17, 22 और 29 जनवरी को होंगे सरपंचों के चुनाव, जानिए कितनी बढ़ी चुनाव खर्च सीमा

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जयपुर: प्रदेश में सरपंच और वार्ड पंचों का चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है. पहली बार सीआर, डीआर और सरपंच के चुनाव साथ न होकर केवल सरपंच के चुनाव करवाए जा रहे हैं. वहीं इस बार सभी जगह सरपंच के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे. वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे. वहीं आयुक्त मेहरा ने बजट में देरी को लेकर सरकार पर भी निशाना साधा. सरपंच के चुनाव के लिए खर्च सीमा को बढ़ाया गया है. प्रदेश के 33 जिलों में चुनाव होंगे. 34525 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. दौसा में 1 चरण में चुनाव होगा. वहीं बांसवाड़ा, बीकानेर, धौलपुर, डूंगरपुर, करौली और सीकर में दो चरणों में चुनाव होंगे. बाकी जिलों में 3 चरणों में चुनाव होंगे.

सरकार ने बजट देने में कर दी देरी
राज्य चुनाव आयोग की ओर से भी पंचायतीराज चुनाव के लिए भी ईवीएम मशीनें खरीदने का प्रस्ताव था, जिससे वार्ड पंचों तक के चुनाव ईवीएम से कराए जाने का प्रपोजल था, लेकिन सरकार की ओर से बजट जारी करने में देरी को लेकर आयोग ने सरकार पर आरोप लगाया. आयोग ने कहा कि मैं नाम तो नहीं लूंगा, लेकिन वो टाइम से बजट जारी कर देते तो समय से ईवीएम यहां पहुंच जाती, लेकिन बजट में देरी के चलते अब ईवीएम का ऑर्डर दिया गया है. सरकार को आयोग ने नई ईवीएम के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिस पर सरकार ने 19 करोड़ रुपए जारी किए हैं, लेकिन देरी से जारी हुए बजट के चलते ईवीएम समय से नहीं आ पाएंगी.

बढ़ी चुनाव खर्च सीमा
प्रदेश में होने वाले सरपंच और वार्डपंचों के चुनाव के लिए चुनावी खर्च सीमा तय की गई है. सरपंच के चुनाव के लिए खर्च सीमा को बढ़ाया गया है. खर्च सीमा को 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया गया है. वहीं वार्ड पंच के लिए चुनाव खर्च सीमा का निर्धारण नहीं है. आयोग ने लगातार बढ़ रही महंगाई को देखते हुए इस खर्च सीमा को बढ़ाया है. सभी को चुनाव परिणाम जारी होने के 15 दिन में इस खर्च का ब्यौरा देना होगा. वहीं प्रत्याशी रात दस बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं कर सकेंगे.

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तीन राज्यों से मंगाई गई ईवीएम
प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव के लिए उड़ीसा, महाराष्ट्र, बिहार से ईवीएम मंगाई गई हैं. आयोग के पास अभी 1 लाख 18 हजार 547 कंट्रोल यूनिट और 1 लाख 41 हजार 529 बैलेट यूनिट हैं, जिनकी फर्स्ट लेवल चैकिंग का काम जिलों में चल रहा है. एक सप्ताह में सबकी FLC कर ली जाएगी. इसके साथ ही 11260 के करीब ईवीएम आयोग के पास हैं, जिनमें से कुछ खराब भी हो गई हैं. इन ईवीएम में से 10 प्रतिशत रिजर्व रखी जाएगी. वहीं 10 प्रतिशत ईवीएम ट्रैनिंग में काम ली जाएगी. वहीं करीब पंचायत समिति सदस्यों के लिए 45 हजार ईवीएम और जिला परिषद सदस्यों के लिए 45 हजार ईवीएम की जरूरत पड़ेगी. प्रदेश में सरपंच के चुनाव 17, 22 और 29 जनवरी को होंगे.

मतदान के लिए 12 दस्तावेज मान्य
आयोग की ओर से 4 दिसंबर को जारी हुई मतदाता सूची के अनुसार इन पंचायतों में 3 करोड़ 8 लाख 86 हजार 519 मतदाता हैं जो सरपंच का चुनाव करेंगे. वहीं इनमें 1 करोड़ 60 लाख 95 हजार 417 पुरूष और 1 करोड़ 47 लाख 90 हजार 976 महिला मतदाता हैं. वहीं 126 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. मतदाता फोटो पहचान पत्र के साथ ही 12 अन्य दस्तावेजों से मतदान कर सकेंगे, जिनमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राईविंग लाइसेंस, आयकर पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, राशन कार्ड, सांसद, विधायकों द्वारा जारी पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेज मतदान के लिए मान्य हैं.

65 हजार कर्मचारी कराएंगे चुनाव
सरपंचों के चुनाव के लिए प्रदेश के सभी कर्मचारी राज्य निर्वाचन आयोग के अधीन होंगे, जिनको चुनाव कार्य के लिए अधिग्रहित किया जा सकेगा. 9171 ग्राम पंचायतों में चुनाव के लिए करीब 65 हजार कर्मचारियों को नियोजित किया जाएगा. मतदान दलों को दो स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा. वहीं कानून व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा. वहीं चुनाव के लिए जिले में एक या दो पर्यवेक्षक लगाए जाएंगे जो आईएएस या वरिष्ठ आरएएस होंगे. जिला एवं राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए 24*7 नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा. इसके साथ ही आयोग ने शांतिपूर्ण निष्पक्ष चुनाव के लिए मीडिया से अपील की है.