।
करौली की बदहाली का ये मामला इस बात का प्रमाण है कि करौली के भाजपा पदाधिकारियों के लिए हाथों में झाड़ू लेकर सड़को पर उतरना केवल एक पोलिटिकल स्टंट था। इतना ही नही कुछ सामाजिक संगठनों ने भी हाथों में झाड़ू लेकर खूब वाहवाही बटोरी थी लेकिन आज जब सही मायने ने जरूरत है उस अभियान की तब कोई नजर नही आ रहा।

पुण्यतिथि पर ओम बना को किया याद

करौली में मंगलवार को ओम बना की पुण्यतिथि मनाई गई। पाली जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग ’62’ पर स्थित चोटीला गाँव मे स्व ओम बना मंदिर को 31 बर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन सिंह जादौन के नेतृत्व में कृष्ण सिंह कोषाध्यक्ष, केशव सिंह महासचिव, निखिल, शैलू बना, कन्हैया सिंह, विजय, हरी सिंह, गणेश सिंह व अनेक करणी सैनिक मौजूद रहे।

JNU फीस विवाद में कूदी हिंदू महासभा, कहा- ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाएं छात्र और डिस्काउंट पाएं

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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में चल रहे फीस विवाद में अब हिंदू महासभा की कूद गई है. जहां एक ओर यह मुद्दा संसद के अंदर भी उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हिंदू महासभा ने टिप्पणी कर अब इसे एक और मोड़ दे दिया है. हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने कहा है कि जेएनयू के छात्र ‘जय श्रीराम’ का नारा लगातक सस्ती फीस का लाभ उठा सकते हैं.

स्वामी चक्रपाणि ने ज्यादातर छात्रों को बताया  ‘भारत विरोधी’

स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ कहना जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कम फीस का लाभ उठाने के लिए एक शर्त होनी चाहिए. स्वामी चक्रपाणि ने यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे ज्यादातर छात्रों को ‘भारत विरोधी’ करार देते हुए कहा कि उनकी इस मांग के पीछे का तर्क यही है कि वहां के छात्र ‘राष्ट्र-विरोधी’ हैं.

जो श्रीराम का नाम लगाएगा, वह मर्यादित रहेगा- स्वामी चक्रपाणि

 

स्वामी चक्रपाणि ने कहा, “माता-पिता अपने बच्चों को खाना खिलाते हैं. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि अगर वह गुमराह हो जाएं तो वे उन्हें अनुशासित नहीं कर सकते हैं. जो छात्र भटक गए हैं, उन्हें भी अनुशासित करने की जरूरत है.” उन्होंने जेएनयू छात्रों को ‘पीजा-बर्गर वाला’ करार देकर ‘संस्कारों की कमी वाला’ कहा. यह पूछे जाने पर कि जय श्री राम तो एक धार्मिक नारा है, उन्होंने कहा, “जो भगवान श्रीराम का नाम लगाएगा, वह मर्यादित रहेगा. अगर आप उनका नाम नहीं लेना चाहते, तो आप ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ तो कह सकते हैं. यह तो बोल सकते हो. ऐसा करना देशभक्ति है.”

फीस बढोतरी का विरोध कर रहे हैं छात्र

जेएनयूएसयू के साथ इंटर हॉल एडमिनिस्ट्रेशन (आईएचए) बैठक की मांग को लेकर जेएनयू के छात्रों ने सोमवार को सड़कों पर उतरकर संसद तक मार्च किया था. उन्होंने मांग रखी कि जेएनयूएसयू की भागीदारी के साथ सामंजस्य स्थापित किया जाए और छात्रों के परामर्श से एक नया छात्रावास मसौदा तैयार किया जाए और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि शुल्क वृद्धि को पूरी तरह से वापस लिया जाए.

इस एक्ट्रेस ने सिंगर अनु मलिक पर लगाया आरोप, कहा – ये आदमी फैमली शो के लायक नहीं

इन दिनों मीटू के केस बहुत चल रहे हैं, आए दिन कोई न कोई सेलिब्रिटी इसका शिकार बन ही जाती है और अब इसका शिकार हुए हैं सिंगर अनु मालिक (MeToo: Anu Malik)। हालांकि ये विवाद नया नहीं है। आपको याद दिला दें कि वो मामला क्या था। दरअसल, कुछ समय पहले सिंगर सोना मोहापात्रा ने म्यूजिक डायरेक्टर अनु मलिक पर मीटू (MeToo: Anu Malik) के तहत आरोप लगाए थे। सोना ने अनु के खिलाफ ओपन लेटर लिखा था, जिसमें पीड़िताओं और उनके साथ हुई घटना का जिक्र था और अब अनु मलिक पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले में एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने भी प्रतिक्रिया दी है।

