गरीब कल्याण रोजगार अभियान: लॉकडाउन में वापस लौटे 8 लाख मजदूरों को रोजगार देगा रेलवे

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जयपुर. रेल मंत्रालय (Railway) ने लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों में पहुंचे मजदूरों के लिए खुशखबरी लेकर आया है. केन्द्र सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान (Garib Kalyan Rojgar Abhiyan) की शुरूआत की है. इसमे रेल मंत्रालय के तहत 8 लाख से ज्यादा मजदूरों को काम मिल सकेगा. रेलवे ने इस बाबत बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को भी पत्र लिखा है क्योंकि इन स्टेट में सबसे ज्यादा मजदूर लौट कर वापस आए हैं. गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत रेलवे ने 1800 करोड़ के प्रोजेक्ट में 8 लाख से ज्यादा मजदूरों को काम देने की योजना बनाई है. ये काम अगले 125 दिनों तक चलेंगे जिसकी तारीख 31 अक्टबूर 2020 तक तय की गई है. ये शुरूआती प्रोजेक्ट है, इसके बाद भी ट्रेक के नवीनीकरण और दूसरे कामों से ये लोग नए प्रोजेक्ट के तहत जुड़े रह सकते हैं.

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए रेल मंत्रालय ने 6 राज्यों के 116 जिलों में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए हैं. रेलवे में इस समय 160 ऐसे निर्माण कार्य है जिन में इन मजदूरों को रोजगार दिया जा सकता है. फिलहाल, इस बाबत रेलवे ने राज्य सरकारों को पत्र लिखा है. राज्य सरकार ऐसे मजदूरों के नाम रेलवे को दे सकती है जो इन प्रोजेक्ट में काम करने के लिए तैयार है. हालांकि, रेलवे में ज्यादातर काम तकनीकी होते है और उसके लिए न्यूनतम शिक्षित होने की भी ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में कितने मजदूर इस योजना का हिस्सा बन पाते ये फिलहाल तय होना बाकी है. लेबर वर्क के अलावा पटरियां बिछाने से लेकर सिग्नल लगाने तक में न्यूनतम शिक्षित होना अनिवार्य है. इसके अलावा ये योजना मनरेगा की तर्ज पर होगी और ठेकेदार के तहत ही इन्हें काम करना होगा. जितने दिन मजदूर काम पर जाएगा उतने दिन की ही मजदूरी का प्रावधान रखा गया है.

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एक नजर जिले में लौटे मजदूरों पर

पाली 140023

उदयपुर 127493
जालोर 105659
नागोर 86990
सिरोही 76408
डूंगरपुर 63387
सीकर 48591
राजसंमद 46345
बाड़मेर 46329
चितौड़गढ़ 45600
अलवर 45377
करौली 42040
बीकानेर 41388
जोधपुर 39820
भीलवाड़ा 38455
भरतपुर 38355
बांसवाड़ा 32929
अजमेर 32564
हनुमानगढ़ 30217
चूरू 27628
झूंझनूं 27497
जयपुर 26047

 

राज्य सरकार के जवाब का इंतजार

राजस्थान में कुल 4 लाख 22 हजार 317 मजदूर लौट कर वापस आए हैं. ये आधिकारिक आंकड़े हैं, लिहाजा मजदूरों की संख्या कुछ ज्यादा भी हो सकती है जो बिना रजिस्ट्रेशन के अपने गृहराज्य में पहुंचे हैं. फिलहाल, रेलवे को राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है. लौटे हुए मजदूरों को अगर इस अभियान के तहत रोजगार मिलता है वो बिना किसी दूसरे राज्य में जाए अपने ही राज्य में अपनी आजीविका आसानी से चला सकते है.