सीएम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को दी दो बड़ी सौगात, वेतन कटौती अब अनिवार्य नहीं स्वैच्छिक होगी

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जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को दो बड़ी सौगातें दी हैं। उन्होंने रविवार को प्रदेश के 7.30 लाख सरकारी कर्मचारियों को दीपावली पर तदर्थ बोनस देने की घोषणा की। यानी कर्मचारियों को बोनस का 25% हिस्सा नकद दिया जाएगा, जबकि 75% राशि कर्मचारी के सामान्य प्रावधायी निधि खाते (जीपीएफ) में जमा करवाई जाएगी। इसी प्रकार, एक जनवरी 2004 व इसके बाद नियुक्त कर्मचारियों को देय तदर्थ बोनस राज्य सरकार द्वारा एक पृथक योजना तैयार कर उसमें जमा कराया जाएगा। इससे प्रदेश सरकार पर 500 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आने की संभावना है। इसके अलावा कोविड के कारण कर्मचारियों के वेतन से की जा रही कटौती पर भी सीएम ने राहत दी। उन्होंने इस कटौती को स्वैच्छिक कर दिया है। यानी अब वेतन से राशि तभी कटेगी जब कर्मचारी चाहेगा।

कोविड के कारण वेतन से काटी जा रही थी राशि का किया था विरोध

गहलोत ने कहा कि पूर्व में अकाल, बाढ़, भूकम्प, अतिवृष्टि एवं भू-स्खलन जैसी आपदाओं के समय कर्मचारियों ने आगे बढ़कर स्वेच्छा से वेतन कटौती करवाकर योगदान दिया है। मार्च में कोविड-19 का प्रकोप सामने आने पर अधिकारियों-कर्मचारियों के 29 संगठनों ने सरकार को संक्रमण रोकने और पीड़ितों की सहायतार्थ वेतन से कटौती का अनुरोध किया था। मुख्य सचिव और एसीएस (वित्त) के साथ 20 अगस्त को कर्मचारी संगठनों की बैठक में भी वेतन कटौती पर सहमति बनी थी, लेकिन कुछ कर्मचारी साथियों के वेतन कटौती समाप्त करने के अनुरोध पर आगे से यह कटौती स्वैच्छिक किए जाने का निर्णय लिया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश को केंद्र से जीएसटी क्षतिपूर्ति की पूरी राशि नहीं मिलने के बावजूद राज्य सरकार वर्तमान में 5500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज ले रही है। करीब 80 लाख पेंशनरों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत तीन माह की करीब 1950 करोड़ रुपये की पेंशन का अग्रिम भुगतान मात्र 35 दिन में ही किया गया, ताकि इस विकट कोरोनाकाल में उनकी वित्तीय तरलता बनी रहे। सीएम ने कहा कि विषम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद महामारी से मुकाबले व जरूरतमंदों की सहायता के लिए संसाधनों में किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी।

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