खत्म हुई जयपुर के शराबियों की परेशानी, आबकारी विभाग खुद पहुंचाएगा दुकानों के पते पर

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जयपुर: शराब के शौकीनों को दुकान की लोकेशन अब गूगल पर मिलेगी. साथ ही आबकारी विभाग के अधिकारी शराब की दुकान की गलत रिपोर्ट देकर लोकेशन आवंटित नहीं कर सकेंगे.

आबकारी विभाग में लॉटरी प्रक्रिया के सरलीकरण के साथ-साथ कई ऐसे नवाचार भी अमल में लाए जा रहे हैं, जिससे एक तरफ लाइसेंसधारकों को फायदा मिलेगा, दूसरी तरफ शराब के शौकीनों को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस बार लॉटरी के बाद आवंटित सभी दुकानें जियो टैंगिंग पर मौजूद रहेंगी, जिससे एक तो दुकान की लोकेशन नजर आएगी और दूसरी तरफ शौकीन भी यहां तक आसानी से पहुंच सकेंगे.

प्रदेश की लाइसेंसी शराब की दुकानों की जियो टैगिंग करवायी जाएगी. शराब के लाइसेंसियों और विक्रेताओं की नाजायज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के मकसद से आबकारी विभाग ने यह निर्णय लिया है. सरकारी कामों में पारदर्शिता लाने के लिए जिओ टैगिंग पर जोर दिया जा रहा है. अब आबकारी विभाग का नाम भी इसमें जुड़ गया है.

जिला आबकारी अधिकारी के मुताबिक, पहले शराब दुकान आवंटन के बाद लोकेशन में बड़ा खेल चलता आ रहा था. शराब दुकानदार के साथ सांठ-गाठ कर लोकेशन की रिपोर्ट गलत दे देते थे, जिसके कारण मंदिरों और शिक्षा मंदिरों से मधुशाला की छाया दूर रखने के लिए कई नियम और कड़े कानून हैं. बावजूद आबकारी विभाग ने न तो धार्मिक स्थल की परवाह है और न ही स्कूल-अस्पतालों की. जहां चाहा, वहां मधुशाला खोल डाली हैं. इससे राज्य के अधिकांश जिलों में 62 स्थानों पर ये शराब की दुकानें गलत रिपोर्ट के कारण खुल गईं, जिसका खामियाजा धार्मिक स्थलों पर आने वाले धर्मावलंबियों और स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ा लेकिन अब जियो टैगिंग के बाद इस तरह का खेल नहीं चलेगा.

क्या होंगे जियो टैगिंग के फायदे
जियो टैगिंग के जरिये आसपास की लोकेशन को देखा जा सकेगा. साथ ही ये भी देखा जाएगा कि दुकान के पास 200 मीटर की दूरी पर कोई स्कूल या धार्मिक स्थल तो नहीं है. वहीं, अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण किया जा सकेगा. दूसरी ओर फील्ड स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त निगरानी रखी जा सकेगी. दुकानों का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों द्वारा किये जा रहे निरीक्षण के कार्यों का सत्यापन भी किया जा सकेगा. इसके अलावा जियो टैगिंग हो जाने से मैप रीडिंग के माध्यम से आकस्मिक निरीक्षण के लिए विभाग के आला अफसर दुकानों तक आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे अवैध कार्यों में लिप्त लाइसेंसधारकों और विक्रेताओं की कार्य प्रणाली के विरुद्ध मौके पर ही कार्रवाई करने में सहूलियत होगी.

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समूहधारकों को भी बड़ी सहूलियत दी गई 
उधर इस बार नई आबकारी नीति में समूहधारकों को भी बड़ी सहूलियत दी गई है. अक्सर शराब की खपत नहीं होने पर दुकानदार एक दुकान से दूसरी दुकान को शराब की सप्लाई करते थे, जो नियमानुसार गलत था. अब विभागीय स्तर पर नीति में बड़ा बदलाव करते हुए इसमें आवश्यक संशोधन किया है, जिसके तहत शराब की दुकानों में बचा हुआ माल विभाग द्वारा परमिट जारी करने के साथ दुकानदार विधिवत एक दुकान से दूसरी दुकान को स्थानांतरित कर सकेगा. जिला आबकारी अधिकारी सुनील भाटी ने बताया कि आबकारी नीति के तहत प्रत्येक देशी शराब की दुकान पर राजस्थान मेड लीकर (आएमएल) 30 प्रतिशत रखना अनिवार्य रहेगा. इसका निर्माण गंगानगर शुगर मिल (जीएसएम) करेगा. यह बेहतर गुणवत्ता वाला शराब होगी.

न्यूट्रल एल्कोहल से निर्मित बेहतर शराब होगी
मूल देशी और कंपोजिट दुकानों पर जीएसएम निर्मित रम, व्हीस्की और वोडका उपलब्ध रहेगी, जो एक्सट्रा न्यूट्रल एल्कोहल से निर्मित बेहतर शराब होगी. शराब की दुकानों पर अक्सर एमआरपी को लेकर विवाद रहता था, अब नई नीति के तहत दुकानों पर राशि को राउंड अप किया जाएगा, जिससे दुकानदार और खरीददार को राहत मिलेगी. दूसरी तरफ अक्सर एमआरपी से अधिक राशि वसूलने पर विभागीय स्तर पर इस साल से कठोर कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी और पारदर्शिता के लिए इस साल से बिल जारी करने का प्रावधान भी किया जा रहा है.

बहरहाल, नई पॉलिसी के तहत शराब समूहों को पुलिस की गतिविधियों से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है. समूह धारकों की इस बारे में मांग थी कि पुलिस के हस्तक्षेप से दुकानों को मुक्त किया जाए. अब नई पॉलिसी के तहत पुलिस का अनुचित हस्तक्षेप समाप्त होगा.