कौन हैं डॉ. विवेक मूर्ति और अरुण मजूमदार, जो बाइडन कैबिनेट में दिख सकते हैं

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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की कैबिनेट के बारे में क़यास हैं कि अमेरिका की तरह ही उनका मंत्रिमंडल भी काफी विविधता भरा होगा. सीनेट में 36 साल और उपराष्ट्रपति की कुर्सी पर 8 साल रहने के बाद अब बाइडन अपनी कैबिनेट चुनने में विशेषज्ञों की एक पूरी टीम सामने ला सकते हैं, जिसमें भारतवंशियों का खासा प्रतिनिधित्व हो सकता है. उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय मूल की कमला हैरिस के चुने जाने के बाद कम से कम दो भारतीय और बाइडन कैबिनेट का हिस्सा हो सकते हैं.

बाइडन की टीम प्रेसिडेंशियल ट्रांज़िशन पीरियड के दौरान कैबिनेट सदस्यों की सूची तैयार करने में जुटी हुई है. इस सूची में से ज़्यादातर चेहरे मंत्रिमंडल में नज़र आएंगे. इस सूची में दो नाम चर्चा में आ रहे हैं, जो भारतीय मूल के हैं और बाइडन के संभावित मंत्री हो सकते हैं. डॉ. विवेक मूर्ति और अरुण मजूमदार के नामों को लेकर मीडिया में चर्चा है.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय में सर्जन जनरल रह चुके डॉ. वि​वेक मूर्ति ने इस साल जो बाइडन को निजी तौर पर कोविड 19 से संघर्ष को लेकर खासे सलाह-मशवरे दिए. अब मूर्ति को बाइडन कैबिनेट में खासकर स्वास्थ्य मंत्रालय में बड़ी भूमिका मिलने के क़यास हैं. इसी साल 5 सितंबर को बाइडन हैरिस ट्रांज़िशन टीम की एडवाइज़री में भी ​मूर्ति सदस्य चुने गए थे.

तीन साल पहले मूर्ति कई टीवी शो और रेडियो वार्ताओं में शामिल होकर अमेरिका में लोगों के अकेलेपन के शिकार होने के विषय पर काफी चर्चा की थी. मूर्ति ने कहा था कि ‘अकेलेपन’ की समस्या अमेरिका में महामारी बन चुकी थी और यही अमेरिका के सामाजिक ढांचे में कई समस्याओं की जड़ भी है. इसी साल अप्रैल में एक किताब प्रकाशित हुई, जिसमें मूर्ति ने इस बारे में लिखा है कि लोग कैसे इस समस्या से निजात पा सकते हैं.

हार्वर्ड से पासआउट होने के बाद 1995 में मूर्ति ने एक गैर लाभकारी संगठन VISIONS वर्ल्डवाइड बनाया था. 8 साल तक इस संगठन के प्रमुख रहकर मूर्ति ने अमेरिका और भारत में एचआईवी को लेकर काफी काम किया था. इसके अलावा ग्रामीण भारत में महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में ट्रेनिंग देने का प्रोजेक्ट भी 1997 में मूर्ति ने किया था. वहीं, मूर्ति का ताल्लुक मूल रूप से कर्नाटक से है.

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डॉक्टर्स ऑफ अमेरिका 15,000 से ज़्यादा डॉक्टरों का समूह है, जिसकी स्थापना और संचालन मूर्ति करते रहे. 2008 में इस संस्था की शुरूआत करने वाले मूर्ति को जब 2011 में ओबामा प्रशासन में बड़ी ज़िम्मेदारी मिली, तब वह भारतीय मूल के पहले व्यक्ति थे, जो सर्जन जनरल बने और अमेरिका की यूनिफॉर्म सेवाओं में सबसे युवा ड्यूटी फ्लैग अफसर रहे.

नई दवाओं के क्लीनिकल ट्रायलों को और बेहतर और तेज़ करने के मकसद से मूर्ति ने TrialNetworks नाम की एक संस्था बनाई भी और उसके चेयरमैन भी रहे. इसके अलावा, मूर्ति वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक और कंपनी Epernicus भी बना चुके हैं. 2017 में ट्रंप प्रशासन ने उन्हें सर्जन जनरल के पद से हटाया था और बाद में यह पद जेरोम एडम्स को सौंपा गया था.

इंग्लैंड में 1977 में जन्मे मूर्ति के माता पिता भी डॉक्टरी पेशे में रहे थे और पेशे के चलते ही अमेरिका शिफ्ट हुए थे. फ्लोरिडा, हार्वर्ड और येल में मूर्ति की उच्च शिक्षा संपन्न हुई और वो एक बेहतरीन फेलो रहे. मूर्ति की पत्नी डॉक्टर्स ऑफ अमेरिका की डायरेक्टर और फिज़िशियन डॉ. एलिस चेन हैं. आइए, अब अरुण मजूमदार के बारे में भी जानते हैं, जो बाइडन प्रशासन में अहम रोल में नज़र आ सकते हैं.

मटेरियल वैज्ञानिक, इंजीनियर और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट मजूमदार को 2011 से 2012 के बीच अमेरिका के ऊर्जा विभाग में अंडर सेक्रेट्री पद पर नामित किया गया था. लेकिन बाद में नॉमिनेशन वापस लिया गया. इससे पहले वो पर्यावरण ऊर्जा तकनीक विभाग में डायरेक्टर रह चुके थे. इसके अलावा कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में मजूमदार प्रोफेसर भी रहे हैं.

इसके अलावा, ऊर्जा विभाग में एडवांस्ड रिसचर्स प्रोजेक्ट एजेंसी के पहले डायरेक्टर के तौर पर सेवाएं दे चुके मजूमदार ने 2012 में गूगल के ऊर्जा संबंधी प्रोजेक्टों के संचालन के लिए सलाहकार की भूमिका निभाई. अब मजूमदार स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और सीनियर फेलो हैं. सैकड़ों रिसर्च पेपर, पेटेंट और कॉन्फ्रेंस अपने नाम कर चुके मजूमदार अमेरिका में इंजीनियरिंग की नेशनल अकादमी के सदस्य हैं और वैज्ञानिक राजदूत रहे हैं.