करौली: बेटे के शव को गाँव पहुंचाने के लिए गुहार लगा रहे थे बुजुर्ग दम्पती, समाजसेवी ने निभाया मानव धर्म

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करौली के राजकीय सामान्य चिकित्सालय से मंगलवार को दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया। 35 बर्षीय युवक की चिकित्सालय में मृत्यु हो गयी, युवक के माँ बाप को एक ओर तो बेटे की मृत्यु का दुख वहीं दूसरी ओर शव को 50 किमी दूर घर तक ले जाने की चिंता। कोरोना महामारी के कारण साधन की व्यवस्था नही तो दूसरी तरफ ऐसे हालात में कोई भी मदद करने को तैयार नही यह घटना वास्तव में अकल्पनीय व मार्मिक है। दरअसल सपोटरा के पास एक ढ़ाणी में रहने बाले रामजी लाल बैरवा के 35 वर्षीय पुत्र विनोद बैरवा की मृत्यु करीब 10 बजे जिला चिकित्सालय में हो गयी। मृतक के बुजुर्ग माता पिता के अलावा कोई भी साथ नही होने से उनको मदद की आवश्यकता थी लेकिन कोरोना वायरस के चलते ऐसे में कोई मदद करने के लिए तैयार नही हुआ। जिसके बाद बुजुर्ग दम्पति ने समाजसेवी बबलू शुक्ला को फ़ोन किया तो शुक्ला ने शव को घर पहुंचाने के लिए उपखंड अधिकारी को एक अनुमति पत्र शुदा गाड़ी की व्यवस्था करने के लिए निवेदन किया। इसके बाद शुक्ला तुरन्त अस्पताल पहुंचे शुक्ला का कहना है कि वहां पहुंचकर देखा तो बहुत दुःखद दृश्य देखने को मिला। कोरोना आपदा के डर से शव को उठाकर गाड़ी ने रखवाने के लिए कोई तैयार नही हुआ तब शुक्ला ने गाड़ी के ड्राइवर के साथ गाड़ी में कार्टून बिछाकर उस शव को उसके माता पिता के साथ रवाना किया।

अस्पताल प्रशासन पर भी खड़े होते हैं सवाल:

बुजुर्ग दम्पति स्वयं शव को अस्पताल परिसर से स्ट्रेचर पर धकेल कर गाड़ी के पास ले गए व शव को गाड़ी में रखवाने के लिए भी कोई अस्पताल स्टाफ मौजूद नही था इस घटना में अस्पताल प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही स्पष्ट दिख रही है। आमतौर पर भी मरीजो को उनके परिजनों द्वारा स्ट्रेचर पर ले जाते हुए आसानी से देखा जा सकता है जबकि यह अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन इस कार्य के लिए लगा स्टाफ अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेता है तो मजबूरन परिजनों को ही स्ट्रेचर पर मरीज को धकेलकर ले जाना पड़ता है।

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