निर्भया केस के गुनाहगारों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद की हो रही हैं निगरानी

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नई दिल्ली : निर्भया (Nirbhaya) के गुनाहगारों के डेथ वारंट (Death Warrant) पर साइन हो चुके हैं. फांसी (Hanging) की तारीख और वक्त भी तय हो गया है. गुनाहगारों को पवन जल्लाद (Pawan Jallad) फांसी देगा इस पर भी मुहर लग चुकी है. लेकिन इसी के साथ ही पवन जल्लाद की निगरानी भी शुरु हो गई है. मेरठ जेल (Meerut Jail) प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी दी गई है. 20 जनवरी तक पवन जेल प्रशासन की निगरानी में रहेगा. उसके बाद पवन को दिल्ली (Delhi) तिहाड़ जेल (Tihar Jail) भेज दिया जाएगा.

पवन को रोजाना मेरठ जेल में लगानी होती है हाजिरी

यूपी सरकार में जेल मंत्री ने तिहाड़ जेल प्रशासन को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद को भेजने की अनुमति दे दी है. इसके बाद से ही हर रोज मेरठ जेल में रखे गए एक रजिस्टर पर पवन जल्लाद को हाजिरी लगानी होती है. जिसका मतलब यह होता है कि पवन जल्लाद शहर में ही है. पवन जल्लाद को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वो शहर छोड़कर नहीं जाए.

दिल्ली जाने से पहले 2 बार होगा मेडिकल चेकअप

जेल से जुड़े जानकारों की मानें तो 20 जनवरी को पवन जल्लाद दिल्ली आ जाएगा. लेकिन इससे पहले दो बार मेरठ जेल प्रशासन पवन जल्लाद का मेडिकल चेकअप कराएगा. एक बार चेकअप 20 जनवरी को दिल्ली आने से पहले होगा तो एक बार 14 से 15 जनवरी के बीच में होगा. जिसका मतलब यह है कि पवन फांसी देने से पहले या ऐन वक्त पर बीमार न हो जाए. अगर हो भी जाए तो वक्त रहते उसका इलाज कर लिया जाए.

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तन्हाई कोठरी में शिफ्ट किए गुनाहगार 

जेल सूत्रों की मानें तो निर्भया के चारों गुनाहगार में से मुकेश, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार सिंह को कसूरी वार्ड में शिफ्ट किया गया है. वहीं चौथे दोषी विनय को अभी भी जेल नंबर-4 की हाई सिक्योरिटी सेल में ही रखा गया है. जानकार बताते हैं कि हालांकि डेथ वारंट साइन होने के बाद गुनाहगारों को डेथ सेल में भेज दिया जाता है, लेकिन दो लोगों ने अभी सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की हुई है, अभी उस पर सुनवाई होनी है इसलिए उनको डेथ सेल में नहीं भेजा गया है.

गुनाहगारों की सीसीटीवी से हो रही निगरानी

जानकारों की मानें तो तिहाड़ जेल की कसूरी कोठरी को तन्हाई वाली बैरक भी कहा जाता है. इस कोठरी में गुनाहगार को तन्हा रखा जाता है. किसी दूसरे कैदी को यहां आने-जाने की इजाज़त नहीं होती है. कोठरी के बाहर सिपाही भी 24 घंटे पहरा देते हैं. तन्हाई में रहने वाला गुनाहगार भी चाहकर दूसरे कैदियों से मुलाकात नहीं कर सकता है.