पहले चरण के लिए मतदान शुक्रवार को, उम्मीदवारों ने झोंका पूरा दम, सरपंच चुनाव 2020

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जयपुर : राजस्थान में पंचायतीराज आम चुनाव 2020 (Panchayat Chunav 2020) के पहले चरण का मतदान में महज दो दिन शेष हैं और चुनावी सरगर्मियां भी पूरे परवान पर हैं. लेकिन गांव की सरकार का चुनाव बहुत ही खर्चीला हो रहा है, निर्वाचन विभाग के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं, बरसों से गांव की सत्ता पर काबिज असरदार सरपंच (Sarpanch) अब भी सत्ता का मोह छोड़ने को तैयार नहीं है, तो महिलायें भी मुकाबले में पूरा दम लगा रही हैं.

इसबार महिलायें सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं
जयपुर की रोजदा ग्राम पंचायत में आशादेवी सरपंच का चुनाव लड़ रही हैं, घर-घर गीत गाती-गाती वोट मांगती हैं, बुजुर्गों के पांव छूकर जीत का आशीर्वाद लेती हैं. दरअसल उनकी चुनाव प्रचार की कमान महिलाओं ने संभाल रखी है. क्योंकि इस बार महिलायें सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं हैं बल्कि राजनीति में उनकी भूमिका भी बढ़-चढ़कर गांवों में देखी जा रही है.

सरपंच के लिए चुनावी खर्च 50 हजार रुपए, उड़ रही आचार संहिता की धज्जियां

आरक्षण की लॉटरी ने इस बार बड़े-बड़े सूरमाओं को जमीन पर ला पटका है. नारायण कुलरिया जयपुर के उपजिला प्रमुख रह चुके हैं. सात बार के सरपंच हैं, अब फिर मैदान में ताल ठोक रहे हैं. दर्जनों गाड़ियों का काफिला साथ लेकर चलते हैं. चुनाव आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. क्यों कि प्रचार के लिए सिर्फ एक गाड़ी ही काम में ले सकते हैं.

मगर यहां तो दर्जनों कारें हैं, जो चुनाव चिन्ह उन्हें मिला है, उसका खर्च अलग से. जहां भी जाते हैं, चौपाल पर गुब्बारे बांटते हैं. हर हाथ में गुब्बारा पकड़ा देते हैं. दरअसवल, सपने जिला प्रमुख के ले रहे थे, सीट रिजर्व हो गई और ये पुरानी खांटी नेता जालसू पंचायत के गांवों में अपनी इज्जत बचाने के घर-घर धोक लगा रहा है. मगर न नियम कायदों की परवाह है और न ही कहीं पालना. बस चुनाव जीतना है.घूंघट के खिलाफ अभियान
लाड कंवर ने घूंघट के खिलाफ अभियान चलाया है. महिलाओं को घर से बाहर निकाल कर मुख्य धारा से जोड़ने की उन्होंने कोशिश शुरू की है. पूरे अभियान को उन्होंने महिला शक्ति को समर्पित किया है. वो सरपंच प्रत्याशी है और इस बीच गांवों में शराब के दरिया बहने और वोट के बदले नोट की खबरें आ रही हैं. पुलिस भी सतर्क है और कई जगह दबिश दी जा रही है. उम्म्दीवारों से लेकर उनके समर्थकों तक को अनुशासन में रहने की हिदायत दी गई है. गांव की पगडंडियों पर पड़ी खाली बोतलें बता रही है कि गांव के चुनाव में नशा वोट को प्रभावित करने का बड़ा जरिया बन रहा है.

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