निर्भया के दोषियों की फांसी एक बार फिर टलने पर छलका निर्भया की मां का दर्द

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सात साल से न्याय का इंतजार कर रही एक मां की भावनाओं को तब फिर से एक करारा झटका लगा जब पता चला कि फांसी से चंद घंटों पहले कानून को ढाल बना निर्भया के दोषी एक बार फिर सजा से बच गए. पटियाला हाउस कोर्ट ने ही 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी दिए जाने का आदेश और डेथ वारंट जारी किया था. लेकिन आज एक बार फिर न्याय की बाट जोह रही निर्भया की मां को फिर एक बार निराशा हाथ लगी. अब पटियाला हाउस कोर्ट ने ही सभी दोषियों की फांसी को अनिश्चित समय के लिए टाल दिया. फैसले के बाद निर्भया की मां ने इस फैसले को सरकार और अदालत की नाकामी बनाया.निर्भया के दोषियों की तीसरी बार फांसी टलना निश्चित है. कानून को ढाल बनाते हुए दोषियों के वकील उन्हें बचाने का काम बखूबी कर रहे हैं.

सोमवार को जैसे ही पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी की तारीख टालने का आदेश सुनाया, एक मां की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली लेकिन हौंसला फिर भी कम नहीं हुआ. निर्भया की मां आशा देवी ने मीडिया के सामने कहा, ‘यह सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है. आज लोगों के बीच संदेश जा रहा है कि हमारे देश में इंसाफ से ज्यादा मुजरिमों को सपोर्ट दिया जाता है. इससे स्पष्ट होता है कि हमारा सिस्टम भी दोषियों के बचाव के लिए है’. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, पटियाला कोर्ट और सरकार से पूछना चाहिए कि सभी दोषियों को फांसी कब तक होगी?

फैसले के बाद एक ओर दोषियों और उनके वकील के मुख पर एक मुस्कान थी तो आशा देवी के चेहरे पर एक थकान के साथ कभी न मिटने वाले हौसले की झलक. मीडिया के सामने निर्भया की मां ने कहा, ‘मैं हर रोज हारती हूं और फिर से खड़ी हो जाती हूं. आज एक बार फिर से हारी हूं लेकिन हार मानने के लिए तैयार नहीं हूं. फिर से खड़ी हुई हूं और सबको फांसी के फंदे तक पहुंचाऊंगी’. निर्भया की वकील ने भी दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचने के लिए आखिरी सांस तक लड़ने की बात कही.

वहीं कोर्ट के फैसले पर निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा है कि जेल प्रशासन की कुछ खामियां थीं, जिसके तहत फांसी टली है. इसमें किसी का कोई दोष नहीं है. यह प्रक्रिया का हिस्सा है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद नहीं थे, उनके आने के बाद दोषी की याचिका वहां गई है. यह प्रोसीजर होना ही था. उम्मीद है कि अगली डेट जो होगी वह फाइनल डेट होगी. दोषियों को फांसी होकर रहेगी.

राष्ट्रपति के पास दोषी की दया याचिका लंबित है, इसलिए 2 मार्च 2020 को सुबह 6 बजे दोषियों को होने वाली फांसी अगले आदेश तक रोकी जा रही है. कोर्ट के आदेश की कॉपी दोषियों को अनिवार्य सूचना के तौर पर दे दी गई है.

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इससे पहले दोषी पवन गुप्ता के वकील ए.पी.सिंह ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में उसकी क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की जिसकी सुनवाई सोमवार को हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ही देर में दोषी की क्यूरेटिव पिटिशन खारिज कर दी. जैसे ही फैसला आया, वकील पहले से ही तैयार थे और उन्होंने बिना कोई देर करते हुए पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी. साथ ही अन्य दोषी अक्षय की दया याचिका दूसरी बार राष्ट्रपति को भेजी. साथ ही पटियाला हाउस कोर्ट में दया याचिका लंबित होने का हवाला देते हुए डेथ वारंट रद्द करने की गुहार लगाई.

चूंकि कानून का प्रोसिजर है कि याचिका लंबित होने की दशा में सजा नहीं दी जा सकती. हुआ भी कुछ ऐसा ही. फांसी से केवल साढ़े 12 घंटे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा- पीड़ित पक्ष के साथ खड़े होने के बाद भी, हमारा विचार है कि सजायाफ्ता मजुरिम को मौत के वक्त यह एहसास नहीं होना चाहिए कि देश की अदालतों ने सही ढंग से काम नहीं किया और उन्हें उनके न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल करने नहीं दिया गया. राष्ट्रपति के पास दोषी की दया याचिका लंबित है, इसलिए 2 मार्च 2020 को सुबह 6 बजे दोषियों को होने वाली फांसी अगले आदेश तक रोकी जा रही है. कोर्ट के आदेश की कॉपी दोषियों को अनिवार्य सूचना के तौर पर दे दी गई है.

निर्भया की मां आशा देवी ने कोर्ट के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट क्यों अपने ही फैसले को लागू करने में इतना वक्त ले रहा है. दोषियों को फांसी क्यों नहीं हो रही है? दोषियों की फांसी तीसरी बार भी टाल दी गई है. दोषियों को होने वाली फांसी का लगातार टलना हमारे सिस्टम की विफलता है. हमारा पूरा सिस्टम अपराधियों को सपोर्ट करता है. मुजरिम नहीं चाहते कि उनकी फांसी हो.

निर्भया के दोषियों का फांसी से बचने का ये अंतिम विकल्प है. पवन गुप्ता अपने अंतिम विकल्प का इस्तेमाल कर चुका है. वहीं अक्षय ने दूसरी बार दया याचिका लगाई है. कुकृत्य में शामिल अन्य दो दोषी भी सभी चारों विकल्पों का इस्तेमाल कर चुके हैं. अब अगर कोई नया पैंतरा दोषियों के वकीलों की तरफ से न निकाला गया तो एक महीने के अंदर दोषियों को सजा मिलना तय है.