किसानों के खिलाफ ऐसा क्या किया गहलोत सरकार ने कि बिफर पड़े व्यापारी, जानें पूरा माजरा

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राजस्थान सरकार कृषि जिंसों (व्‍यापारियों द्वारा कृषि उत्‍पाद बेचे जाने पर) पर अब 2 फीसदी कृषक कल्याण शुल्क (Farmer welfare fee) वसूलेगी. कृषि विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के मुताबिक, मंडी क्षेत्र में खरीद और बिक्री की गई कृषि उपज पर यह शुल्क लगाया जाएगा. मंडी समितियों द्वारा वसूले जाने वाले इस शुल्क की दर प्रति 100 रुपये पर 2 रुपये यानि 2 प्रतिशत रहेगी. एमएसपी खरीद पर यह शुल्क नहीं वसूला जाएगा. इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ ने कृषक कल्याण शुल्क हटाने की मांग की है.

किसान नेता गुरुचरण सिंह मोड ने इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा है कि कोरोना के बहाने सरकार ने चौतरफा लूट शुरू कर दी है. कृषि जिंसों पर 2 फीसदी शुल्क लगाने से महंगाई बढ़ेगी जिसका खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ेगा. इसके साथ ही किसानों और व्यापारियों को भी इसका नुकसान होगा. जयपुर दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल गोयल ने कहा है कि हम सरकार के फैसले का विरोध करते हैं, क्योंकि इससे कीमतें बढ़ेंगी. उन्होंने कहा कि आज एसोसिएशन की मीटिंग कर विरोध का स्वरूप तय किया जाएगा. उधर, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि यह विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है, लिहाजा वो इसमें कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है.

किसान कल्याण पर खर्च होगा पैसा
कृषि विपणन बोर्ड के डायरेक्टर ताराचंद मीणा ने किसानों और व्यापारियों द्वारा किए जा रहे विरोध को गलत बताया है. मीणा के मुताबिक वसूली जाने वाली यह राशि किसानों के कल्याण पर खर्च होगी. पिछले साल राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ की राशि से कृषक कल्याण कोष का गठन किया था. यह राशि उसमें जमा होगी. किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य दिलाने समेत अन्य किसान हित के कार्यों पर यह राशि खर्च की जाएगी.

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अब 3.60 प्रतिशत टैक्स

प्रदेश में अभी कृषि जिंसों पर 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है. अब 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लगने के बाद यह टैक्स बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो जाएगा. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी.