ओवैसी की AIMIM, क्या बिहार चुनाव के बाद बन जाएगी नेशनल पार्टी?

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हैदराबाद की संसदीय सीट साल 1984 से न हारने वाली MIM को चुनाव आयोग ने स्टेट पार्टी का दर्जा दिया है, लेकिन बिहार चुनाव के बाद किस तरह इस दर्जे में बदलाव हो सकता है?

बिहार चुनाव 2020 में कुल 243 विधानसभा सीटों में से 24 पर अपने कैंडिडेट खड़े कर रही ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी को उम्मीद है कि कम से कम 10 सीटें ज़रूर जीतेगी. तेलंगाना के नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बिहार चुनाव में महा लोकतांत्रिक समाजवादी फ्रंट का हिस्सा है, जिसमें बसपा समेत चार और पार्टियां शामिल हैं. फिलहाल ओवैसी की पार्टी को राज्य स्तरीय यानी क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बिहार चुनाव के बाद संभव है कि यह नेशनल पार्टी बन जाए. कैसे?

क्या आप जानते हैं कि किसी पार्टी का दर्जा किस तरह तय होता है और किन शर्तों पर कोई पार्टी नेशनल पार्टी या क्षेत्रीय कहलाती है? ओवैसी की पार्टी के संदर्भ में इस पूरे कायदे को समझना आपके लिए हर समय उपयोगी साबित हो सकता है.

बिहार चुनाव में ओवैसी के गणित

अस्ल में, किशनगंज सीट पर हुए उपचुनाव में जीतने के बाद से ही ओवैसी की पार्टी MIM के हौसले बुलंद हुए. ओवैसी समेत तेलंगाना के कई नेता बिहार चुनाव में MIM उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तर उल ईमान खुद अमोर सीट से प्रत्याशी हैं और जीतने की पूरी उम्मीद जता चुके हैं. हैदराबाद के मेयर माजिद हुसैन को बिहार चुनाव के लिए पार्टी ने प्रभारी बनाया है.

ओवैसी की पार्टी ने छह सीटों से दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को टिकट देकर एकता का संदेश देने का दावा किया है तो दूसरी तरफ, खुलकर माना है कि बिहार चुनाव लड़ने के पीछे पार्टी का मकसद देशव्यापी विस्तार की दिशा में अहम कदम है. यानी, MIM नेशनल पार्टी के तौर पर उभरने की महत्वाकांक्षा रखती है. जानिए कि नेशनल पार्टी क्या होती है.

क्या होता है नेशनल पार्टी का दर्जा?

चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों को तीन तरह की श्रेणियों में रखता है : नेशनल, राज्य स्तरीय और पंजीबद्ध पार्टी. चुनाव आयोग के नज़रिये से कौन सी पार्टी किस श्रेणी में रखी जाती है, इसका ब्योरा इलेक्शन सिम्बल्स आर्डर, 1968 के तहत मिलता है. नेशनल पार्टी के दर्जे के लिए तीन खास शर्तें इस तरह हैं :

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* किसी रजिस्टर्ड पार्टी को लोक सभा चुनाव में कम से कम दो राज्यों में 2% सीटें जीतना होती हैं.

* 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव में 6% वोट शेयर हो और साथ ही लोकसभा चुनाव में 4 सीटों पर जीत हो.

* कम से कम चार राज्यों में स्टेट पार्टी का दर्जा मिल चुका हो.

इन शर्तों को पूरा करने के बाद कोई पार्टी नेशनल पार्टी बनती है, लेकिन यह दर्जा कब तक कायम रहता है? दूसरे शब्दों में क्या अगले चुनाव में इस पैमाने पर पिछड़ने से यह दर्जा छिन सकता है?

* एक बार दर्जा मिल जाने पर अगले चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से दर्जे पर कोई असर नहीं पड़ता. नेशनल पार्टी या स्टेट पार्टी का दर्जा मिल जाने के बाद अगर लगातार दो विधानसभा या लोकसभा चुनावों में पार्टी कम से कम शर्तों को पूरा न करे तब यह दर्जा छिन सकता है.

* दर्जा मिलने का एक बड़ा फायदा यह होता है कि पार्टी को चुनाव चिह्न के तौर पर एक रिज़र्व और देशव्यापी चिह्न मिल जाता है.

* इसके अलावा, पंजीकृत पार्टियों को पार्टी कार्यालय के लिए सब्सिडी पर ज़मीन मिलती है, दूरदर्शन और एआईआर पर फ्री एयर टाइम मिलता है और चुनाव के दौरान इलेक्टोरल रोल की कॉपी मुफ्त मिलती है.

नेशनल पार्टी बनने के MIM के चांस?

तेलंगाना में ओवैसी की पार्टी के 20 विधायक हैं और 15 सीमांध्र में हैं. हैदराबाद समेत अविभाजित आंध्र प्रदेश में पार्टी के खाते में 7 संसदीय सीटें हैं. इसके अलावा, पिछले चुनाव में महाराष्ट्र में पार्टी के खाते में दो विधायक और एक सांसद हैं. साथ ही, महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनावों में भी MIM ने खासी उपस्थिति दर्ज करवाई है. अब बिहार चुनाव में अगर कुछ सीटें MIM के हाथ लगती हैं, तो चार राज्यों में स्टेट पार्टी की शर्त पूरी हो जाएगी.

ओपिनियन्स पोल के साथ ही बिहार चुनाव की सरगर्मियां वोटिंग डे के नज़दीक पहुंच रही हैं, तो कई तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं. इनमें यह भी दिलचस्प है कि बिहार चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद ओवैसी की पार्टी किस स्तर की पार्टी बन जाएगी.