CAA के तहत प्रताड़ित शरणार्थी साबित करने के लिए देना पड़ सकता है धर्म का सबूत

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नई दिल्ली: संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ एक ओर जहां देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं सरकार के सूत्रों ने जानकारी दी कि इस नये कानून के लिए नियम बनाने का काम आखिरी चरण में है. CAA के प्रावधानों की जानकारी देते हुए सूत्रों ने News18 को जानकारी दी कि नये कानून के तहत किसी के लिए भी खुद को प्रताड़ित साबित करने के लिए धार्मिक विश्‍वास का सबूत देना होगा.

सूत्र ने बताया कि सरकार सीएए अप्लिकेशन्स के लिए अलग विंडो की असम सरकार की मांग को भी स्वीकार कर सकती है. राज्य ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था कि यह विंडो कुछ समय के लिए ही खुले. यह समय सीमा कम से कम तीन महीने की हो सकती है ताकि अवैध अप्रवासी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकें.

गौरतलब है कि भारत और विदेशों में रहने वाले नागरिकों और राज्य सरकारों ने संशोधित अधिनियम को ‘भेदभावपूर्ण’ बताते हुए विरोध किया है. सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा में सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया, जो ऐसा करने वाला चौथा राज्य बन गया. इससे पहले केरल, राजस्थान और पंजाब ने प्रस्ताव पारित किया था.

EU की संसद में होगी बहस

वहीं ईयू संसद सीएए के खिलाफ कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी. संसद में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा. प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा. इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है.’

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बता दें सीएए भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है.