राजस्थान: CM गहलोत न होकर भी वजह रहे हैं बागी मंत्री और विधायकों की अदावत की

0
124

पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, खाद्य मंत्री रमेश मीणा, विधायक हरीश मीणा और मुरारी लाल मीणा समेत अन्य विधायक भी ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर समय-समय पर नाराजगी जताते रहे हैं.

जयपुर. सियासी संकट में फंसी गहलोत सरकार में शामिल कई मंत्रियों और एक दर्जन विधायकों की अदावत की वजह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से न होकर ब्यूरोक्रेट्स से रही है. ग्राउंड लेवल पर अफसर उनकी बातों को अनसुना करते हैं. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, खाद्य मंत्री रमेश मीणा, विधायक हरीश मीणा और मुरारी लाल मीणा समेत अन्य विधायक भी ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर समय-समय पर नाराजगी जताते रहे हैं. ये कहते रहे हैं विधायकों की बात तो दूर मंत्रियों की भी सुनवाई नहीं हो रही है. पिछले डेढ़ साल से पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह लगातार कहते रहे हैं कि ब्यूरोक्रेट मनमानी कर रहे हैं. खाद्य मंत्री रमेश मीणा कहते रहे हैं कि अफसरों पर अंकुश नहीं है.पूर्व डीजीपी एवं कांग्रेस विधायक हरीश मीणा  ने 6 जून को सुबह एक के बाद एक तीन ट्वीट कर पुलिस को घेरा था.

वहीं, राज्य के लिए नीति-नियम बनाने वाले शासन सचिवालय में  फाइलों को मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने का उचित चैनल बना हुआ है. नीति नियम और योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के मार्फत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास पहुंचती है. विभागों के सचिव और मंत्रियों के पास फाइलें नहीं भेजते हैं. सीएम से फाइल का अनुमोदन होने के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय फाइल विभाग के प्रमुख यानी अतिरिक्त मुख्य सचिव या शासन सचिव को लौटा देता है. कई मंत्रियों को इसी को लेकर नाराजगी है कि फाइल भेजने की प्रक्रिया में उनकी अनदेखी की जाती है. उन्हें अपने विभाग की नीति और कार्यक्रमों की जानकारी नहीं रहती है. विभाग प्रमुख मुख्यमंत्री से फाइल का अनुमोदन होने के बाद जानकारी देता है.

READ More...  गोपालगंजः 264 करोड़ का पुल 29 दिन भी नहीं चला, नीतीश ने किया था उद्घाटन

सत्ता का शासन से पंगा, 6 मंत्रियों से रहा विवाद

गहलोत सरकार के पिछले डेढ़ साल के शासन के दौरान सत्ता का शासन से पंगा रहा है. मंत्रियों और अफसरों में टकराव देखने को मिला है. मंत्रियों का कहना है कि अफसर उनकी नहीं सुनते. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 27 मई को मीडिया से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान मैं पांच से सात जिलों में गया. वहां समस्याओं को देखा. ब्यूरोक्रेट्स कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता की सुनवाई नहीं कर रहे हैं. इससे जनता परेशान है. प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स हावी हैं.

विभागों के अफसरों से विवाद जगजाहिर है

पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह का अपने विभागों के अफसरों से विवाद जगजाहिर है. खान एवं पेट्रोलियम मंत्री प्रमोद जैन भाया चार जून को अपने ट्विटर पर लिखा कि मैंने महसूस किया कि राज्य में सरकार बदल जाने के बावजूद ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली नहीं बदली. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा था कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे आदेशों को भी अफसर नहीं मान रहे. हालांकि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में जो ब्यूरोक्रेसी में बदलाव किया. उसमें उन अफसरों के विभाग बदल दिए गए जिन का मंत्रियों से विवाद चल रहा था. लेकिन तब तक बहुत देर तक देर हो चुकी थी.