Rajasthan: जानिये क्या है ‘सेफ्टी मॉडल’, Corona से दूर है रोडवेज 30 लाख यात्रियों के परिवहन के बाद भी

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Coronavirus  संक्रमण के इस काल में जब सब कुछ थम गया, तब भी राजस्थान रोडवेज के पहिए घूम रहे हैं. कोरोना काल में रोडवेज अब तक करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवा चुकी है

जयपुर. कोरोना काल में जब सबकुछ थम गया था, तब भी राजस्थान रोडवेज के पहिए घूम रहे थे और आज भी वह अपनी सेवाएं लगातार दे रही है. कोरोना काल में रोडवेज अब तक करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवा चुकी है. इसमें कोरोना संक्रमित व्यक्ति से लेकर आम यात्री शामिल हैं, लेकिन रोडवेज ने ऐसा क्या मैकेनिज्‍म अपनाया जिससे न तो इसके कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए और न ही इनकी वजह से कोरोना का प्रसार हुआ. इसकी वजह है स्व-अनुशासन.

कोरोना काल में डॉक्टर्स, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और अन्य के साथ राजस्थान रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारी भी कोरोना वॉरियर्स की भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि इन सब में अगर कोई कोरोना संक्रमण से बचा हुआ है तो वो है रोडवेज के करीब 16 हज़ार कर्मचारी. ये वो कर्मचारी हैं जो सीधे तौर पर आमजन के संपर्क में रहते हैं, लेकिन अपने सेफ्टी मॉडल की वजह से इनमें से लगभग सभी कर्मचारी कोरोना संक्रमित होने से बचे हुए हैं. अभी तक रोडवेज के केवल 2 कर्मचारी ही कोरोना पॉजिटिव हुए हैं. ये दोनों भी वो कर्मचारी हैं जो रोडवेज के रूट पर नहीं चलते हैं. इन दोनों कर्मचारियों की ड्यूटी ऑफिस में लगी हुई थी.

‘स्व-अनुशासन’ है रोडवेज का सेफ्टी मॉडल

रोडवेज का यह सेफ्टी मॉडल कोई नया या अनोखा नहीं है, लेकिन इसे अपनाने में जो ईमानदारी और स्व-अनुशासन रोडवेजकर्मियों ने अपनाया है उसी का नतीजा है कि वह आज संक्रमण मुक्त परिवहन सेवा उपलब्ध करवा पा रही है. इस मॉडल के तहत बस के रूट पर जाने से पहले उसे वर्कशॉप में सोडियम हाईपोक्लोराइड के सॉल्यूशन से पूरी तरह से डिस-इनफेक्ट किया जाता है. रोडवेज कार्यालयों में प्रवेश से पहले प्रत्येक कर्मचारी की थर्मल स्‍कैनिंग की जाती है. कार्यालय में जगह-जगह स्वचालित सेनेटाइजर मशीनें लगी हुई हैं.

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यात्रियों की थर्मल स्‍कैनिंग अनिवार्य
बस स्‍टैंड में प्रवेश और बस में यात्रा करने से पहले यात्रियों की थर्मल स्‍कैनिंग अनिवार्य की गई है. यात्रियों के संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों के लिए मास्क, ग्‍लब्‍ज और फेस शील्ड पहनना अनिवार्य है. प्रत्येक बस में थर्मल गन, सेनेटाइजर और डस्टर की व्यवस्था रहती है. रास्ते में सवारी के उतरने और चढ़ने के बाद परिचालक खाली हुई सीट, दरवाजे और हैंडल को सेनेटाइज करता है. रास्ते में सवारी लेने से पहले उसकी भी थर्मल स्‍कैनिंग की जाती है. बाहर से आने वाली बसों को बस स्टैण्ड पर सैनिटाइज किया जाता है.

कोरोना संक्रमित से लेकर आम यात्री को दी सेवाएं
कोरोना काल में रोडवेज 10 जुलाई तक करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों को यात्रा करवा चुकी है. रोडवेज की बसें 26 मार्च से लगातार संचालित हो रही हैं. इसके तहत एपिसेंटर से हजारों लोगों को अस्पताल और क्वारंटाइन सेंटर भी पहुंचाया गया. 26 मार्च से 4 जून के बीच करीब 4.64 लाख श्रमिकों, प्रवासी राजस्थानियों, स्टूडेंट्स और विदेश से आने वाले प्रवासी भारतीयों को निशुल्क बसें उपलब्ध करवाई. 3 जून से रोडवेज ने अपना नियमित संचालन शुरू किया. 8 जुलाई तक करीब 25.90 लाख यात्रियों का परिवहन किया. इस दौरान रोडवेज बसें करीब 90 लाख किलोमीटर चलीं.