तनुश्री ने सोनी टीवी पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्यों टीआरपी की वजह से इस आदमी को शो में रखा हुआ है। इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने सिंगर नेहा कक्कड़ के किसिंग इंसिडेंट को लेकर दिए रिएक्शन को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि नेहा ने चुप रहकर ठीक नहीं किया। खास बात है कि तनुश्री पहली एक्ट्रेस हैं जिन्होंने नाना पाटेकर पर मीटू के तहत आरोप लगाए थे।

ShutUpSona

@sonamohapatra

Anu Malik finally wrote back to all of us last evening. My response to him, next to his letter. 👇🏾
In case mine is too long to read, have also attached a shorter, crisper one, one amongst many on my timeline. Thank you @KallolDatta for saying it better @IndiaMeToo

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अनु मालिक के शो में बने रहने के लिए तनुश्री ने कहा कि ये चैनेल ने कैसे कर दिया। उन्होंने कहा कि सोनी जो की फैमिली चैनल है, वहां पर इस तरह के लोग कैसे बैठे हैं। चैनल पर टीआरपी बटोरने को लेकर आरोप लगाया कि नसानी भावनाओं से ज्यादा जरुरी इनके लिए टीआरपी है। इस पर उन्होंने अनु मालिक पर मीटू का आरोप लगाने वाली सिंगर सोना मोहपात्रा का साथ दिया।

49 नगर पालिकाओं के लिए मतगणना पूरी, 961 वार्डों पर कांग्रेस की जीत; 737 पर भाजपा का कब्जा

जयपुर. राजस्थान में मंगलवार को 49 नगर पालिकाओं के लिए हुए चुनाव की मतगणना पूरी हो गई है। इनमें पिछले दिनों नवगठित 6 नगर पालिकाएं भी हैं। कांग्रेस ने कुल 28 पालिकाओं में जीत हासिल की है। वहीं भाजपा ने 16 पालिकाओं में जीत दर्ज की। इसके साथ तीन जगह निर्दलीय आगे रहे। 2 जगह परिणाम बराबर रहा। कांग्रेस के खाते में प्रदेश के 961 वार्ड और भाजपा के खाते में 737 वार्डों की जीत आई है। बसपा के 16, माकपा के 3 और राकांपा के 2 पार्षद विजयी रहे।

गहलोत बोले- उम्मीद यही थी

निकाय चुनाव के परिणामों पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उम्मीद यही थी, अपेक्षा यही थी, उसके अनुकूल ही परिणाम आए हैं। यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि जनता ने मैंडेट दिया है। यह सोच कर के की सरकार जिस रूप में परफॉर्म कर रही है उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं, हम चाहेंगे कि जो समस्या शहर की भी है उनको प्रायरिटी से हल करें। जनता ने विश्वास प्रकट किया है उनकी अपेक्षा और आशाओं के अनुरूप सरकार काम करे।

नगर निकाय चुनाव के परिणाम

निकाय क्षेत्र कांग्रेस भाजपा निर्दलीय बीएसपी माकपा और राकांपा कुल वार्ड
ब्यावर नगर पालिका 16 29 15 0 0 60
पुष्कर नगर पालिका 9 14 2 0 0 25
अलवर नगर परिषद 19 26 19 0 0 65
भिवाड़ी नगर परिषद 23 23 12 2 0 65
बांसवाड़ा नगर परिषद 36 21 3 0 0 60
छबड़ा नगर पालिका 15 8 10 2 0 35
मांगरोल नगर पालिका 15 13 7 0 0 35
बाड़मेर नगर परिषद 33 18 4 0 0 55
बालोतरा नगर परिषद 16 25 4 0 0 45
भरतपुर नगर निगम 18 22 22 3 0 65
बीकानेर नगर निगम 26 39 12 1 2 (राकांपा) 80
चित्तौड़गढ़ नगर परिषद 36 24 0 0 0 60
निंबाहेड़ा नगर पालिका 28 16 1 0 0 45
रावतभाटा नगर पालिका 26 11 3 0 0 40
चूरू नगर परिषद 36 17 7 0 0 60
राजगढ़ नगर पालिका 15 11 7 7 0 40
गंगानगर नगर परिषद 19 24 22 0 0 65
सूरतगढ़ नगर पालिका 22 12 9 1 1 (माकपा) 45
हनुमानगढ़ नगर परिषद 36 18 6 0 0 60
जैसलमेर नगर परिशद 21 20 4 0 0 45
भीनमाल नगर पालिका 14 18 8 0 0 40
जालौर नगर परिषद 14 18 8 0 0 40
बिसाऊ नगर पालिका 17 5 3 0 0 25
झुंझुनूं नगर परिषद 34 10 16 0 0 60
पिलानी नगर पालिका 2 3 30 0 0 35
फलौदी नगर पालिका 27 9 4 0 0 40
कैथून नगर पालिका 18 6 1 0 0 25
सांगोद नगर पालिका 16 7 2 0 0 25
डीडवाणा नगर पालिका 25 5 10 0 0 40
मकराना नगर परिषद 35 3 17 0 0 55
पाली नगर परिषद 22 29 14 0 0 65
सुमेरपुर नगर पालिका 9 18 8 0 0 35
नीमकाथाना नगर पालिका 19 12 4 0 0 35
सीकर नगर परिषद 37 18 9 0 1 (माकपा) 65
माउंट आबू नगर पालिका 18 6 1 0 0 25
पिंडवाड़ा नगर पालिका 8 13 4 0 0 25
शिवगंज नगर पालिका 15 13 7 0 0 35
सिरोही नगर परिषद 22 9 4 0 0 35
आमेट नगर पालिका 17 8 0 0 0 25
नाथद्वारा नगर पालिका 29 10 1 0 0 40
टोंक नगर परिषद 27 23 10 0 0 60
कानौद नगर पालिका 7 7 6 0 0 20
उदयपुर नगर पालिका 20 44 5 0 1 (माकपा) 70
नसीराबाद नगर पालिका 8 10 2 0 0 20
थानागाजी नगर पालिका 10 9 6 0 0 25
प्रतापपुर गांधीनगर पालिका 10 11 4 0 0 25
रूपवास नगर पालिका 6 6 13 0 0 25
महुआ नगर पालिका 8 4 13 0 0 25
खाटूश्याम जी नगर पालिका 3 11 6 0 0 20

