विधानसभा सत्र से पहले CM अशोक गहलोत ने सभी विधायकों के नाम लिखी चिट्ठी

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जयपुर : राजस्थान में विधानसभा सत्र 14 अगस्त से शुरू होगा और  इसमें बहुमत परीक्षण भी करवाया जा सकता है. ऐसे में सत्र से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी विधायकों  के नाम एक चिट्ठी लिखकर उनसे सच्चाई का साथ देने की अपील की है. सीएम ने पत्र में लिखा है कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है और जनता का फैसला ही शिरोधार्य होता है. यही हमारी परम्परा रही है. अशोक गहलोत ने कहा है कि वर्तमान में जो सियासी घटनाक्रम चल रहा है, उसे लेकर षड़यंत्र रचने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जनता में भयंकर आक्रोश है. सीएम गहलोत सभी विधायकों से अपील की है कि जनता का विश्वास बरकरार रखने और गलत परम्पराओं से बचने के लिए उन्हें आम लोगों की आवाज सुननी चाहिए. उन्होंने कहा कि परिवारजनों और अपने क्षेत्र की जनता की भावनाओं को समझकर वे यह सुनिश्चित करें कि चुनी हुई सरकार अपना काम करती रहे और सरकार को अस्थिर करने के मंसूबे कामयाब न हो सके.

बसपा विधायकों का विलय सही
वहीं, बसपा विधायकों के मामले में 11 अगस्त को हाईकोर्ट से फैसला आना है. मुख्यमंत्री ने विधायकों के नाम अपने पत्र में बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को सही ठहराते हुए कहा है कि दलबदल कानून के दायरे में यह विलय हुआ है और बसपा विधायकों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए विलय का रास्ता चुना है.  सीएम ने लिखा कि तोड़फोड़ कर और खरीद-फरोख्त के जरिए चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना न्यायोचित नहीं है, साथ ही यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ भी है. अपने पत्र में सीएम ने यह भी लिखा है कि 1993-98 के दौरान जब राजस्थान में ऐसी ही स्थिति बनी थी तब उन्होंने केन्द्रीय राज्यमंत्री और पीसीसी चीफ होने के नाते तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत और तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मिलकर इसका विरोध जताया था. सीएम ने लिखा कि जब कोरोना महामारी विकराल रुप धारण कर रही है, तो ऐसे समय में हमारे कुछ साथी और विपक्ष के कुछ नेता मिलकर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

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सरकार की गिनाई उपलब्धियां
इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं. सीएम ने लिखा है कि पिछले डेढ़ साल में सरकार ने प्रदेश में विकास और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का हर संभव प्रयास किया है. उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार के फैसलों की हर तरफ तारीफ हुई है. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने में भी राज्य सरकार मुस्तैदी से जुटी हुई है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है. उन्होंने लिखा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी चुनाव हारे लेकिन लेकिन उन्होंने राजनीतिक मर्यादाओं और संवैधानिक मूल्यों को कभी कमजोर नहीं होने दिया. सीएम ने लिखा कि जनता से चुनकर आने वाले नुमाइंदे चाहे वे किसी भी गुट से हो हम उनका सम्मान करते हैं और उनके क्षेत्र की जायज मांगों को बिना भेदभाव के पूरा करवाने का प्रयास करते हैं. आगामी विधानसभा सत्र से पहले सीएम द्वारा लिखे गए इस पत्र के कई मायने निकाले जा रहे हैं.