Jaipur: 69 वर्ष के हुए राजनीति के जादूगर सीएम अशोक गहलोत, यूं चढ़ी सफलता की सीढ़ियां

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जयपुर : राजनीति के जादूगर माने वाले राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) का आज जन्मदिन है. सीएम अशोक गहलोत रविवार को 69 साल के हो गए. तीसरी बार प्रदेश की कमान संभाल रहे गहलोत न केवल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, बल्कि उनकी प्रशासनिक दक्षता भी किसी से छिपी हुई नहीं है. राजनीति के गलियारों में अशोक गहलोत की ‘जादूगरी’ के कई किस्‍से चलते हैं. राज्य और केन्द्रीय राजनीति में बेहतर तालमेल और सशक्त संपर्कों के कारण गहलोत हमेशा आगे बढ़े हैं. गहलोत पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के बाद दूसरे ऐसे नेता माने हैं जो विपक्ष के नेताओें का बेहद सम्मान करते हैं.

एनएसयूआई से शुरू किया अपना राजनीतिक करियर
छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखने वाले गहलोत ने अपना राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के साथ अपना राजनीतिक कॅरियर शुरू करने वाले गहलोत वर्ष 1973 से 1979 की अवधि के बीच राजस्‍थान NSUI के अध्‍यक्ष रहे. उसके बाद 1979 से 1982 के बीच जोधपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की कमान संभाली. वर्ष 1982 में अशोक गहलोत कांग्रेस के प्रदेश महासचिव बने.

उनकी जादूगिरी हर किसी को नजर नहीं आती है

3 मई 1951 में सूर्यनगरी जोधपुर की तपती गर्मियों में स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर जन्मे अशोक गहलोत के पिता जादूगर थे. उनके जन्म के साथ ही यह तो तय हो गया कि बेटा भी जादूगर बनेगा, लेकिन राजनीति के बनेगा यह शायद ही उस वक्त किसी ने सोचा होगा. एक बार राजनीति में प्रवेश करने के बाद गहलोत का जादू ऐसा चला कि बड़े-बड़े दिग्गज देखते रहे गए और वे आज तक भी उनके जादू को समझ नहीं पाए. गांधीवादी अशोक गहलोत ऐसे जादूगर हैं कि उनकी जादूगिरी हर किसी को नजर नहीं आती है, लेकिन उसका प्रभाव बड़ा गहरा होता है.

तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं गहलोत
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा के अलावा उनके पुत्र राजीव गांधी और बाद में नरसिम्‍हा राव कैबिनेट में मंत्री रह चुके गहलोत की राजनीति पर पकड़ इतनी मजबूत है कि बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं से उनके बेहद दोस्ताना संबंध रहे हैं और हैं. यह उनकी राजनीतिक समझ और पकड़ का ही कमाल है कि वर्तमान में देश में कांग्रेस पार्टी केवल राजस्थान में ही अपनी सरकार को सबसे सुरक्षित मानकर चलती है. गहलोत वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े संकटमोचक माने जाते हैं. यही कारण है कि पिछले दिनों देश में जहां-जहां भी कांग्रेस पार्टी की राज्य सरकारों पर संकट आया तो गहलोत ही पार्टी के संकटमोचक बने.

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सीएम अशोक गहलोत का राजनीतिक सफर
– तीसरी बार राजस्थान की बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाल रहे गहलोत 3 बार कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं
– 1982 से लेकर 1998 तक पांच बार जोधपुर से सासंद रहे हैं अशोक गहलोत
– अशोक गहलोत को देश के 3 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव है.
– तीन बार केंद्रीय मंत्री : 2 सितम्‍बर 1982 से 7 फरवरी 1984 पर्यटन और नागरिक उड्डयन उपमंत्री रहे. 7 फरवरी 1984 से 31 अक्‍टूबर 1984 और 12 नवम्‍बर, 1984 से 31 दिसम्‍बर 1984 तक खेल उपमंत्री, 31 दिसम्‍बर 1984 से 26 सितम्‍बर 1985 तक केन्‍द्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्‍य मंत्री, 21 जून 1991 से 18 जनवरी 1993 तक कपड़ा राज्य मंत्री रहे.
– अशोक गहलोत जून 1989 से नवम्‍बर 1989 की अवधि के बीच राजस्‍थान सरकार में गृह और पीएचईडी मंत्री भी रह चुके हैं.
– गहलोत के पास पार्टी के केंद्रीय संगठन में भी काम करने का लंबा अुनभव है. गहलोत 17 जुलाई 2004 से 18 फरवरी 2009 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रह चुके हैं. उसके बाद संगठन महासचिव का दायित्व भी संभाल चुके हैं.

कोरोना संकट के कारण अपना जन्मदिन नहीं मना रहे हैं गहलोत
कोरोना संकट काल के चलते सीएम गहलोत अपना जन्मदिन नहीं मना रहे हैं. लेकिन सोशल मीडिया में उनको बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है. अपने जन्मदिन के अवसर पर सीएम ने कहा कि राजस्थान की जनता ने उनको भरपूर स्नेह और आशीर्वाद दिया है. कोरोना संकट में सरकार जनता के साथ खड़ी है. लोग धैर्य से लॉकडाउन की पालना करें. पीड़ित मानवता की सेवा के लिए लोगों ने आगे बढ़कर जो सहयोग किया है इसके लिए प्रदेश की जनता साधुवाद की पात्र है.