पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना से कार्य करे – राज्यपाल

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जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द देश के अन्य क्षेत्रीय केन्द्रों के साथ सामन्जस्य के साथ ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’’ की भावना से कार्य करके गांव-गांव की लोककला, संस्कृति, एवं परम्परा की खोज कर उनका संरक्षण-संवर्धन करे। इसी भावना से सांस्कृतिक समृद्ध भारत का निर्माण होगा।

राज्यपाल मिश्र मंगलवार को मुम्बई के राजकीय सहयाद्री अतिथि गृह के सभागार में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की ओर से सभी चारों सदस्य प्रान्तों एवं दो केन्द्र शासित प्रदेशों की गवर्निंग बाडी तथा एक्जीक्यूटिव बोर्ड की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र जागरूकता अपनाते हुए अपने कार्यक्रमो से देश के ग्रामीण युवाओ को अधिकाधिक जोड़े एवं उनमे छुपी कला की प्रतिभाओं को संवारे।

राज्यपाल मिश्र ने उदयपुर केन्द्र को सलाह दी कि वे सदस्य राज्याें तथा केन्द शासित प्रदेशों के साथ परस्पर लाभकारी योजनाए भी बनाए। उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए बैठक में आए गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा राज्यों तथा दमण व दीव तथा दादरा एवं नागर हवेली केन्द शासित प्रदेशों के सदस्यों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र के पर्यटन विभाग के साथ ‘‘मैमोरेण्डम ऑफ अण्डरटेकिंग’’ कर कार्यक्रमो को विस्तार दे। राज्यपाल ने आदिवासी एवं वंचित क्षेत्रो में नई प्रतिभाओ की खोज के लिए सांस्कृतिक केन्द्र को प्रत्येक वर्ग के लिए कार्य करने को कहा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख जैसे केन्द्र शासित प्रदेशों से अधिकाधिक परस्पर सांस्कृतिक आदना-प्रदान करने की सलाह दी।

बैठक में गोवा के कला एवं सांस्कृतिक मंत्री गोविन्द गौडे, राजस्थान की प्रमुख शासन सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग श्रेया गुहा, राज्यपाल के सचिव सुबीर कुमार, वरिष्ठ विशेषाधिकारी गोविन्दराम जायसवाल, महाराष्ट्र के शासन सचिव कला एवं संस्कृति संजय मुखर्जी, केन्द्रीय ललित कला अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पचारे ने अपने सुझाव दिए। बैठक में भारत सरकार के कला एवं संस्कृति मन्त्रालय की संयुक्त सचिव अमिता प्रसाद सरभाई तथा उदयपुर केन्द्र के निदेशक सुधांशु सिंह ने सांस्कृतिक केन्द्र के विकास एवं कार्यक्रमों के विस्तार पर सदस्यो से चर्चा की तथा सदस्यों की शंकाओ का समाधान किया ।

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इस अवसर पर उदयपुर केन्द्र द्वारा 80 परम्परागत पुरातन वाद्यो के प्रलेखन, लोक कथाओ के फिल्मांकन के कार्य तथा आयोजित कार्यशालाओ को आडियो विजुअल के माध्यम से प्रदर्शित भी किया। बैठक में सांस्कुतिक केन्द्र के उद्देश्य, कार्पस फण्ड, बजट, निर्माण कार्यो, कार्यक्रमो एवं भावी योजनाओ पर विस्तार से चर्चा भी हुई। सांस्कृतिक केन्द्र के लोकोत्सव, लोकतरंग फेस्टिवल, वसन्तोत्सव, यात्रा पश्चिमालय, परम्परागत महोत्सवो, नार्थ-ईस्ट फेस्टिवल, डा. कोमल कोठारी स्मृति लोक कला पुरस्कार, थिएटर पुर्नरूथान, गुरू-शिष्य परम्परा युवा प्रतिभा समारोह, उतराधिकार, शिल्पग्राम में शिल्प दर्शन, धारोहर, हवेली म्यूजियम, प्रलेखनीकरण व प्रकाशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।