महापौर और उप महापौर के चुनाव 27 नवंबर को
नगर पालिकाओं के लिए 16 नवंबर को वोटिंग हुई थी। इसमें 76.28 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया था। वहीं, उपमहापौर/उपाध्यक्ष पदों के लिए मतदान 27 नवंबर, बुधवार को होगा। इस दिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक यदि आवश्यक हुआ तो मतदान निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाएगा। मतदान की समय सीमा समाप्त होते ही मतगणना शुरू हो जाएगी।

राजस्थान निकाय चुनाव रिजल्ट २०१९: सियासत के ‘जादूगर’ साबित हुए अशोक गहलोत

जयपुर. शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को चित्त कर दिया है, शहरी निकायों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. शहरी निकाय चुनावों के इन नतीजों (Rajasthan Nikay Chunav Result 2019) ने गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) सरकार के 11 महीने के कामकाज पर जनता ने मुहर लगा दी है. राम मंदिर, धारा 370 से लेकर भाजपा के तमाम राष्ट्रीय मुद्दे इन चुनावों में काम नहीं आए और कांग्रेस बाजी मार ले गई. इसी के साथ शहरी निकायों के चुनावों में कांग्रेस की जीत ने कई सियासी मिथक तोड़ दिए हैं. इन नतीजों ने एक बार फिर सीएम अशोक गहलोत को सियासत का जादूगर साबित कर दिया है.

इन नतीजों के बाद गहलोत ने न केवल सरकार बल्कि पार्टी और जनता के बीच भी अपनी पकड़ साबित की है. इससे य​ह साफ हो गया है कि शहरी जनता के बीच सीएम गहलोत अपनी पकड़ बनाने में सफल हो गए हैं. 11 महीने पुरानी गहलोत सरकार के कामकाज पर जनता का इसे मेन्डेंट माना जा रहा है, सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले मिली इस जीत ने सीएम गहलोत का कद भी काफी बढ़ा दिया है. इस जीत से गहलोत पार्टी और हाईकमान दोनों के सामने और मजबूत होकर उभरे हैं.

Ashok Gehlot

@ashokgehlot51

आज आए निकाय चुनाव के नतीजे सुखद हैं। जिला परिषद उपचुनाव, पंचायती राज उपचुनाव एवं विधानसभा (मण्डावा, खींवसर) उपचुनाव के बाद निकाय चुनाव में भी प्रदेश की जनता ने हमारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को अपना समर्थन देकर…
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ईडब्ल्यूएस आरक्षण में संपत्ति का प्रावधान हटाना भी एक वजह!
शहरी निकायों में मिली इस जीत के पीछे ईडब्ल्यूएस आरक्षण में संपत्ति का प्रावधान हटाना भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है. सीएम अशोक गहलोत का ईडब्ल्यूएस आरक्षण से संपत्ति का प्रावधान हटाने का फैसला मास्टर स्ट्रॉक के साथ साथ चुनाव के लिहाज से गेमचेंजर भी साबित हुआ. गहलोत के इस फैसले ने सामान्य वर्ग के युवाओं को कांग्रेस की तरफ मोड़ दिया और युवाओं ने जमकर कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया.

11 महीने के कार्यकाल पर जनता की मुहर! 
शहरी निकाय के नतीजों में कांग्रेस की जीत बहुत कुछ कहती है, इस जीत ने सीएम अशोक गहलोत का कद तो बढ़ाया ही है, कांग्रेस सरकार के 11 महीने के कार्यकाल पर भी इसे जनता की मुहर के तौर पर देखा जाएगा. सीएम गहलोत राजनीतिक रूप से और अधिक मजबूत होकर उभरे हैं. कांग्रेस के अंदरूनी सत्ता समीकरणों में यह जीत बहुत मायने रखने वाली है.

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