20 लाख से अधिक किसानों के 13529 करोड़ रुपए के ऋण माफ किए: अशोक गहलोत

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते कहा कि पिछली सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक फायदे के लिए ऋण माफी योजना का ऐलान कर दिया और इसके लिए जरूरी 8 हजार करोड़ रुपए की जगह महज 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया और शेष 6 हजार करोड़ रुपए का भार हमारी सरकार पर छोड़ दिया। हमने इस भार को वहन करते हुए 20.21 लाख किसानों की 13,529 करोड़ रुपए की ऋण माफी अभी तक की है।

7 लाख नए किसानों को 1800 करोड़ के ऋण: गहलोत ने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य है, जिसने सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना में एक साल में ही 8 लाख नये किसानों को पहली बार जोड़ा है। आधार नम्बर से लिंक होने और सत्यापन के बाद वास्तविक किसानों को ऋण का लाभ मिल रहा है। राज्य में 7 लाख नये किसानों को करीब 1800 करोड़ रुपए का सहकारी फसली ऋण दिया गया है।

अब तक कुल 8 हजार 497 करोड़ का फसली ऋण वितरित:

मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीफ-2019 में 18 लाख 20 हजार किसानों को 4 हजार 583 करोड़ रुपए और रबी 2019-20 में 10 फरवरी 2020 तक 13 लाख 29 हजार किसानों को 3 हजार 913 करोड़ रुपए का फसली ऋण वितरित किया जा चुका है। इस प्रकार अब तक कुल 8 हजार 497 करोड़ के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।

एक किसान का तो करीब 8 लाख का कर्ज माफ हुआ:

गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने सहकारी एवं भूमि विकास बैंकों की ऋण माफी में कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की है। उन्होंने टोंक जिले के देवली निवासी किसान लड्डूलाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका 7 लाख 98 हजार रुपए का फसली ऋण माफ हुआ है। इसी जिले के अमीनपुरा निवासी देवकरण गुर्जर का 5 लाख 61 हजार रुपए और फिरोजपुर निवासी राजूलाल नागर का 5 लाख 2 हजार रुपए का फसली ऋण माफ हुआ। प्रदेश में करीब 9 हजार से अधिक किसानों का 2 लाख रुपए से अधिक का फसली ऋण माफ किया गया है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों द्वारा दिए गए दीर्घकालीन ऋण भी माफ किए गए हैं, जिससे किसानों की 1 लाख 60 हजार बीघा भूमि रहन मुक्त की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब केन्द्र सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों के ऋण वन टाइम सेटलमेंट के जरिए माफ कर सकती है तो किसानों के राष्ट्रीयकृत बैंकों के किसानों के छोटे-छोटे ऋण क्यों नहीं? गहलोत ने कहा कि प्रदेश में पहली बार समर्थन मूल्य में भुगतान की सुगम एवं त्वरित व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेश के डेढ़ लाख किसानों से मूंग, उड़द, सोयाबीन व मूंगफली की 3 लाख 8 हजार मीट्रिक टन की खरीद की गई है।


टिड्डी प्रभावित किसानों के लिए 500 करोड़ प्रीमियम राशि दी:

गहलोत ने कहा कि टिड्डी नियंत्रण केन्द्र का विषय है। टिड्डी हमले की वजह से हमारे किसान भाईयों को नुकसान उठाना पड़ा। यह नुकसान और ज्यादा हो सकता था, लेकिन हमारी सरकार ने समय रहते कदम उठाये और किसानों को उपकरण एवं निःशुल्क पेस्टीसाइड्स उपलब्ध कराए। केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरूषोत्तम रूपाला ने भी राज्य सरकार के प्रयासों की संसद में तारीफ की। उन्होंने कहा कि बजट घोषणा में हमने एक हजार करोड़ रुपए के किसान कल्याण कोष की स्थापना की है, इसमें से 500 करोड़ रुपए बीमा कंपनियों को राज्य की ओर प्रीमियम के रूप में दिए जा चुके हैं ताकि टिड्डी प्रभावित किसानों को समय रहते क्लेम मिल सके।
रिफाइनरी प्रोजेक्ट के 20372 करोड़ के कार्यादेश जारी: गहलोत ने रिफाइनरी को लेकर पूर्ववर्ती सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ‘जमीन हमारी, पानी हमारा और तेल हमारा, फिर भी 26 प्रतिशत ही भागीदारी क्यों ?‘ के नाम पर रिफाइनरी को पांच साल तक लटकाए रखा गया। इसे लटकाए नहीं रखते तो राजस्थान को अब तक रिफाइनरी का लाभ मिलने लग जाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बाड़मेर रिफाइनरी की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। करीब 44 हजार करोड़ रुपए की इस परियोजना में से 20,372 करोड़ रुपए के कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। इनमें से 2679 करोड़ रुपए का काम तो पूरा भी कर लिया गया है।

