जिस देश का तानाशाह चेन स्मोकर है, वहां औरतों का स्मोकिंग करना क्यों है पाप?

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‘अगर आप महिलाओं को सिगरेट का कार्टन गिफ्ट करेंगे, तो यह उनके पति या पिता के लिए तोहफा होगा.’ नॉर्थ कोरिया में यह एक जीवंत कहावत है कि महिलाएं सिगरेट नहीं पीतीं. उत्तर कोरिया में सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने पर बैन लगाने वाले इस कानून में कहा गया है कि ‘एक बेहतर सभ्य और सेहतमंद’ माहौल बनाना चाहिए. अब समस्या यह है कि इस कानून के सबसे बड़े रखवाले यानी उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन पर आरोप हैं कि वो खुद चेन स्मोकर हैं और सार्वजनिक तौर पर सिगरेट पीते हुए अक्सर देखे गए हैं. ऐसे में इस कानून को किस तरह नैतिक करार दिया जाएगा?

बहरहाल, इस कानून के बाद एक दिलचस्प पहलू यह है कि दुनिया में सबसे ज़्यादा स्मोकिंग रेट वाले देशों में शुमार उत्तर कोरिया में महिलाओं का सिगरेट पीना एक अभिशाप जैसा समझा जाता है. जी हां, एक बार को महिला शराब पी ले तो भी ठीक लेकिन स्मोकिंग करने वाली महिला को समाज में बड़ी बेइज़्ज़ती सहन करना पड़ती है. इन तमाम विरोधाभासों को विस्तार से जानिए.

क्या है स्मोकिंग बैन करने वाला कानून?

चूंकि कोविड 19 के दौर में यह डेटा साफ तौर पर सामने आया कि स्मोकिंग करने वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं और रोग गंभीर हो सकता है. इसके साथ ही, पहले से भी काफी अरसे से उत्तर कोरिया में तंबाकू निषेध के लिए मुहिम चल रही थी. इस महीने की शुरूआत में तंबाकू निषेध कानून लागू किया गया, जिसके मुताबिक तंबाकू उत्पादों की बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करते हुए सार्वजनिक स्थानों की एक सूची ज़ाहिर करते हुए स्मोकिंग को प्रतिबंधित किया गया.

चेन स्मोकर है किम!

इस कानून के लागू होने के साथ ही उत्तर कोरियाई मीडिया में किम जोंग उन की वो तस्वीरें छापी गईं, जिनमें वह सिगरेट थामे या पीते हुए साफ नज़र आते हैं. बच्चों के कैंप से लेकर मिसाइल टेस्ट तक की इवेंट्स के दौरान किम ​स्मोकिंग करते देखे जा चुके. खबरों में यह भी कहा गया कि किम की पत्नी से लेकर उनके करीबी सहयोगी तक मान चुके हैं कि किम चेन स्मोकर हैं और सिगरेट छुड़ाने की तमाम मिन्नतें नाकाम हो चुकी हैं.

उत्तर कोरिया में महिलाएं और स्मोकिंग

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ​एक रिपोर्ट की मानें तो उत्तर कोरिया में 15 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों में से 46% से ज़्यादा स्मोकिंग करते हैं. लेकिन महिलाएं सिर्फ 2.5% स्मोकर हैं, वो भी बड़ी उम्र की ज़्यादा हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में ज़्यादातर. WHO की रिपोर्ट में तो यह भी दर्ज है कि नॉर्थ कोरिया में महिलाएं स्मोकिंग नहीं करतीं! हालांकि तंबाकू के खिलाफ मुहिम चलाने वाली संस्थाएं मानती हैं कि 46% नहीं, स्मोकर आबादी इससे कहीं ज़्यादा है.

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माना गया है कि देश में स्मोकिंग करने वाली महिलाओं को ‘अच्छा’ नहीं समझा जाता. एनजीओ और विशेषज्ञों के मुताबिक एक रिपोर्ट कहती है :

 

दक्षिण कोरिया की तुलना में उत्तर कोरिया में खासकर छोटी उम्र की महिलाओं के लिए स्मोकिंग करना सांस्कृतिक और सामाजिक तौर पर एक पाप जैसा माना जाता है. तंबाकू का ज़्यादा इस्तेमाल करना या इसकी लत होना, नॉर्थ कोरिया में मर्दों या मर्दानगी के लिए मुफीद माना जाता है.

 

आंकड़ों की ज़ुबानी समझा जाए तो नॉर्थ कोरिया में हर साल 71,300 लोग तंबाकू ​जनित बीमारियों से मरते हैं. करीब ढाई करोड़ की ही आबादी वाले ऑस्ट्रेलिया में इस तरह की मौतें हर साल 25,000 हैं यानी नॉर्थ कोरिया में तंबाकू का प्रकोप समझा जा सकता है. 2010 में स्मोकिंग को नॉर्थ कोरिया में सबसे जानलेवा फैक्टर माना गया था. स्मोकिंग से 34% पुरुषों और 22% महिलाओं की मौतों का कारण माना गया था.

नॉर्थ कोरिया में औसतन एक स्मोकर हर साल 609 सिगरेट पी जाता है. द टॉबैको एटलस के एक डेटा की मानें तो 15 साल से कम उम्र के लड़कों में 16% के करीब स्मोकिंग करते हैं, लेकिन लड़कियां 1% भी नहीं. एक रिपोर्ट की मानें तो लड़कियां या महिलाएं उत्तर कोरिया में अगर भारी मात्रा में शराब पी लें, तो भी उन्हें उतना अपमान नहीं सहना पड़ता, जितना सिगरेट पीने पर.

45 या 50 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाएं स्मोकिंग करती भी हैं, तो एक हद तक इसे स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन यह स्थिति भी ग्रामीण क्षेत्रों में है, शहरी क्षेत्रों के समाज में इन महिलाओं के लिए भी यह माकूल स्थिति नहीं है. दूसरी तरफ, पुरुषों के बारे में कहा जाता है कि अगर वो स्मोकिंग न करें, तो एक तरह से वर्कप्लेस पर वो सामाजिक तौर पर अलग थलग भी पड़ जाते हैं. एक लेख के मुताबिक उत्तर कोरिया में महिलाओं को देश की तरह शुद्ध, पवित्र और बेदाग माना जाता है इसलिए उनसे धूम्रपान की अपेक्षा नहीं की जाती.