मैग्नीशियम की कमी से हो सकती है बेचैनी, थकान और चिंता, ऐसे करें बचाव

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कोरोना वायरस  और लॉकडाउन में लोगों के जीवन को हर तरह से प्रभावित किया है. इन दिनों कोई बेचैनी , घबराहट महसूस करने लगता है, नींद आना भी एक भारी काम जैसा लगने लगता है. कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि जिंदगी में अचानक बदलाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. हालांकि, ये अकेलापन, चिंता या घबराहट शरीर में मैग्नीशियम की कमी के संकेत भी हो सकते हैं. मैग्नीशियम एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो अवसाद और चिंता पर सीधा प्रभाव डालता है. इसीलिए इसकी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

व्यक्ति को अपने मूड में बदलाव और अवसाद के सही कारण को समझने के लिए किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. यदि मैग्नीशियम की कमी है तो इस मिनरल की पर्याप्त मात्रा में अपने आहार से पूरा करना चाहिए या अपने चिकित्सक द्वारा बताई गई खुराक लेनी चाहिए. यूं तो मैग्नीशियम की शरीर को कम मात्रा में जरूरत होती है. इसकी मात्रा उम्र और लिंग के आधार पर 300 से 400 मिलीग्राम / दिन होना चाहिए. शरीर में कई प्रकार के कार्यों के लिए मैग्नीशियम आवश्यक है. मैग्नीशियम प्रतिरक्षा प्रणाली यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत, तंत्रिका और मांसपेशियों और हृदय व हड्डियों को मजबूत रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. दिल और गुर्दों को अच्छे से काम करने के लिए मैग्नीशियम की जरूरत पड़ती है.

मैग्नीशियम की कमी के लक्षण

इसकी कमी के कुछ संकेतों में शारीरिक और मानसिक थकान, सिरदर्द, डिप्रेशन, अनिद्रा, चिंता, मांसपेशियों में ऐंठन, सुबह के समय बीमार जैसा महसूस होना, बाल झड़ना, मतली और उल्टी, बार-बार पलकें झपकना, व्यवहार संबंधी समस्याएं आदि हैं. यदि मैग्नीशियम का स्तर गंभीर रूप से कम हो जाता है तो मिर्गी जैसे लक्षण विकसित होने लगते हैं.

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मैग्नीशियम की कमी के कारण

मैग्नीशियम की कमी के कई कारण हो सकते हैं. भोजन में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम न लेने से लेकर शरीर से अत्यधिक मात्रा में मैग्नीशियम निकलना आदि शामिल हैं. रोजाना ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन भी इसके स्तर को प्रभावित कर सकता है. शराब की लत इसकी कमी का जोखिम बनती है. अधिक एंटीबायोटिक दवाएं लेना पाचन तंत्र प्रणाली को क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे मैग्नीशियम से उच्च खाद्य पदार्थों को पचाने में कठिनाई होने लगती है.

ऐसे दूर करें मैग्नीशियम की कमी

इसकी कमी को रोकने के लिए पहले तो आहार पर ध्यान देना होगा. हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करें क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है. बादाम, काजू में मैग्नीशियम भरपूर होता है. सोयाबीन, तिल, केला, मछली, एवोकाडो, टोफू, मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं. गेहूं, अनाज मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं. काले सेम यानी ब्लैक बीन्स में मैग्नीशियम सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है. अवसाद से निपटने के लिए अपने आहार में विटामिन के साथ मैग्नीशियम का सेवन जरूरी है. मैग्नीशियम का स्तर गंभीर रूप से कम होने पर नसों के जरिए इसकी पूर्ति की जाती है. इसमें मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं. मैग्नीशियम का स्तर गंभीर रूप से कम होने पर कैल्शियम और पोटेशियम इलेक्ट्रोलाइट का स्तर भी कम हो जाता है. ऐसे में डॉक्टर कैल्शियम और पोटेशियम सप्लीमेंट्स भी देते हैं.