पंचायती चुनाव में दूसरे चरण की तस्वीर साफ, 80 ग्राम पंचायतों में 609 सरपंचों ने ठोकी ताल

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जयपुर : जिले में दूसरे चरण में गोविंदगढ़ और सांगानेर पंचायत समिति की 80 ग्राम पंचायतों में 609 सरपंच और 1644 वार्ड पंच के पद पर ताल ठोक दी है.

पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान की तस्वीर साफ हो गई है. चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों ने चुनाव चिन्ह मिलते ही जनसंपर्क शुरू कर दिया.

जयपुर जिले में दूसरे चरण में गोविंदगढ़ और सांगानेर पंचायत समिति की 80 ग्राम पंचायतों में 609 सरपंच और 1644 वार्ड पंच के पद पर ताल ठोक दी है. चुनाव चिन्ह में किसी के हाथ में बल्ला आया तो किसी के हाथ में फुटबॉल मिली.
पंचायत चुनाव में गांवों में चुनावी रंग चढ़ने लगा है. 22 जनवरी को होने वाले सरपंच और वार्डपंच के लिए जयपुर जिले में गोविंदगढ़ और सांगानेर पंचायत समिति की 80 ग्राम पंचायतों की तस्वीर साफ हो गई है. चुनाव चिन्ह आवंटित होने के साथ ही प्रत्याशी वोटर्स के बीच पहुंच चुके हैं. दूसरे चरण में गोविंदगढ़ पंचायत समिति की 49 ग्राम पंचायतों में 439 सरपंच और 1122 वार्डपंच पद पर उम्मीदवार मैदान में है.

इसी तरह सांगानेर पंचायत समिति की 31 ग्राम पंचायतों में 170 सरपंच और 522 वार्डपंच के लिए प्रत्याशी मैदान में हैं. नामांकन वापसी के अंतिम समय तक कई उम्मीदवार बागियों की मान-मनौव्वल करते देखे गए हालांकि कुछ मान गए तो कुछ ने स्वयं के विजयी होने का दावा करते हुए ताल ठोकी हालांकि इस चुनाव में विधानसभा व लोकसभा चुनाव की तरह पार्टी सिंबल नहीं होता है लेकिन पर्दे के पीछे पार्टी होने के कारण एक ही पार्टी से कई उम्मीदवार होने से चुनाव प्रक्रिया से उनसे हटने की मनुहार की जाती है.

मनुहार के बाद भी नामांकन-पत्र वापस नहीं लिया
पंचायत मुख्यालयों पर दोपहर तीन बजते ही चुनाव चिन्ह आवंटन की सूचियों को मतदान केंद्रों के बाहर चस्पा कर दी गई. इस पर प्रत्याशियों की भीड़ जुट गई, कइयों ने मोबाइल में फोटो खींच कर वायरल करना शुरू कर दिया. कई पंचायतों में रोचक दृश्य देखने को मिले. ऐनवक्त पर नाम वापसी के लिए अपने पक्ष में बैठाने के लिए कई प्रत्याशी दूसरे प्रत्याशी की मान-मनुहार करते दिखाई पड़े. कई जगह प्रत्याशी मान गए तो कई जगह मनुहार के बाद भी नामांकन-पत्र वापस नहीं लिया.

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पुलिस की ओर से भी जाब्ता लगाया जाएगा
पंचायतों में कई प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज भी हो गए. सात दिन तक सरपंच और वार्ड पंच अपनी पंचायत और वार्ड में प्रचार कर अपने पक्ष में मतदाताओं से मत डालने की अपील करेंगे. इससे चुनावी रंगत में भी वृद्धि होगी. साथ ही चौपालों पर चर्चा में तेजी आएगी. कहीं-कहीं तनाव की स्थिति भी बन सकती है. ऐसी जगहों पर पुलिस की ओर से भी जाब्ता लगाया जाएगा.

समर्थन जुटाने के लिए मान-मनुहार का दौर शुरू हो गया है
बहरहाल, ज्यों-ज्यों पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही है, त्यों-त्यों हाड़ कंपाने वाली सर्दी के मौसम में भी सरपंच पद के उम्मीदवार मतदाताओं से विभिन्न तरीकों से संपर्क साधकर रिझाने में जुट गए है, जो मतदाता और मतदाताओं का वर्ग जिस किसी के प्रभाव में है, उनसे भी अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए मान-मनुहार का दौर शुरू हो गया है. सरपंच पद के उम्मीदवार आने वाले पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य चुनाव में संभावित उम्मीदवारों के साथ समीकरण की गोटियां बिठाते भी नजर आ रहे है. वहीं, कई आरक्षित ग्राम पंचायतों में योग्य उम्मीदवार की तलाश कर बाहुबली और धनबली अपने चहेते को सरपंच बनाकर कमान अपने हाथ में रखना चाहते हैं.