ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं राजस्थान के अस्पताल, सिलेंडर की कालाबाजारी शुरू

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राजस्थान में तेजी से बढ़ते कोरोना केस के चलते अब अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी खड़ी हो गई है. सरकारी और निजी अस्पतालों में आईसीयू, वेंटीलेटर्स के साथ हाई फ्लो ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है. ऐसे में मरीज इधर से उधर भटक रहे हैं. ऑक्सीजन की कमी के चलते विशेष रुप से आईसीयू और कोरोना मरीजों की जान पर बन आई है. एसएमएस में हादसा होते-होते टला. एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती 26 मरीजों की जान पर उस वक्त बन आई, जब अचानक अस्पताल के आईसीयू में बीते शुक्रवार की शाम करीब साढे चार बजे ऑक्सीजन फेलियर अलार्म बज उठा.

ऐसे में अफरा तफरी मच गई और तत्काल वेण्डर को एप्रोच किया गया कि वह कहीं से भी तुरन्त ऑक्सीजन की सप्लाई करे. ऐसे में अस्पताल में कार्यरत ऑक्सीजन इंजीनियर संजीव शर्मा और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए ऑक्सीजन पाइप को वातावरण की एयर से जोड़ दिया. ताकि वातावरण में मौजूद 21 प्रतिशत ऑक्सीजन को मरीज को मिल सके और उसकी जान बच सके. करीब 20 मिनट बाद ऑक्सीजन के सिलेण्डर अन्य स्थान से मंगवाकर मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई दी गई.

पूरे प्रदेश में इस समय कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढने के चलते ऑक्सीजन की डिमाण्ड बढ़ी है. ऐसे में सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की मांग खडी हो गई है. अकेले राजधानी जयपुर के एसएमएस अस्पताल में ही रोजाना करीब 900 से 1000 सिलेण्डर की डिमाण्ड हो रही है. इसी प्रकार जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर और अन्य जिलों में भी ऑक्सीजन की डिमाण्ड हो रही है. वेण्डर्स का कहना है कि राजस्थान में ऑक्सीजन की सप्लाई झारखण्ड राज्य में लगे ऑक्सीजन प्लान्ट BOC से भी ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हुई है.

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झारखण्ड में बाढ़ के चलते और प्लान्ट में कुछ गडबडी होने से यह परेशानी खड़ी हुई है. इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में सिलेंडर की लगातार क्वालिटी मॉनिटरिंग नहीं होने से भी परेशानी बढ़ी है. कितने सिलेंडर में कितनी ऑक्सीजन है और कितने खाली या भरे वापिस ले जाए जा रहे हैं, इसके बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती. ना ही कोई मॉनिटरिंग होती है.

ऑक्सीजन की बढ़ती डिमाण्ड के चलते प्रदेश के ऑक्सीजन के वेण्डर्स ने कालाबाजारी शुरू कर दी है. एक सिलेण्डर जिसमें करीब 6000 हजार लीटर गैस होती है, उसकी कीमत 150 रुपए है, उसे दोगुनी रेट्स पर बेचा जा रहा है. शिकायत मिली है कि एक सिलेण्डर के 250 से 300 रुपए तक वसूल लिए गए हैं. जिला कलक्टर ने इस पर वीकेआई में दो वेण्डर्स के यहां पुलिस का पहरा तक लगा दिया है, ताकि यह पता रहे कि कितने सिलेण्डर निकाले जा रहे हैं.