जयपुर: जेडीए के विरोध में किसानों ने फिर शुरू किया जमीन समाधि सत्याग्रह, मुख्य सचेतक के भरोसे पर माने थे; 20 दिन बाद भी नहीं मिला जवाब

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जयपुर: नींदड़ में एक बार फिर किसान जेडीए के विरोध में जमीन समाधि ले रहे हैं। सेकंड फेज की वार्ता फेल हो चुकी है। समाधान की कोशिशों के 50 दिन पूरे हो चुके, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। जेडीए और किसानों के बीच समाधान को आगे आए मुख्य सचेतक महेश जोशी समाधान निकालने में सफल नहीं हो पाए, जिनके दखल पर एक कमेटी बनाई गई थी।

बीजेपी सरकार के दौरान सुर्खियों में रहे थे

पिछले दिनों जब जेडीए और किसानों के बीच बातचीत का पुल टूट गया तो एक बार फिर प्रभावित लोग जोशी के पास पहुंचे। लगातार उनसे संपर्क भी साधा गया। लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार मौके पर एक बार फिर वही दृश्य साकार हो गए हैं, जो बीजेपी सरकार के दौरान सुर्खियों में रहे। किसानों ने शनिवार से जमीन समाधि सत्याग्रह शुरू कर दिया।

आरोप :क्या जोशी आंदोलन कमजोर करने गए?
किसानों ने विरोध जताया है कि महेश जोशी ने समिति को सरकार व सीएम से बातचीत कर वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन काफी समय के बाद भी कार्रवाई नहीं की। जो यह दिखाता है कि राज्य सरकार नींदड़ के किसानों को लेकर गंभीर नहीं है। और किसानों को राज्य सरकार की ओर से दिया वार्ता का प्रस्ताव केवल आंदोलन कमजोर करने की साजिश थी। अब न्याय नहीं मिलने तक जमीन समाधि सत्याग्रह जारी रहेगा।

महेश जोशी का हमें कोई जवाब नहीं आया है
जेडीए को प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन वो किसी विकल्प पर तैयार नहीं। हम नए कानून से अवाप्ति चाहते हैं। जेडीए पुराने कानून से जमीन चाहता है तो रोजगार, स्ट्रक्चर, लीज की मांगों पर सुनवाई करे। जमीन जाने के बाद किसान करेगा क्या? ये परेशानियां अफसरों की समझ से परे है। हमने महेश जोशी से संपर्क किया। 20 दिन में जवाब नहीं आया। मजबूरन आंदोलन को बैठ गए हैं।  -नगेंद्र सिंह, नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति
संघर्ष समिति ने मांग बादल दी

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संबंधित उपायुक्त मनीष फौजदार ने बताया कि संघर्ष समिति ने मांग बदल ली और पीछे हट गए। कानून सम्मत मुआवजे की बात मानेंगे। मसला नींदड़ के जमीन मुआवजे या जयपुर का नहीं, बल्कि देशभर में समान रूप से बने कानून का है। खुद के अलावा दूसरे संबंधित लोगों से बातचीत में भी उनको परेशानी है। हम शनिवार को दुबारा मौके पर जाकर आए हैं। उनका वही रवैया दिखाई पड़ रहा है। फिर से बातचीत का न्यौता दिया है।