कोरोना पीड़ितों को मिलेगी नई जिंदगी, KGMU में प्लाज्मा बैंक शुरू

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लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय KGMU में कोरोना इलाज को लेकर अच्छी खबर है. इस अस्पताल में 15 अगस्त से प्लाज्मा बैंक ने काम करना शुरू कर दिया है. KGMU के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में उत्तर प्रदेश का पहला प्लाज्मा बैंक स्थापित किया गया है.

उत्तर प्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस प्लाज्मा बैंक का उद्घाटन किया गया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कोरोना काल में प्लाज्मा थेरेपी कारगर है. प्लाज्मा डोनेशन के लिए संक्रमण से मुक्त हो चुके नागरिकों को प्रेरित करना चाहिए, जिससे कि वह प्लाज्मा डोनेट कर सकें ताकि वायरस से संक्रमित लोग ठीक हो सकें और प्लाज्मा की भी कमी ना रहे.

कोरोना रोगियों के लिए मदद में कारगर

केजीएमयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ विपिन पुरी ने कहा कि प्रदेश का पहला प्लाज्मा बैंक कोरोना मरीजों के लिए राहत की खबर लेकर आया है. उन्होंने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी डेफिनिटिव ट्रीटमेंट तो नहीं है लेकिन एक राहत का तरीका है, जिसमें मरीजों के स्वास्थ्य की रिकवरी की जा सकती है. इस प्लाज्मा थेरेपी के जरिए हम उत्तर प्रदेश की जनता तक कोरोना के इलाज को पहुंचा सकते हैं.

डोनेशन से पहले कंफर्म की जाती है पहचान

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की हेड ऑफ डिपार्टमेंट तूलिका चंद्रा ने प्लाज्मा डोनेशन की प्रक्रिया को समझाया. डॉक्टर चंद्रा ने कहा कि सबसे पहले जो प्लाज्मा डोनेट करने आते हैं, उस प्लाज्मा डोनर की काउंसलिंग एरिया में फिटनेस टेस्ट किया जाता है. प्लाज्मा काउंसलिंग एरिया में आने के बाद सबसे पहले हैंड सैनिटाइज करवाया जाता है. इसके बाद बायो मेट्रिक तरीके से पहचान को कन्फर्म किया जाता है. इसके बाद आई रेज स्कैनिंग के जरिए आंखों की जांच की जाती है ताकि उनकी पहचान हमारे सिस्टम में फीड हो सके.

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प्लाज्मा डोनेशन सुरक्षित

इन प्रक्रियाओं के बाद प्लाज्मा डोनर का मेडिकल टेस्ट किया जाता है ताकि उसके स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टरों को पता हो सके. डॉक्टर प्लाज्मा डोनर को यह भी समझाते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने पर किसी तरह का रिस्क नहीं होता है. इसके बाद कुछ प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उसे प्लाज्मा डोनेशन एरिया में भेजा जाता है. यहां पर प्लाज्माफेरेसिस की मशीन के जरिए डोनर अपना प्लाज्मा डोनेट करता है.