चंद्रशेखर आजाद-तिलक की जयंती पर मोदी-शाह ने दी श्रद्धांजलिव, ‘डर से कांपते थे अंग्रेज’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ट्वीट कर बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर याद किया.

  • बाल गंगाधर तिलक-चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज
  • पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह ने ट्वीट कर नमन किया

अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत देश की हस्तियों ने इस मौके पर आज इन्हें श्रद्धांजलि दी और नमन किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ‘भारत मां के दो वीर सपूत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को उनकी जन्म-जयंती पर शत-शत नमन’.

वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने अपने विचारों से स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहे भारत को नई दिशा प्रदान की. उन्होंने “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा” का नारा देकर भारत के जन-जन को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा, जो धीरे-धीरे पूरे भारत की सोच बन गया’.

इसके अलावा अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए लिखा कि चंद्रशेखर आजाद जी से अंग्रेजी हुकूमत थर-थर कांपती थी, उन्होंने कहा था कि “मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं, आज़ाद रहूंगा” और वो सच में अपनी अंतिम सांसों तक आज़ाद रहे. उनके राष्ट्रप्रेम ने देश के लाखों युवाओं के हृदय में स्वाधीनता की लौ जलाई. ऐसे अमर बलिदानी के चरणों में कोटि-कोटि वंदन’.

गौरतलब है कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हजारों-लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान न्योछावर की. इस दौरान संघर्ष के बीच कई दल बने थे, जिनमें मुख्य रूप से नरम दल और गरम दल काफी सुर्खियों में रहे थे. चंद्रशेखर आजाद और अन्य सेनानी गरम दल का हिस्सा थे.

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बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को हुआ था, कम उम्र से उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेना शुरू किया. मराठी भाषा में पत्राचार निकाले और लोगों को जागरूक करने का काम किया, कई बार जेल भी गए और राष्ट्रद्रोह के आरोपों का सामना किया.

दूसरी ओर अगर बात चंद्रशेखर आजाद की हो तो आज भी देश के युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं. मध्य प्रदेश में 23 जुलाई 1906 को आजाद का जन्म हुआ, करीब 14 साल की उम्र में वो आंदोलनों से जुड़ गए. उसी वक्त जेल भी जाना पड़ा और उसके बाद अंग्रेजों को हमेशा ही चंद्रशेखर आजाद खटकते रहे. आजाद ने ठानी थी कि कोई अंग्रेज उन्हें कभी जिंदा नहीं पकड़ पाएगा और ऐसा ही हुआ.