आर्थिक सुस्ती के चलते 14 हजार करोड़ रुपए के घाटे में प्रदेश सरकार

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जयपुर. दुनिया में छाई आर्थिक मंदी ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को भी पूरी तरह से गड़बड़ा दिया है। वित्त विभाग का अाकलन है कि इस साल सरकार ने बजट में अपनी आमदनी के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया है आर्थिक सुस्ती के चलते उसमें 14 हजार करोड़ रुपए की कमी आएगी।

इसमें केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में करीब 7 हजार करोड़ रुपए कम मिलने का अनुमान है और इतनी ही राशि का घाटा प्रदेश के राजस्व में भी होने की आशंका है। इस घाटे का असर प्रदेश के विकास पर भी पड़ना तय है। ट्रेजरियों में कर्मचारियों के वेतन बिलों को छोड़ कर बाकी सभी तरह के भुगतान या तो अटके पड़े हैं या देरी से हो रहे हैं।

ठेकेदारों के भुगतान तो महीनों से क्लीयर नहीं हुए हैं। राज्य सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कर राजस्व, गैर कर राजस्व व ग्रांट मिलाकर 1 लाख 64 हजार करोड़ की राजस्व आय का लक्ष्य निर्धारित किया है। कैग की मासिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 6 महीनों सरकार ने 67915 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया है। जो बजट अनुमानों का 41% है। लेकिन गैर कर राजस्व, सेल्स टैक्स,स्टांप रजिस्ट्रेशन, भू राजस्व जैसे महकमें अपने राजस्व लक्ष्यों से करीब 5 से 15 % तक पीछे चल रहे हैं। आर्थिक सुस्ती के हालातों में इनमें कोई सुधार होने के संकेत फिलहाल नहीं मिल रहे हैं।

योजनाओं की मर्जिंग पर काम शुरू: आयोजना विभाग पहले ही विभागों करीब 250 से ज्यादा योजनाओं की समीक्षा करने का निर्देश जारी कर चुका है। इन योजनाओं में कॉमन नेचर की योजनाओं को एक जगह लाकर इनके खर्च में कटौती की जानी है। इसके लिए विभाग वार बैठकें कर ली की गई हैं। अब इनमें ऐसी योजनाओं को छांटा जाएगा जिनके संचालन का खर्च उनके टारगेट बेनीफिशियरी पर होने वाला खर्च से ज्यादा हो रहा है।