‘युवाओं में जोश की कमी’ बोलकर फंस गए धोनी, सोशल मीडिया ने लगा दी क्लास

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अबू धाबी. चेन्नई सुपरकिंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी मैचों में उनकी टीम बदलाव करते हुए युवाओं को आजमाएगी, लेकिन किसी युवा खिलाड़ी में अभी जरूरी जोश नहीं दिखा है. धोनी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं. सुपरकिंग्स की टीम 10 मैचों में सिर्फ तीन जीत के साथ अंक तालिका में आखिरी स्थान पर चल रही है और उसकी प्लेऑफ में जगह बनाने की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं. टीम अपने अगले मुकाबले में 23 अक्टूबर को गत चैंपियन मुंबई इंडियंस से भिड़ेगी.

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ सात विकेट की हार के बाद जब फ्लेमिंग से पूछा गया कि समान टीम को खिलाने की टीम की नीति में बदलाव होगा तो उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि यह उचित है कि हम इसे बदल रहे हैं.” तीन बार के चैंपियन सुपरकिंग्स के मौजूदा सत्र में खराब प्रदर्शन ने टीम के रवैये पर सवालिया निशान लगाए हैं और धोनी ने इसका बचाव करते हुए कहा कि अब तक किसी युवा खिलाड़ी ने ऐसा कुछ नहीं किया है कि बदलाव के लिए बाध्य होना पड़े.

धोनी ने मैच के बाद कहा, ”आप बार-बार बदलाव नहीं करना चाहते. आप नहीं चाहते कि ड्रेसिंग रूम में असुरक्षा की भावना हावी हो. साथ ही युवा खिलाड़ियों में हमने वह चमक नहीं देखी कि बदलाव के लिए बाध्य होना पड़े.” उन्होंने कहा, ”लेकिन इन नतीजों के कारण बाकी टूर्नामेंट में युवाओं को मौका दिया जाएगा. शायद आने वाले मैचों में हम उन्हें मौका देंगे और वे बिना दबाव के खेल पाएंगे.”

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धोनी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनकी आलोचना कर रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा- जब थाला युवा थे, उन्होंने सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों को यह कहकर हटा दिया था कि वह अच्छे फील्डर नहीं हैं और टीम पर बोझ हैं. अब जब थाला सीनियर हो गए हैं तो उन्हें युवाओं में जोश नहीं दिखाई दे रहा है. यह हमेशा वही एज ग्रुप होता है, जिसका हिस्सा धोनी नहीं होते.”

एक अन्य यूजर ने कहा- युवाओं में जोश नहीं दिखता, सबसे अपमानजनक बात मैंने सुनी है. अगर पहले मैच में रन आउट होने के बाद किसी ने धोनी में स्पार्क नहीं देखा होता तो हम क्रिकेट में एक लीजेंड को नहीं पाते.

एक अन्य यूजर ने लिखा- धोनी से यह सुनना काफी निराशाजनक है. बिना मौका दिए आप कैसे कह सकते हैं कि स्पार्क नहीं है.

यह धोनी का अपमानजनक बयान है. उन्होंने युवाओं का स्पार्क देखने के लिए उन्हें मौका नहीं दिया है. जग्गी बहुत कोशिश कर रहे हैं. अपने डेब्यू मैच में उन्होंने 33 रन बनाए और इसके बाद उन्हें बिना किसी कारण के ड्रॉप कर दिया गया. पता नहीं है कि केदार जाधव ने क्या स्पार्क दिखाया है, उसने टीम में वापसी की है. हास्यास्पद.

बता दें कि धोनी ने मैच के बाद कहा, ”परिणाम हमेशा आपके अनुकूल नहीं होता है. हमें देखना होगा कि क्या प्रक्रिया गलत थी. परिणाम इस प्रक्रिया का नतीजा होता है. यही सच्चाई है कि अगर आप प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित रखते हो तो परिणाम को लेकर बेवजह का दबाव टीम पर नहीं पड़ता है. हम इससे निबटने का प्रयास कर रहे हैं.”