अशोक गहलोत – सचिन पायलट से नहीं हो रही है कोई बातचीत, पिछले डेढ़ साल से

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अशोक गहलोत बोले, ‘उन्होंने उस पार्टी को धोखा दिया जिसने उन्हें सब कुछ दिया. महत्वाकांक्षी होना गलत नहीं है लेकिन बेईमानी करना गलत है.’

नई दिल्ली. राजस्थान की राजनीति में शह और मात का खेल लगातार जारी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच तलवारें खींच गईं हैं. मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. पायलट ने उनके 18 समर्थकों को पार्टी व्हिप के उल्लंघन के मामले में विधानसभा स्पीकर के नोटिस को कानूनी चुनौती दी है. इस बीच न्यूज़18 इंडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा है कि पायलट से उनकी पिछले डेढ़ साल से बातचीत नहीं हुई है. जबकि बता दें कि पायलट उनके मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री थे.

‘उन्होंने कांग्रेस को धोखा दिया’

अशोक गहलोत ने कहा, ‘मैं उनसे पिछले डेढ़ साल से बातचीत नहीं कर रहा हूं. जब से हमारी सरकार बनी है तभी से पायलट इसे गिराने का षडयंत्र रच रहे हैं. उन्हें पूरे मामले का समाधान निकालने के लिए पार्टी फोरम पर आना चाहिए था. लेकिन अब कुछ नहीं बचा है. उन्होंने उस पार्टी को धोखा दिया जिसने उन्हें सब कुछ दिया. महत्वाकांक्षी होना गलत नहीं है लेकिन बेईमानी करना गलत है.’

‘वो बीजेपी में शामिल होना चाहते थे’

गहलोत ने ये भी कहा कि सचिन पायलट बीजेपी में शामिल होना चाहते थे लेकिन उनके पास संख्या बल नहीं था. गहलोत के मुताबित राहुल गांधी भी ये जानते हैं कि वो पायलट के खिलाफ नहीं थे. उन्होंने कहा, ‘मैं सचिन के खिलाफ नहीं, ये राहुल गांधी जानते हैं. अगर सचिन पार्टी में वापस आते हैं तो मैं सबसे पहले उनको प्यार से गले लगा लूंगा. उन्होंने कहा कि जब मैं एमपी बना था तब सचिन 3 साल के थे. मेरा उनके प्रति और उनके परिवार के प्रति स्नेह हैं. मैं 50 साल से देख रहा हूं, ये लोग कांग्रेस मुक्त नहीं कर पाए.’

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हाई कोर्ट में मामला

सचिन पायलट और 18 अन्य बागी कांग्रेस विधायकों ने गुरुवार को उन्हें राज्य विधानसभा से अयोग्य करार देने की कांग्रेस की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा भेजे गये नोटिस को चुनौती दी है. इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ शुक्रवार दोपहर एक बजे सुनवाई कर सकती है. विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय ने विधायकों को आज दोपहर एक बजे तक ही नोटिस का जवाब देने को कहा है.