जयपुर में महिला ने दिया 2 सिर और एक धड़ वाले बच्चे को जन्म

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जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) में शुक्रवार को दो सिर, दो हाथ और दो पैरों वाला बच्चा (Conjoined Twins) पैदा हुआ. दौसा जिले से प्रसूता बबीता को रेफर किया गया था, जिसे बाद में राजधानी के महिला चिकित्सालय (सांगानेरी गेट) में भर्ती कराया गया. यहां डॉ. गरिमा व्यास और उनके सहयोगी डॉक्टरों ने इमरजेंसी यूनिट-2 में बबीता का प्रसव कराया. डॉ. व्यास के अनुसार, महिला को शोल्डर डिस्टोसिया (Shoulder Dystocia) के साथ रेफर किया गया था, जिसमें बच्चे की मौत हो चुकी थी. यहां सामान्य प्रसव कराया गया. उन्होंने यह भी बताया कि दो सिर वाले बच्चे (Conjoined Twins) की विकृति के बारे में प्रसव से पहले बाहर कराई गई सोनोग्राफी रिपोट‌र्स में नहीं बताई गई थी. प्रसव के बाद पता चला कि मृत बच्चे के 2 सिर, 2 पैर और 2 हाथ हैं.

उल्लेखनीय है कि इस तरह के बच्चों का जन्म दुर्लभ (Rare Conjoined Twins) माना जाता है. अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स (Amercian Journal of Medical Genetics) की मानें तो ऐसा बच्चों का जन्म लाखों में एक होता है. पिडियाट्रिक सर्जरी जर्नल के एक शोध पत्र के अनुसार, केवल 11 प्रतिशत ही ऐसे होते हैं, जिनका धड़ तो 1 होता है लेकिन सिर 2 होते हैं. इस तरह के बच्चों में दो से लेकर चार हाथ तक पाए जाते हैं.

ऐसा क्यों होता है, धड़ एक तो सिर 2 क्यों?
चिकित्सकीय भाषा में एक धड़ पर दो सिर वाले बच्चों को डिसेफल पैरापैगस कहा जाता है. इनमें छाती के नीचे का हिस्सा तो एक होता है लेकिन उसके ऊपर दो सिर बन जाते हैं. ऐसे मामलों में सर्वाइवल रेट 5 से 25 प्रतिशत होती है. सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय में भी पैदा हुए बच्चे के मामले में भी ऐसा ही हुआ. दरअसल, गर्भ धारण के कुछ सप्ताह पश्चात जब जुड़वा बच्चे बनने की प्रक्रिया बीच में ही रुक जाए, तभी इस तरह के बच्चे पैदा होते हैं. फर्टिलाइज्ड एग प्रेगनेंसी के कुछ सप्ताह बाद जुड़वा बच्चे बनाने के लिए विभाजन शुरू करता है. लेकिन पूरी होने से पहले ही जब यह प्रक्रिया बीच में रुक जाए, तभी शरीर से जुड़े बच्चे पैदा होने के केस सामने आते हैं. ऐसा 50 हजार से 1 लाख मामलों में एक ही बार होता है.

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