डॉ हर्ष वर्धन ने वैज्ञानिकों को इण्डिया@75 के लिए नए विचार प्रस्तुत करने का आवाह्न किया

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नई दिल्ली: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग को विगत वर्षों में उल्लेखनीय कार्य और अग्रणी भूमिका निभाने के लिए बधाई दी है और वैज्ञानिकों का आवाह्न किया है कि वे इण्डिया@75 के लिए नए विचार प्रस्तुत करने के काम में जुट जाएं।

उन्होंने कहा कि 2022 तक राष्ट्र की नई चुनौतियों से निपटना होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यू इण्डिया की सोच को साकार करना होगा।विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रतिरक्षा संस्थान-एनआईआई के सभागार में 34वां स्थापना दिवस मनाया।
इस अवसर पर डॉ हर्ष वर्धन ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने सम्बोधन में विभाग के पूर्व सचिव एम.के.भान के उल्लेखनीय योगदान की प्रशंसा की और हाल ही में उनके निधन होने पर उनका स्मरण किया।
डॉ हर्ष वर्धन ने प्रोफेसर भान की स्मृति में एम के भान, युवा अनुसंधान पुरस्कार शुरू करने की घोषणा भी की । उन्होंने कहा कि इससे युवा अनुसंधान कर्ताओं को संबंधित चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में परिणामजनक कार्य करने का अवसर मिलेगा।

डॉ हर्ष वर्धन ने विभाग के 100 दिन के कार्यक्रम के अंतर्गत तीन राष्ट्रीय स्तर की नई पहल शुरू करने के प्रयासों की भरपूर प्रशंसा की। ये प्रयास हैं- 1. जीनोम भारत की शुरूआत, 2. सभी आकांक्षी जिलों में किसान बायोटेक केंद्र और 3. कचरे से बहुमूल्य प्रौद्योगिकियों का विकास।

डॉ हर्ष वर्धन ने इस अवसर पर 34 वैज्ञानिकों को अवार्ड से सम्मानित किया। विभाग ने अपनी स्थापना के वर्ष से वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए कई पुरस्कार शुरू किए थे। ये पुरस्कार अनुसंधान संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संगठनों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के विभिन्न स्तरों के लिए हैं। विभाग के विभिन्न पुरस्कारों को अब डीबीटी ब्राइट अवार्ड के रूप में जाना जाता है। बीआरआईटी यानि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान नवाचार और प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता अवार्ड। विभाग ने इन पुरस्कारों की शुरूआत देश के उन जाने माने वैज्ञानिकों की स्मृति में की है जिन्होंने भारतीय विज्ञान के विकास में अत्यंत योगदान दिया और विश्वभर में वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा बने रहे।

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जाने माने वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ डी बालासुब्रमण्यन, एमरिटस निदेशक, एल बी प्रसाद नेत्र संस्थान, हैदराबाद ने डीबीटी स्थापाना दिवस व्याख्यान दिया।

केंद्रीय मंत्री ने विभाग द्वारा प्रकाशित एक पुस्तिका ‘’बायोटक्नोलॉजी-कन्ट्रीब्युटिंग टू ग्रोइंग बायोइकोनॉमी’’ का भी लोकार्पण किया।

भारत में विगत तीन दशकों से जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की शुरूआत और विकास हुआ है और विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से स्वास्थ्य, कृषि आदि में जैव प्रौद्योगिकी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार और निजी क्षेत्र से जैव प्रौद्योगिकी को मिले सहयोग से वार्षिक वृद्धि दर ने लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। भारत विश्व में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शीर्ष 12 स्थानों में शामिल है।

जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण 2025 तक जैव प्रौद्योगिकी का 150 अरब अमरीकी डॉलर का महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वृद्धि की क्षमता के मद्देनजर जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पशुधन आदि वैश्विक प्रमुख चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारा मुख्य केंद्र बिंदु नवाचार अनुसंधान और विकास है। इसलिए विभाग का स्थापना दिवस निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की नीति और तौर तरीकों पर चर्चा करने का सही अवसर है। इसके लिए हमें प्रतिभा को प्रेरित और पोषित करना होगा और उनकी उत्कृष्टता के लिए उन्हें सम्मानित करना होगा ताकि वे राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटे रहें।