जिसका RSS से है लिंक, टेक्सास से सांसद का चुनाव लड़ रहा वो भारतवंशी

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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स कर रहे भारतीय मूल के अमेरिकी प्रेस्टन कुलकर्णी विवादों में हैं. उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा नाता बताया जा रहा है.

भारतीय मूल के अमेरिकी प्रेस्टन कुलकर्णी ट्रंप की पार्टी की तरफ से चुनाव में खड़े हैं. पूर्व राजनयिक रह चुके कुलकर्णी इरान और इजरायल जैसे देशों में तैनात रह चुके हैं और हमेशा से अपनी कूटनीति और मजबूत इरादों के लिए जाने जाते रहे. दिलचस्प बात ये है कि इनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी नाता है.

भारतीय वोटरों को लुभाने की राजनीति 
ट्रंप की पार्टी डेमोक्रेट्स भारतवंशी अमेरिकी वोटरों को लुभाने के लिए सारी दांव खेल रही है. इसमें भारतीयों के मुद्दों को अपने चुनावी एजेंडा का हिस्सा बनाना तो शामिल है ही, साथ ही भारतीय अमेरिकी लोगों को भी चुनाव प्रचार में जगह मिल रही है. यहां तक कि भारतीय मूल के उम्मीदवार भी पार्टी में दिख रहे हैं. प्रेस्टन कुलकर्णी ऐसा ही एक नाम हैं, जो टेक्सास जैसे अहम राज्य से दावेदार हैं.

लगभग 41 साल के कुलकर्णी रिपब्लिकन के ट्रॉय नेहल्स के मुकाबले में खड़े हैं और अगर वे जीतते हैं तो पहले हिंदू प्रतिनिधि होंगे, जो टेक्सास से जीतेगा. आबादी के लिहाज से ये स्टेट काफी बहुलता वाला है. यहां श्वेत नस्ल के लोगों की आबादी लगभग 64 प्रतिशत है, लेटिन मूल के लोग 25, एशियन आबादी 17 प्रतिशत, जबकि 12 प्रतिशत लोग अश्वेत हैं.

ये डाटा सेंसर ने जारी किया, जो बताया है कि यहां श्वेतों की बहुलता के बीच किसी हिंदुस्तानी का पैठ बनाना कितना मुश्किल हो सकता है. हालांकि इसके बाद भी कुलकर्णी को यहां से सीट मिलना उनकी मजबूती को ही बताता है.

क्या है कुलकर्णी का इतिहास
साल 1969 में कुलकर्णी का परिवार भारत से अमेरिका पहुंचा, जहां 1978 में अमेरिका के लुसियाना में उनका जन्म हुआ. कुलकर्णी के पिता व्यंकटेश कुलकर्णी भारतीय उपन्यासकार और शिक्षाविद रहे, जबकि उनकी मां मार्गरेट प्रेस्टन कुलकर्णी वेस्ट वर्जिनिया से हैं.

कुलकर्णी को राजनीति विरासत में मिली मानी जाती है. इसकी वजह है उनकी मां मार्गरेट का परिवार. असल में मार्गेरट के पूर्वज सैम हॉस्टन 19वीं सदी में मैक्सिको से अमेरिका आए थे और टेक्सास की राजनीति में अहम योगदान दिया था. द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुद कुलकर्णी एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान ये बात कह चुके हैं.

पिता के कैंसर ने छुड़वाई पढ़ाई
वैसे इन्हीं कारणों से टेक्सास में उनकी अच्छी-खासी पकड़ है. कुलकर्णी की चुनावी वेबसाइट में उनके संघर्षों का भी जिक्र मिलता है. उन्हें टेक्सास यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई 18 साल की उम्र में ही छोड़नी पड़ी क्योंकि उसी दौरान उनके पिता व्यंकटेश कुलकर्णी को ब्लड कैंसर का पता चला था. पिता की मौत के बाद कुलकर्णी ने अपने तीन छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी ली. आगे चलकर उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल ली.

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कोकीन का नशा भी जब्त हुआ था
कुलकर्णी की लोकप्रियता की एक वजह उनका जमीन से जुड़ा होने के अलावा ये भी है कि वो अमेरिकी युवाओं के मुद्दों को एड्रेस करते हैं. खुद कुलकर्णी के अनुसार किशोरावस्था में वे हिंसा, अपराध जैसी चीजों की गिरफ्त में आए थे. यहां तक कि साल 1997 में उन्हें कोकीन जैसा नशा रखने के अपराध में गिरफ्तार भी किया गया था. इस बारे में बात करते हुए वे साफ कहते हैं कि हमें अपनी युवावस्था में हुए इन अपराधों की ग्लानि में बाकी जिंदगी खराब नहीं करनी चाहिए.

आरएसएस से लिंक की बात
साल 2003 में वे अमेरिकी विदेश सेवा का हिस्सा बने. यहां से उनकी जिंदगी का नया दौर शुरू हुआ, जिसके साथ वे इराक, इजरायल, ताइवान, जमैका और रूस जैसे देशों में राजनयिक के तौर पर रहे. कई भाषाओं पर समान पकड़ रखने वाले कुलकर्णी के बारे में ये भी कहा जाता है कि उनके RSS से संबंध हैं. ऐसा यूं ही नहीं कहा जा रहा. असल में अमेरिका में ये संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से है. वहां इसके वाइस-प्रेसिडेंट रमेश भूटाडा से कुलकर्णी के घनिष्ट संबंध हैं.

बातों में है विरोधाभास 
खुद कुलकर्णी ने माना था कि रमेश उनके पिता के समान हैं. दूसरी ओर कुलकर्णी का ये भी कहना है कि दो साल पहले तक उन्हें RSS के बारे में कुछ नहीं पता था. इस बारे में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने एक ट्वीट भी किया था. इसके बाद कुलकर्णी ने संगठन से अपना कोई संबंध न होने की बात कहते हुए ओपन लेटर भी लिखा था.

भूतपूर्व नेता प्रमोद महाजन से रिश्तेदारी
कुलकर्णी के RSS को न जानने के दावे के पीछे कितनी सच्चाई है, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन उनके बारे में एक और चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि वे भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन से भतीजे हैं. बता दें कि पार्टी से जुड़ने से पहले प्रमोद महाजन RSS का हिस्सा रहे थे.