DGP को लिखी चिट्ठी, जयपुर ब्‍लास्‍ट के गुनहगारों को मौत की सजा सुनाने वाले जज को सता रहा जान का खतरा

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जयपुर बम ब्लास्ट केस के 4 आतंकवादियों को गत वर्ष फांसी की सजा सुनाने वाले जज अजय कुमार शर्मा अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

जयपुर. करीब 11 साल बाद जयपुर के गुनहगारों को फांसी की सज़ा सुनाने वाले जज अजय कुमार शर्मा को अब अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है. इसे लेकर उन्होंने राज्य के डीजीपी भूपेंद्र सिंह को पत्र लिखा है. इस पत्र में सेवानिवृत्त जज ने कहा कि आईबी की रिपोर्ट के अनुसार मुझे और मेरे परिवार से आतंकी ग्रुप कभी भी बदला ले सकते हैं. वहीं, दूसरी ओर मुझे सूचना मिली है कि पुलिस लाइन के अधिकारी मुझे दी गई सुरक्षा को हटाने जा रहे हैं. ऐसे में मुझे दी गई सुरक्षा को यथावत रखा जाए.

अपने पत्र में रिटायर्ड जज ने कहा कि उनके घर पर शराब की खाली बोतलें फेंकी गई हैं. कई दिनों से मोटरसाइकिल सवार संदिग्ध लोग घर के बाहर चक्कर लगा रहे हैं. उन्होंने घर के बाहर की फोटो भी खींची. ये आतंकी ग्रुप बहुत ही खतरनाक हैं. ये मेरे और मेरे परिवार के साथ कुछ भी कर सकते हैं. जज ने अपने पत्र में लिखा है कि क्या यह मेरा कसूर है कि मैंने चार खूंखार आतंकवादियों को फांसी की सज़ा दी. पत्र में जज नीलकंठ गंजू का उदाहरण भी दिया गया है. न्यायाधीश नीलकंठ गंजू ने 1984 में आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सज़ा सुनाई थी. उन्हें 2 अक्टूबर 1989 को आतंकवादियों ने सरेआम मार दिया था.

ये मिली हुई है सुरक्षा

जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत में जज नियुक्त होने के साथ ही जज अजय कुमार शर्मा को चार गार्ड और दो पीएसओ की सुरक्षा मिली हुई थी. वह उनके 31 जनवरी 2020 को रिटायर होने के बाद भी उनके साथ बनी हुई है. लेकिन अब उनको मिली हुई सुरक्षा व्यवस्था को हटाने अथवा कम करने की बात चल रही थी. इस पर जज ने डीजीपी को पत्र लिखा है.

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4 आतंकवादियों को सुनाई थी फांसी की सज़ा

जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में करीब 71 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 185 लोग घायल हो गए थे. बलास्ट के 11 साल बाद विशेष अदालत ने 4 आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी. 18 दिसम्बर 2019 को जज अजय कुमार शर्मा ने चारों आरोपियों मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान को बम ब्लास्ट का दोषी करार दिया था. वहीं मुजाहिद्दीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले आरोपी मोहम्मद शहबाज हुसैन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. 20 दिसम्बर 2019 को इन चारों आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.