क्यों सवालों घेरे में है कोविड-19 वैक्सीन को लेकर रूसी दावे, जानिए

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रूस ने कोविड-19 वैक्सीन ट्रायल को सफल बताते हुए दावा किया है कि उसकी वैक्सीन पूरी तरह प्रभावी है, लेकिन इस पर संदेह जताया जा रहा है.

कोविड-19 की वैक्सीन के लिए दुनिया भर में परीक्षण चल रहे हैं. हाल ही में रूस ने दावा किया है कि उसने कोविड-19 वैक्सीन खोज ली है और वह लोगों पर कारगर साबित हो रही है. रूस के इस दावे पर संदेह की नजर से देखा जा रहा है. ऐसा नहीं है कि अन्य वैक्सीन के दावेदार सटीक साबित नहीं हो रहे हैं. लेकिन कई देशों का कहना है कि जिस तरह से वैक्सीन की पुष्टि की प्रक्रिया है, रूस उसके पूरी होने के पहले ही वैक्सीन की सटीकता का दावा कर रहा है जो गलत है. रूस के दावों के संदेह के कई कारण बताए जा रहे हैं.

यह दावा है रूस का

रूस ने इस दवा का नाम अपने और दुनिया के पहले अंतरिक्ष यान स्पूतनिक के नाम पर स्पूतनिक-V रखा है और उसे लोगों के लिए प्रभावी घोषित करते हुए देश के नियामक की आधिकारिक अनुमति भी दे दी गई है. रूसी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा है कियह दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम है. और यह वैक्सीन पूरी तरह से कारगर है और प्रतिरोधी क्षमता को स्थायी करने में पूरी तरह से सक्षम है. उन्होंने कहा कि उनकी दो बेटियों में एक पर इस वैक्सीन का प्रयोग किया गया है और वह अच्छा महसूस कर रही है.

कई देशों में असहजता

इस वैक्सीन को लेकर दुनिया के कई देशों में असहजता है जिसमें अमेरिका और कई यूरोपीय देश शामिल हैं. कहा जा रहा है कि रूस ने परीक्षण की प्रक्रिया के पूरे न होने से पहले ही अपना कर जल्दबाजी में वैक्सीन की घोषणा की है जिससे इसकी प्रभावोत्पादकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. अमेरिका ने रूस के खिलाफ बहुत तीखे तेवर तो नहीं अपनाए हैं, लेकिन वहां के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ एंथोनी फॉसी ने रूस और चीन दोनों के ऊपर सही प्रक्रिया का पालन करने पर संदेह जताया है.

क्या जल्दबाजी की है रूस ने

फिलहाल दुनिया भर में कई वैक्सीन के दावेदार दवाओं अंतिम परीक्षणों के दौर में हैं जिसमें ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड की एस्त्राजेनेका और मोडर्ना जैसी वैक्सीन आगे चल रही हैं, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन सरकार ने जल्दबाजी दिखा कर अपने ही नागारिकों की जान जोखिम में डाली है.

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WHO की भी आपत्ति

इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि रूस ने उसके साथ वैक्सीन संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की है. विशेषज्ञों के इस संदेह की ठोस वजह यह है कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन के ट्रायल में सालों का समय लग जाता है जिसे रूस की दवा ने केवल दो ही महीनों में पूरा कर लिया है.

पिछले महीने ही पूरा हुआ था ट्रायल का पहला चरण

अभी तक रूस ने इस दवा को क्लीनिकल ट्रायल्स के केवल पहले चरण के नतीजे सार्वजनिक किए हैं. जिसमें रूस ने पूरीक्षण के सफल होने का दावा किया है. करीब एक महीने पहले रूस के रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि किसी भी उस ट्रायल के किसी भी प्रतिभागी ने कोई शिकायत या साइड इफेक्ट्स जैसी बात नहीं कही है.

एक महीने के भीतर ही ट्रायल पूरे होने का ऐलान

सामाचार रिपोर्ट्स के मुताबिक दूसरा चरण 13 जुलाई को शुरू हुआ था और 3 अगस्त को मीडिया में कहा गया था गामालेया इंस्टीट्यूट ने क्लीनिकल ट्रायल्स को पूरा कर लिया है. इन रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि क्या केवल दूसरा चरण पूरा हुआ है या तीनों चरण पूरे किए हैं. जबकि दूसरे चरण में ही कुछ महीनों का समय लग जाता है. इसमें भी खास बात यह भी है कि रूस ने पहले संकेत दिए थे कि नियामक से अनुमति मिलने के बाद ही मानवीय परीक्षण का तीसरा चरण पूरा किया जाएगा. इस चरण में हजारों लोगों पर परीक्षण किया जाता है.

संदेह के दावों के बावजूद भी कई देशों ने वैक्सीन ने रुचि दिखाई है. इनमें ब्राजील और भारत जैसे देश भी शामिल हैं. तो वहीं कई देशों ने अंतिम ट्रायल में भागीदारी की दिलचस्पी दिखाई है. जो भी हो इतना तय है कि अब वैक्सीन को लेकर एक तरह का शीत युद्ध छिड़ जाए तो शायद ही विशेषज्ञों का हैरानी हो.