Pariksha Pe Charcha 2020: परीक्षा पे चर्चा का यह तीसरा संस्करण तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जा रहा हैं, छात्रों को मोदी का मंत्र – टेक्नोलॉजी दोस्त, उसका गुलाम मत बनिए

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  • छात्रों के साथ पीएम मोदी का परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम
  • तालकटोरा स्टेडियम में किया जा रहा हैआयोजन
  • 25 देशों के 15 करोड़ से अधिक छात्र हो रहे हैं शामिल
  • दिव्यांग छात्रों को प्रधानमंत्री से मिलेगा सवाल पूछने का मौका

मॉर्डन टेक्नोलॉजी का छात्र के जीवन में क्या रोल होना चाहिए?

PM मोदी: इस पीढ़ी में जीवन टेक्नोलॉजी ड्रिवन हो गया है, इसका भय नहीं आने देना चाहिए. टेक्नोलॉजी को अपना दोस्त मानें, प्रोएक्टिव होना जरूरी है. मेरे लिए क्या उपयोगी है, ये जानना जरूरी है. स्मार्ट फोन आपका समय चोरी करता है लेकिन उसमें से कुछ समय करके अपने माता-पिता के साथ बैठिए. टेक्नोलॉजी को अपने कब्जे में रखना जरूरी है.रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की विंडो होती है, लेकिन वहां पर बोर्ड भी लगा होता है. लेकिन लोग बोर्ड कम देखते हैं और पूछते ज्यादा हैं. लोग मैसेज करते हैं और फिर फोनकर करके पूछते हैं कि मेरा मैसेज मिला. नई पीढ़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सही करती है. अपनी मातृभाषा की डिक्शनरी को फोन में रखें और रोजाना कुछ वर्ड सीखें. आज के वक्त में सोशल नेटवर्किंग सिर्फ अपने फोन में आ गई है, पहले दोस्त को जन्मदिन विश करते हैं लेकिन अब रात को ही मैसेज किया जाता है. टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए.आज के वक्त में सोशल नेटवर्किंग सिर्फ अपने फोन में आ गई है, पहले दोस्त को जन्मदिन विश करते हैं लेकिन अब रात को ही मैसेज किया जाता है. हमें तय करना होगा कि रोजाना कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी फ्री रहूंगा. कुछ समय अपनों के साथ बिताना जरूरी हैं. घर में एक कमरा ऐसा होना चाहिए जिसमें टेक्नोलॉजी को नो एंट्री होगी, उस कमरे में जो भी आएगा बिना टेक्नोलॉजी आएगा.
जबलपुर और दिल्ली से सवाल..

सवाल: जो छात्र पढ़ाई में अच्छे नहीं है लेकिन खेल-संगीत में अच्छे होते हैं तो उनका भविष्य क्या होगा. पढ़ाई के बीच किस तरह एक्टिविटी के बीच बैलेंस बनाया जाए.
PM मोदी: शिक्षा के जरिए बहुत बड़े रास्ते का दरवाजा खोलती है. सा रे गा मा से सिर्फ संगीत की दुनिया में एंट्री मिलती है, लेकिन उससे संगीत पूरा नहीं होता है. जो हम सीख रहे हैं उसे जिंदगी की कसौटी पर कसना जरूरी. स्कूल में पढ़ाया जाता है कि कम बोलने से फायदा होता है तो हमें जिंदगी में भी उसे उतारना चाहिए. अगर आप रोबोट की तरह काम करते रहेंगे, तो सिर्फ रोबोट ही बनकर रह जाएंगे. इसलिए पढ़ाई से अलग भी एक्टविटी करनी चाहिए, हालांकि टाइम मैनेजमैंट जरूरी है.
कोटद्वार से मयंक का सवाल…

परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए हम कितना ध्यान केंद्रित करें. क्या सिर्फ मार्क्स से ही सफलता तय होगी?
PM मोदी: हम लोग अब उस दिशा में चल पड़े हैं जहां नंबर को ही महत्वपूर्ण माना जाता है. अब बच्चों के दिमाग में रहता है कि पहले नंबर ले आऊं, फिर बाद में सोचेंगे. लेकिन आज दुनिया बहुत बदल चुकी है. सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं है ये सिर्फ एक पड़ाव है. नंबर ही सबकुछ नहीं हैं, बच्चों के लिए ‘ये नहीं तो कुछ नहीं’ का माहौल ना बनाएं. किसान की स्कूली शिक्षा कम होती है लेकिन वो भी नई बातें सीखता है. परीक्षा का महत्व है, लेकिन सिर्फ परीक्षा ही जिंदगी नहीं है.
25 देशों के 15 करोड़ से अधिक छात्र हो रहे हैं शामिल

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया इस कार्यक्रम में  37 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों एवं 25 देशों के 15 करोड़ से अधिक छात्र शामिल हो रहे हैं.
छात्रों के लिए शॉर्ट निबंध प्रतियोगिता की गई थी शुरू

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पांच अलग-अलग विषयों पर एक ‘शॉर्ट निबंध’ प्रतियोगिता शुरू की थी. इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्रों में से 1,050 को एक निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया है
दिव्यांग छात्रों को मिलेगा सवाल पूछने का मौका
इस खास कार्यक्रम में छात्रों के अलावा शिक्षक, अभिभावक हिस्सा लेंगे. परीक्षा पर चर्चा सुबह 11 बजे तालकटोरा स्टेडियम में होगी. इस कार्यक्रम में इस बार खास तौर पर दिव्यांग छात्रों को प्रधानमंत्री से अपने मन की बात कहने और सवाल पूछने का मौका मिलेगा.
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