आमेर मावठा सरोवर पानी से लबालब हुआ, पानी की समस्या से मिलेगा छुटकारा

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कई सालों बाद आमेर में इंद्रदेव मेहरबान हुए. पर्यटन नगरी आमेर में 10 घंटे से ज्यादा समय तक बारिश होने से जलभराव केंद्र लबालब हो गए.कई सालों बाद आमेर में इंद्रदेव मेहरबान हुए. पर्यटन नगरी आमेर में 10 घंटे से ज्यादा समय तक बारिश होने से जलभराव केंद्र लबालब हो गए, जिससे आमेर में फिर से लोगों के भ्रमण की रौनक देखी जा रही है. 14 अगस्त को 10 घंटे हुई बारिश के बाद जयपुरवासी आमेर उमड पड़े. पिछले कई सालों से सूखे पडे जलभराव केंद्र आमेर मावठा सरोवर, सागर और दर्जनभर बावडियों में भी बारिश का पानी आने से लोगों के चेहरों पर जैसे खुशहाली आ गई. खुशहाली आना भी लाजमी है क्योंकि आमेर का जलस्तर में भी बढोतरी होगी. कई सालों से पानी के संकट से जूझ रहे लोगों के नलकूप और बोरिंग में पानी आ गया.

कोरोना संक्रमण के चलते आमेर के पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा पसर गया था. 14 अगस्त को लंबे समय की बारिश होने से आमेर में जयपुरवासीयों के भ्रमण से  रौनक बढ़ गई है. आमेर मावठा सरोवर और सागर में पानी आने और पहाडों पर झरने बहने से लोगों ने भ्रमण का लुत्फ़ उठाते नजर आए. जिससें फूटपाथ व्यवसायिकों और रेस्टोरेंटों पर भी लोगों की खरीददारी होने से दुकानदारों में भी रौनक लौटी है. क्योंकि दो दिन 15 अगस्त और रविवार अवकाश होने से घरेलू पर्यटक अपने घरों से निकलकर भ्रमण के लिए आमेर उमड पडे.

आमेर के मावठा सरोवर,सागर और बावडियों पर लोगों की आवाजाही से भीड़ जमा रही. पर्यटकों की आवाजाही से सडकों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से भी यातयात जाम के हालात बने. यातयात को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस के जवान जूझते नजर आए. पर्यटन नगरी आमेर पर्यटकों के भ्रमण का केंद्र भी माना जाता है.

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आमेर में कई सालों बाद अच्छी बारिश होने से जलभराव केंद्र लबालब हो गए हैं. इससे आमेर के लोगों पर भी खुशी की लहर छा गई है. क्योंकि जलभराव से आमेर के कुएं,नलकूप और बोरिंगों में पानी की आवक हो गई है. आमेर की जमीन का जलस्तर भी बढेगा पानी की समस्या से भी लोगों को निजात मिलेगी. आमेर मावठा सरोवर वर्ष 1981 में लबालब हुआ था जिससे मावठा की पाल भी टूट गई थी. उसके बाद आमेर में वर्ष 1996 में अच्छी तेज बारिश होने से मावठा सरोवर और सागर बांध मोरी लगा था यानी कह सकते है की ओवरफ्लो होने से पानी के निकासी द्वार से पानी निकाला गया था. आमेर की बावडिया भी पानी से लबालब हो गई थी. उसके बाद आमेर में सूखा रहा फिर से इंद्रदेव मेहरबान होते हुए आमेर में वर्ष 2012 में अच्छी बारिश की तो मावठा सरोवर व सागर बांध में अच्छे पानी की आवक हुई थी.

अच्छी बारिश के चलते आमेर की पहाड़ियां भी हरी—भरी हुई. आमेर के पहाडों पर हरियाली—हरियाली छाने से आमेर महल और फोर्ट सहित पहाडों पर बनी दिवारें सुहावनी लगने लगी. घरेलू पर्यटक इन दिवारों और महल के लूक के लिए सेल्फी लेकर यादे ताजा कर रहे हैं. वहीं, लोगों का मानना है कि बारिश में होने वाले नुकसान को सह लेंगे. क्योंकि रोज रोज ऐसी बारिश नहीं होती है इसलिए भगवान से दुआ करते है कि जमकर मेघ बरसे. बारिश होने से लोगों में रोजगार के संसाधनों में बढ़ोतरी होगी.