CBI जांच से नाखुश परिजन अब हाईकोर्ट में डालेंगे याचिका

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में बहुचर्चित कोटखाई गैंगरेप और मर्डर केस तीन साल बाद भी नहीं सुलझ पाया है. हालांकि, सीबीआई ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. लेकिन परिजन सीबीआई की जांच पर भी सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में गुड़िया की मां अब हाईकोर्ट में फिर याचिका दायर करेंगी.

दरअसल, देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि प्रार्थी को संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर करनी चाहिए. गुरुवार को गुड़िया की मां की याचिका की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि हिमाचल हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. सीबीआई ने मामले की जांच की थी. इन परिस्थितियों में प्रार्थी को हाईकोर्ट में सभी शिकायतों के निवारण को याचिका दायर करनी चाहिए. यह जानकारी मदद सेवा ट्रस्ट के प्रेस सचिव विकास थापटा ने शुक्रवार को शिमला में दी.

मदद सेवा ट्रस्ट कर रहा मदद

मदद सेवा ट्रस्ट इस मामले में गुड़िया के परिजनों को लीगल मदद कर रहा है. विकास थापटा ने कहा कि अगले सप्ताह हाईकोर्ट में गुड़िया की मां याचिका दायर करेंगी. गुड़िया के परिजन इस संबंध में हुई जांच से संतुष्ट नहीं हैं, पहले गैंगरेप से जांच शुरू की गई, जो बाद में चिरानी को आरोपी बनाकर निपटा दी गई, गांधीनगर फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट और नार्को टेस्ट को भी दरकिनार किया गया. इस मामले में दोबारा जांच होनी चाहिए.

कोर्ट को लोग लिखे पत्र

विकास थापटा ने कहा कि गुडियां के परिजनों ने पहले ही प्रदेश मुखयमंत्री को बताया था कि सीबीआई द्वारा की जा रही इस जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं. यहां तक कि पहले उन्होंने हाईकोर्ट को एक एप्लीकेशन लिखी थी, लेकिन उस पर गौर नहीं पाया था. उन्होंने कहा कि गुडिय़ा को न्याय दिलाने के लिए जितनी मात्रा में लोग झंडे और डंडे लेकर सड़कों पर उतरे थे उतने लोग अब फिर से गुडिय़ा को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट को पत्र लिखे, ताकि इस मामले पर गौर करे. विकास का कहना है कि जब इस मामले में गांधी नगर गुजरात में पांच लोगों के नार्को टेस्ट करवाए थे, तो इस नार्को टेस्ट रिपोर्ट में अन्य की भी इस मामले में संलिप्ता पाई गई थी. उसके बाद भी मामले की जांच में कुछ चेहरे को छुपाए गए है. विकास का कहना है कि उस दौरान जांच गैंगरेप की ओर जा रही थी, लेकिन मामले की सही से जांच न होने पर अभी तक गुडिय़ा को न्याय नहीं मिल पाया है.

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यह है मामला

4 जुलाई 2-17 का यह मामला है. शिमला के दांदी जंगल में स्कूल में पढ़ने वाली 16 साल की नाबालिग मृत मिली थी. हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को दी थी. मामले में लॉकअप में पूछताछ के दौरान एक नेपाली को मौत के घाट उतारा गया, जिसके आरोपी आईजी, एसपी समेत नौ पुलिसकर्मी बनाए गए. सीबीआई ने मामले में एक चिरानी नीलू को गिरफ्तार किया. उसे ही इस हत्या और दुराचार का आरोपी बनाकर मामले में कोर्ट में चालान पेश किया. अब कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है. इसी बीच मदद सेवा ट्रस्ट की सहायता लेकर गुड़िया की मां सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो वहां से यह फैसला आया है.