क्या कोरोना और भारत-चीन सीमा विवाद पर पड़ेगा साल के पहले सूर्यग्रहण असर ?

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नई दिल्ली. रविवार यानी 21 जून की सुबह साल का पहला सूर्यग्रहण (Surya Grahan 2020 Solar Eclipse) होगा जो भारत में दिखेगा. सूर्यग्रहण 21 जून 2020 को सुबह 10 बजकर 21 मिनट से दोपहर 13 बजकर 47 मिनट तक दिखाई देगा. यह ग्रहण अफ्रीका, पाकिस्तान, भारत और चीन के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है. इसमें पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है, जिससे सूर्य का पूरा या आंशिक प्रकाश धरती पर नहीं पड़ता है. ऐसे में ज्योतिष के जानकार साल के इस पहले सूर्यग्रहण को लेकर कई तरह की बातें कर रहे हैं. ज्योतिष में कोरोना महामारी से लेकर भारत-चीन सीमा विवाद को भी इस सूर्य ग्रहण से जोड़ कर देखा जा रहा है.

ज्योतिषों का कहना है कि यह एक पूर्ण सूर्यग्रहण है. जब सूर्य पूरी तरह ढक जाता है और रोशनी सूर्य के चारों ओर से एक रिंग या कंगन की तरह दिखने लगती है तो उसे कंकण सूर्यग्रहण या खग्रास कहते हैं. जब सूर्य का कुछ हिस्सा ही ग्रहण के दौरान ढक जाता है तो उसे आंशिक या खंडग्रास ग्रहण कहते हैं.

क्या कहना है ज्योतिषविदों का

इससे पहले दिसंबर 2019 में भी सूर्य ग्रहण लगा था, जिसके बाद से कोरोना माहामारी का मामला सामने आया और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया. अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के ज्योतिषि अतुल सहाय कहते हैं, ‘इस सूर्य ग्रहण का भी व्यापक प्रभाव पडे़गा. कोई भी ज्योतिषविद ईश्वर नहीं है और शत-प्रतिशत नहीं बता सकता है कि वास्तव में क्या होगा? हां, इतना जरूर है कि ग्रहों की गणना के आधार पर अस्सी से नब्बे प्रतिशत घटित होने वाली संभवानाओं को इंगित किया जा सकता है.’

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भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या कहता है ज्योतिष

जब भारत और चीन की मौजूदा स्थिति पर सूर्यग्रहण को लेकर उनसे सवाल पूछा तो अतुल सहाय का कहना था, ‘हमारी गणना के अनुसार युद्ध की कैसी भी स्थिति हो जाए पर सीमावर्ती देशों से युद्ध नहीं हो सकता है. रोज-रोज की झड़प को युद्ध नहीं कहा जा सकता है.’

जातक के राशियों पर भी जब अतुल सहाय से सूर्यग्रहण के प्रभाव के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि हां कुछ राशियों के जातकों को दुर्घटना, गंभीर रोग, कानूनी समस्या, पारिवारिक कलह और संबंध विक्षेद से गुजरना पड़ सकता है. गणना के अनुसार लगभग अगले 140 से 180 दिन बहुत भारी कष्टकारी रहेंगे! खासकर जहां-जहां यह सूर्य ग्रहण दिखेगा. जैसे- मध्य अफ्रीका के कांगो, ईथोपिया, साथ ही पकिस्तान के दक्षिणी इलाके, उत्तर भारत और चीन के अधिकतर भाग पर प्रभाव हो सकते हैं!

क्या-क्या प्रभाव हो सकते हैं

गंभीर भूकंप, अतिवृष्टि, बाढ़, जनाक्रोश, अराजकता, किसी राज्य या देश में सत्ता परिवर्तन, कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तित्व की हत्या या निधन, कई देशों की सरहदों पर युद्ध की स्थिति बन सकती है.

मंगल की दृष्टि सूर्य और राहु पर होने के कारण अग्निजनक संकट जैसे विस्फोट और विष्फोटक स्थिति, वायु दुर्घटना और कई विपदाएं और प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलेंगी. इसके साथ-साथ वर्तमान में कोरोना महामारी का इलाज़ भी मिलेगा!