ज्यादातर राज्यों में पहले से हैं डिटेंशन सेंटर, इन कामों में किया जाता है इस्तेमाल

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नई दिल्ली : देश में इन दिनों नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) के साथ ही डिटेंशन सेंटर (Detention Center) को लेकर हंगामा मचा है. ज्यादातर राज्य डिटेंशन सेंटर नहीं बनाने की बात कर रहे हैं. वहींं, गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्यों में पहले से ही डिटेंशन सेंटर बने हुए हैं. गृह मंत्रालय की ओर से जुलाई 1998 में जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पंजाब में भी डिटेंशन सेंटर मौजूद हैं.

सुप्रीम कोर्ट ले चुका है संज्ञान, एनआरसी से लेनादेना नहीं
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इन डिटेंशन सेंटर्स में भारत में अवैध रूप से रहे रहे या फिर भारत में किए गए किसी अपराध की सजा काट रहे उन विदेशियों को रखा जाता है, जिनके दस्तावेजों की पुष्टि उनके देशों से हो गई है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, ये सभी सेंटर्स डिटेंशन सेंटर्स फॉरन एक्ट, 1946 व फॉरनर्स ऑर्डर 1948 के तहत बनाए गए हैं. इन डिटेंशन सेंटर्स के बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है. भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को तब तक इन डिटेंशन सेंटरों में रखा जाता है, जब तक उनको वापस उनके देश भेजने के लिए दस्तावेज तैयार नहीं हो जाते. हालांकि इन सेंटर्स का एनआरसी से कोई भी लेना देना नहीं है.

देश में कहां-कहां बने हैं डिटेंशन सेंटर

असम में पिछले कुछ समय से जेलों के कुछ हिस्सों को डिटेंशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. असम के गोलपारा, तेजपुर, कोकराझार और डिब्रूगढ़ में भी अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों को रखने के लिए डिटेंसन सेंटर्स बनाए गए हैं. इसी तरह दिल्ली के लामपुर और शजदाबाग में भी डिटेंशन सेंटर्स बने हैं. गुजरात और तमिलनाडु में भी डिटेंशन सेंटर हैं. इसी तरह पंजाब में अमृतसर की सेंट्रल जेल और राजस्थान की अलवर जेल में डिटेंशन सेंटर्स बने हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में सुधार गृह पहले से है.

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