आज के दिन कश्मीर का हुआ था भारत में विलय, महाराजा हरी सिंह ने कही थी ये बात

0
33

जयपुर. मैं सोने जा रहा हूं. कल सुबह अगर तुम्हें श्रीनगर में भारतीय सैनिक विमानों की आवाज़ सुनाई न दे, तो मुझे नींद में ही गोली मार देना.’ यह बात आज से ठीक 70 साल पहले, 26 अक्टूबर 1947 की रात जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरी सिंह ने अपने अंगरक्षक कप्तान दीवान सिंह से कही थी।

आज का दिन यानि 26 अक्टूबर का दिन देश के ऐतिहासिक और भौगोलिक स्वरूप के निर्धारण करने में बहुत महत्वपुर्ण है। यह उन दिनों की बात है जब वर्ष 1947 में बंटवारे की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी। जब देश में हर तरफ अफरा तफरी और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। और ऐसे में हमसाया देश आक्रामक हो उठा और बंटवारे के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया। जब पाकिस्तान ने कश्मीर में पर हमला किया तो कश्मीर के राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर,1947 को अपने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला किया। इस आशय के समझौते पर हस्ताक्षर होते ही भारतीय सेना ने जम्मू कश्मीर पहुंचकर हमलावर पड़ोसी की सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस लड़ाई में कश्मीर का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। कश्मीर आज तक दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी की वजह बना हुआ है।

आपको बता दें कि जब भारत आज़ाद हुआ उस वक्त हरी सिंह कश्मीर के राजा थे। उन्होंने 1925 में राजगद्दी संभाली थी। यही वह दौर भी था जब कश्मीर में राजशाही के खिलाफ आवाजें उठने लगी थीं। और इन आवाजों के सबसे बड़े प्रतिनिधि थे – शेख अब्दुल्ला। 1905 में जन्मे शेख अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट थे। लेकिन अपनी तमाम शैक्षणिक योग्यताओं के बावजूद उन्हें कश्मीर में सरकारी नौकरी नहीं मिली सकी थी क्योंकि यहां के प्रशासन में हिंदुओं का बोलबाला था। मुस्लिमों के साथ हो रहे इस भेदभाव के खिलाफ शेख अब्दुल्ला ने आवाज़ उठाना शुरू किया और धीरे-धीरे वे राजा हरी सिंह के सबसे बड़े दुश्मन बन गए।

READ More...  हाथ खड़े कर दिए थे जल्लादों ने भी क्रांतिकारी मंगल पांडे को फांसी देने के लिए

कश्मीर के राजा हरी सिंह ने घोषणा की वो भारत या पाकिस्तान किसी का भी हिस्सा नहीं बनेंगे। वो राज्य को एक स्वतंत्र देश घोषित करने की योजना बना रहे थे। उधर, पाकिस्तान कश्मीर पर दबाव बनाने लगा था। यहां कब्जे के लिए कबीलाइयों को आगे बढ़ने का आदेश दे दिया। पूरे कश्मीर में उत्पात मचाते हुए कबीलाइयों ने बिजली, सड़क और बुनियादी जरूरतों को नष्ट करके कश्मीर की शांति पूरी तरह भंग कर दी। महाराजा हरी सिंह चिंतित हो गए। जिसके चलते महाराजा हरी सिंह अपनी आजाद रहने की जिद्द छोड़कर ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर करने को तैयार हो गए थे? 27 अक्टूबर 1947 को जब भारत ने कश्मीर के साथ हुए ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन’ को स्वीकार कर लिया था तो क्यों कश्मीर आज भी एक विवाद बना हुआ है? क्या भारत ने कश्मीर के साथ कोई विशेष ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन’ साइन किया था जो कि अन्य रियासतों के साथ हुए समझौतों से अलग था? इन तमाम सवालों के जवाब समझने के लिए जरूरी है कि पहले कश्मीर के इतिहास और भूगोल को संक्षेप में समझ लिया जाए। इससे कुछ देर पहले ही उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का फैसला लिया था और ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर कर दिए थे। कश्मीर अब भारत का हिस्सा बन चुका था।