गुर्जर समाज और गहलोत सरकार के बीच समझौता

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राजस्थान में चल रहे गुर्जर आरक्षण आंदोलन के 11वें दिन बुधवार को इसका समाधान निकल आया. गुर्जर नेताओं और राजस्थान की गहलोत सरकार के बीच आखिरकार समझौता हो गया है. इसके साथ ही समझौता पत्र भी तैयार कर लिया गया है. इस समझौते के तहत गुर्जर समाज ने पांच मांगों पर अपनी सहमति दे दी है. इसके बाद अब कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला और गुर्जर नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की तैयारी में है. कुछ ही देर में गुर्जर नेता गेस्ट हाउस से रवाना होकर सीएम गहलोत से मिलने पहुंचेंगे.

इन मांगों पर बनी सहमति

>> मारे गए 3 आंदोलनकारियों के परिजनों को सरकारी नौकरी.

>>आंदोलन में गुर्जर आंदोलनकारियों पर लगे मुकदमों को वापस लेने पर सहमति.

>>एमबीसी आरक्षण को नवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को पत्र लिखेगी सरकार.

>>देवनारायण योजना के क्रियान्वयन पर सहमति.

>>एमबीसी वर्ग के 1252 अभ्यर्थियों को नियमित वेतन श्रृंखला के समकक्ष समस्त परिलाभ दिए जाएगा.

>>2013 से 2018 तक की बैकलॉक भर्ती सहमति के प्रयास.

नर्म पड़े थे कर्नल किरोड़ी के तेवर!

आंदोलन और पटरी पर ही बातचीत करने के लिये अड़े गुर्जर आरक्षण संषर्घ समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के तेवर  कुछ नरम पड़े थे. वे पटरी से हटकर बातचीत करने के लिये तैयार हो गए थे. इसके बाद सीएम अशोक गहलोत ने गुर्जर समाज के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिये बुलाया था. उसके बार कर्नल किरोड़ी बैसला हिंडौन से जयपुर के लिये रवाना हो गये थे.

मसले के समाधान के लिये 11 नवंबर सीएम निवास पर दोपहर 12 बजे वार्ता प्रस्तावित थी. सीएम अशोक गहलोत ने गुर्जर नेताओं को वार्ता के लिए बुलावा भेजा था. उसके बाद कर्नल अपने पुत्र विजय सिंह बैसला और गुर्जर समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ जयपुर के लिये रवाना हो गये थे.

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आंदोलनकारियों का दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर कब्जा था

गुर्जर आंदोलनकारियों का दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर कब्जा जारी था. वहां आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर तम्बू गाड़कर बैठै थे. इसके चलते इस रेल मार्ग पर रेल यातायात बाधित हो रहा था. इस मार्ग की ट्रेनों को डाइवर्ट करने का सिलसिला भी लगातार जारी था. आंदोलन के कारण करौली और भरतपुर समेत आसपास के जिलों में इंटरनेट बंद थी. इसके कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.