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पुलिस सुधार के हमारे प्रयासों का वेलकम करे प्रतिपक्ष:

अशोक गहलोत ने कहा कि हमने थाने पर एफआईआर दर्ज नहीं होने की स्थिति में एसपी ऑफिस में एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था लागू कर दी है। इससे अब एफआईआर दर्ज हो रही है और लोगों को न्याय मिल रहा है। पूरे प्रदेश में एसपी ऑफिस में 187 एफआईआर दर्ज की गई हैं। एफआईआर की संख्या बढ़ने की हमें चिंता नहीं है, हमारा मकसद है कि पुलिस थाने में गये हर व्यक्ति की सुनवाई हो। उन्होंने जघन्य अपराधों की प्रभावी तफ्तीश के लिए गठित यूनिट, महिलाओं से संबंधित अपराधों के त्वरित अनुसंधान के लिए प्रत्येक जिले में अलग से पुलिस उप अधीक्षक का पद सृजित करने जैसे उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतिपक्ष को इनका स्वागत करना चाहिए।

राज्य के हिस्से में 17 हजार करोड़ की कटौती: 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान को केन्द्र से मिलने वाली हिस्सा राशि में हो रही कटौती चिंता का विषय बना हुआ है। इससे राज्य की विकास योजनाओं पर असर पड़ रहा है। केन्द्रीय करों में राजस्थान के हिस्से में वित्तीय वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय अंतरिम बजट में 10,362 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। जीएसटी क्षतिपूर्ति की बकाया राशि 2,600 करोड़ और सीएसटी क्षतिपूर्ति की बकाया राशि 4,137 करोड़ रुपए मिलाकर केन्द्र ने कुल 17,099 करोड़ रुपए की कटौती राज्य के हिस्से में की है।

दे रहे हैं एक लाख 17 हजार नौकरियां: 

गहलोत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था जिस गंभीर चिंता के दौर से गुजर रही है, उसमें युवाओं को रोजगार से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। हमारी सरकार एक साल से कुछ ही अधिक समय में 1,17,900 नौकरियां दे रही है। हमने अब तक 34,283 नियुक्तियां दे दी हैं, 34,527 के परीक्षा परिणाम जारी हो चुके हैं अथवा प्रक्रियाधीन हैं। साथ ही 45,773 पदों की भर्ती के विज्ञापन जारी हो चुके हैं। शेष अन्य कारणों से लंबित हैं।

मनरेगा में दुगुनी हुई श्रमिकों की संख्या: 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा में जून 2018 में प्रदेश में मात्र 16 लाख श्रमिक नियोजित थे जिनकी संख्या राज्य सरकार के प्रयासों से जून 2019 तक बढ़कर 30 लाख हो गई। केन्द्र ने जनवरी, 2020 तक बकाया 1950 करोड़ नहीं दिए थे। मैंने इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इसके बाद 878 करोड़ रुपए जारी किए गए। अभी भी 1070 करोड़ रुपए केन्द्र ने रोक रखे हैं।

गहलोत ने अंत में प्रतिपक्ष के रचनात्मक सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनहित को लेकर उनके सुझावों को तवज्जो देगी। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष एवं प्रतिपक्ष मिलकर संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन देने में भागीदारी निभाएं।