CM अशोक गहलोत ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा तो बीजेपी भी पलटवार करने उतरी.

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जयपुर: सरकार गिराने के षड्यंत्र के आरोपों के बीच CM अशोक गहलोत ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा तो बीजेपी भी पलटवार करने उतरी. जिन तीन नेताओं के नाम मुख्यमंत्री ने अपने आरोपों में लिये वे तीन नेता मीडिया के सामने आरोपों पर बचाव करने आए. हालांकि नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया जयपुर में नहीं थे, लेकिन प्रेस के सामने वे भी वीडियो कॉन्फ्रेन्स के जरिये जुड़े.

बीजेपी ने कहा कि सरकार खुद आशंकित है, हताश है, निराश है और कांग्रेस में अन्तर्विरोध है. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि अपना आपसी मनमुटाव और बौखलाहट छिपाने के लिए सरकार ने खुद ही यह खेल रचा. प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने भी इस स्क्रिप्ट का रचनाकार और मुख्य किरदार मुख्यमंत्री अशोक गहगलोत को ही बताया.

CM गहलोत और पायलट की अनबन का फायदा उठाना चाहते थे विरोधी, रहे नाकाम

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानि एसओजी ने विस्फोटकों की तस्करी और इसके अवैध कारोबार करने वाले कुछ लोगों के फोन सर्विलांस पर लिये तो इन लोगों की बातचीत से प्रदेश में नया राजनीतिक विस्फोट हो गया. बातचीत में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को गिराने के षड्यंत्र के सुराग लगे. एसओजी में एफाईआर दर्ज हुई तो इसके बाद खुद CM अशोक गहलोत भी आरोपों का पिटारा लेकर मीडिया से रूबरू हुआ. गहलोत ने अपने तरकश का निशाना बीजेपी पर लगाया तो बीजेपी के नेता भी पार्टी के सामने ढाल बनकर खड़े होते दिखाई दिये.

बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने CM के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कभी घोड़े की बात करने वाले मुख्यमंत्री ने आज विधायकों को बकरा मंडी बता दिया और वे बकरा ट्रेडिंग पर आ गए. पूनिया ने सवाल उठाया कि हॉर्स ट्रेडिंग और बकरा मण्डी में खरीद-फरोख्त के आरोप लगाने वाले मुख्यमंत्री की जादूगरी का ही कमाल है कि गहलोत ने खुद दो कार्यकाल में बसपा के हाथी को गायब कर दिया और वे उसका ज़िक्र तक नहीं करते.

पूनिया ने कहा कि अभी तक के तकरीबन पौने दो साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने बीजेपी और उसके नेताओं पर आरोप लगाने का काम ही किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आरोप लगाने का नैतिक अधिकार इसलिए भी नहीं है. क्योंकि कोरोना संक्रमण के दौर में वे जनता का दुख-दर्द जानने के लिए एक भी बार बाहर नहीं निकले. पूनिया ने कहा कि गहलोत चाहे अपनी पार्टी के लोगों को गद्दार कहें या कुछ और लेकिन अगर वे इन्हें जानते हैं तो इन गद्दारों के नाम भी तो उजागर कर दें.

इतना ही नहीं पूनिया ने कहा कि राज्य सभा चुनाव से पहले दस दिन तक सेवन स्टार होटल में रहने वाली पार्टी और उसके मुख्यमंत्री यही बता दें कि इन दस दिन में उन्होंने किस-किस से क्या बात की. तो ही वे मान लेंगे की उनसे बड़ा ईमानदार और गांधीवादी कोई नहीं है.

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2023 के चुनाव जीतने के लिए तैयारियों के बयान पर मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश की

इसके साथ ही पूनिया ने साल 2023 के चुनाव जीतने के लिए तैयारियों के बयान पर मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश की. उन्होंने इसे मुंगेरी लाल के सपने करार देते हुए कहा कि जनता सब देख रही है. पूनिया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का उदाहरण देते हुए कहा कि एक पार्टी छोड़कर दूसरी में जाने में किसी तो क्या ऐतराज हो सकता है? बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में हो रहे घटनाक्रम से लगता है कि मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत को देश का नेता बनने की जल्दी है.

इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी सरकार को घेरने में कसर नहीं छोड़ी. कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री बहुत निचले स्तर पर उतर गए हैं. उन्होंने सीएम की शब्दावली पर ऐतराज जताया तो साथ ही कहा कि कांग्रेस अपनी सिर फुटव्वल का ठीकरा बीजेपी के माथे नहीं मढ़ सकती. कटारिया ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि या तो उन पर लगे हुए आरोप मुख्यमंत्री साबित करें या फिर राजनीति छोड़ दें.

सरकार खुद ही अस्थिर है और अपने भीतर के ही लोगों से डरी हुई है.

इधर सरकार पर जवाबी हमला बोनलने के लिए एकजुटता दिखाते हुए प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि किन्हीं दो लोगों की फोन टैपिंग के आधार पर मुख्यमन्त्री बीजेपी पर निशाना लगाने की कोशिश कर रहे हैं. राठौड़ ने कहा कि सरकार विधायकों के भी फोन टैप करा रही है और इसकी जितनी निन्दा की जाए उतनी कम है. राठौड़ ने मुख्यमंत्री को भयाक्रान्त बताते हुए कहा कि सरकार खुद ही अस्थिर है और अपने भीतर के ही लोगों से डरी हुई है. राठौड़ ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का रचनाकार, मुख्य पात्र और सूत्रधार अगर कोई एक व्यक्ति है तो वह सिर्फ मुख्यमंत्री ही हैं. उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार एसओजी और दूसरी ऐजेन्सियों का बेजा इस्तेमाल करके लोगों में डर बिठाने की कोशिश कर रही है.

इधर पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने बीजेपी नेता गुलाबचंद कटारिया, सतीश पूनिया और राजेन्द्र राठौड़ पर बीजेपी के आलाकमान को खुश करने का आरोप लगाया तो पूनिया ने माना कि वे अपनी पार्टी के आलाकमान को खुश करेंगे. उन्होंने कहा कि वे सोनिया और राहुल गांधी को नहीं, बल्कि मोदी और शाह को ही खुश करेंगे. इसके उलट पूनिया ने कांग्रेस नेताओं पर दिल्ली के नेताओं की खुशामद करने के आरोप लगा दिए.