बचपन में मां गुजर गई, पिता नदी में डूबे; खाने को मोहताज और गोशाला में रहने को मजबूर दो अनाथ भाई

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बीडीओ देहरा डॉ. स्वाति गुप्ता ने बताया कि बच्चों के घर का निरीक्षण किया गया है. स्कूल फीस भर दी गई है. राशन भी मुहैया करवाया गया है.

कांगड़ा. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी उपमंडल की घुरकाल पंचायत में दो अनाथ बच्चे महेश और मोहित टूटे हुए कमरे में जिंदगी गुजारने पर विवश हैं. माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है. चाचा के सहारे दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो रहा था, लेकिन कोरोना काल के चलते वो भी कभी मिल पा रही है, कभी नहीं.

इसी दुर्दशा को देखने बीडीओ देहरा डॉ. स्वाति गुप्ता मंगलवार को दोनों अनाथ बच्चो के घर पहुंची और उनसे बातचीत की. साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान की. इसके साथ ही बीडीओ देहरा ने उनके स्कूल की फीस का खर्चा भी दिया. पंचायत प्रधान व सचिव ने बच्चों को राशन मुहैया करवाया.

मां का बचपन में निधन

गौरतलब है कि दोनों बच्चे महेश व मोहित क्रमशः दसवीं व जमा दो में पढ़ते हैं. मोहित की उम्र 16 व महेश की 14 बर्ष है. बच्चों के ताऊ राकेश कुमार ने बताया कि 2006 में बड़ा बेटा जब डेढ़ बर्ष का था, तब बच्चो की माँ का देहांत हो गया था और 2017 में इनके पिता का व्यास नदी में पैर फिसलने से मौत हो गयी थी. तब से आज तक इनकी परवरिश हो रही है, लेकिन कोरोना ने अब हाथ खड़े कर दिए हैं. दो दिन काम मिलता है तो पांच दिन लगाकर खाते हैं. फिलहाल महेश व मोहित को बीपीएल परिवार में चयनित कर लिया गया है. अभी फिलहाल बच्चे टूटे हुए गोशालानुमा कमरे में रहते हैं, जहाँ बिजली का प्रबन्ध भी नहीं है.

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गांव के लोग कर रहे मदद

मोहित व महेश ने बताया कि चाचा परवरिश कर रहे हैं. कभी-कभी गांव वाले भी मदद करते हैं, जिससे उनका गुजर बसर चल रहा है. बच्चों और चाचा ताऊ ने सरकार से मदद की मांग की है, ताकि कोरोना काल मे दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके और इन अनाथों को छत नसीब हो सके.

क्या बोला प्रशासन

बीडीओ देहरा डॉ. स्वाति गुप्ता का कहना है कि उन्होंने अनाथ बच्चों के घर का निरीक्षण किया है और उनके स्कूल की फीस भरी है औक राशन भी मुहैया करवाया है. दोनों बच्चो को बीपीएल में ले लिया गया है. ग्राम सभा की अगली बैठक में सभी औपचारिकता पूरी करके प्राथमिकता के आधार पर इनका घर बनबाया जाएगा और हर सम्भव मदद की जाएगा.