‘मैं आर्मी में था, सैनिकों को गोली चलाने की अनुमति क्यों नहीं मिली : कैप्टन अमरिंदर सिंह

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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Captain Amrinder Singh) ने गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीनी सैनिकों के साथ हुई भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होने पूछा है कि जब कर्नल संतोष बाबू पर हमला हुआ तो बाकी के जवानों ने गोलियां क्यों नहीं चलाईं? उन्होंने कहा कि जब विश्वासघाती चीन की तरफ गोलियां चलाई गईं तो हमारे अधिकारियों को भी गोली चलाने का ऑर्डर देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि अगर वो वहां होते तो तुरंत शूट का ऑर्डर दे देते.

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक राजनेता के तौर पर नहीं बोल रहे हैं बल्कि वह ऐसे व्यक्ति के रूप में यह सब कह रहे हैं जो सेना का हिस्सा रह चुका है. यह पूछे जाने पर कि चीनी सैनिकों के साथ गतिरोध के दौरान लद्दाख में भारतीय सैनिकों पर हुए इस बर्बर हमले में भारतीय सैनिकों को गोली चलाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई? सीएम ने कहा, ‘कोई अपना काम करने में नाकाम रहा और हमें यह पता लगाने की जरूरत है कि वह कौन था.’

कैप्टन अमरिंदर ने कहा है कि अब चीन के साथ भाई-भाई वाले रिश्ते खत्म हो चुके हैं. 1962 वाली स्थिति नहीं है. हमारी सेना अब बहुत मजबूत हो चुकी और हर मोर्चे पर जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने कहा है कि एक भारतीय जवान के बदले तीन चीनियों को ढेर करना चाहिए था. अगर चीन न्यूक्लियर पावर है तो भारत भी न्यक्लियर पावर है. हम 60 साल से बातचीत कर रहे हैं अब चीन को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए.

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कैप्टन अमरिंदर ने कहा है कि गलवान घाटी की घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय का रुख 48 घंटे में बदल गया. पहले बताया गया कि हमारे सैनिक निहत्थे थे. फिर बाद में कहा गया कि वो हथियार लेकर गए थे. उन्होंने कहा कि अगर हथियार साथ थे तो फिर गोलियां क्यों नहीं चलाई गईं?

प्रणब मुखर्जी ने दी श्रद्धांजलि
गौरतलब है कि चीनी सैनिकों के साथ भारतीय सैनिकों की इस हिंसक झड़प को लेकर सभी भारतीय राजनीतिक राजनीतिक दलों ने एक स्वर में चीन की निंदा की है. एक दिन पहले भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी ट्वीट कर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी. उन्होंने कहा कि इस वक्त राष्ट्र सर्वोपरि है. घटना से पूरे देश की आत्मा को चोट पहुंची है. सरकार को भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सभी रास्ते तलाशने चाहिए.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा-‘देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में, लद्दाख की गलवान वैली में हमारे सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को मैं, सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, नमन करता हूं