टिड्डी दल का आतंकः बड़ा हादसा टला, जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हो रहे विमान को वापस करना पड़ा टेकऑफ

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जयपुर. टिड्डियों का आतंक अब लगभग पूरे उत्तर और मध्य भारत में अपना कहर ढा रहा है. इसी के चलते शनिवार शाम को जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) पर बड़ा हादसा हो जाता. रनवे पर अचानक बड़ी संख्या में आई टिड्डियों के चलते इंडिगो एयरलाइंस का एक विमान जो लैंड होने ही वाला था उसे टेकऑफ करना पड़ा. पायलट की सूझबूझ के चलते एक बड़ा हादसा इस दौरान टल गया. जानकारी के अनुसार इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-212 जो कि दिल्ली से जयपुर पहुंची थी. इस दौरान अचानक ही टिड्डियों का एक बड़ा दल एयरपोर्ट के रनवे पर जमा हो गया. फ्लाइट को लैंड करने के लिए पायलट ने सभी जरूरी चैक कर लिए थे लेकिन टिड्डियों के चलते बड़ा हादसा न हो जाए इसलिए फ्लाइट को दोबारा टेक ऑफ की प्रक्रिया में लेना पड़ा और विमान जयपुर में नहीं उतर सका.

राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की भी हो चुकी है मांग
रालोपा के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था. उन्होंने मांग की थी कि इस समस्या को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए. बुधवार को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में बेनीवाल ने मांग की है कि राजस्थान समेत दूसरे राज्यों की सरकारों को भी टिड्डी नियंत्रण के प्रभावी कदम उठाने के निर्देश जारी किए जाएं. पत्र में बेनीवाल ने लिखा है कि राजस्थान, गुजरात और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र जहां से टिड्डी दलों का प्रवेश होता है उनका वहीं पर नियंत्रण किया जाए. जिन सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी नहीं है वहां छोटे एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर आदि के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव करवाया जाए. बेनीवाल ने पत्र में यह भी कहा है कि यदि टिड्डी नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस योजना नहीं बनाई गई तो किसानों की आर्थिक रुप से कमर टूट जाएगी.

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राष्ट्राध्यक्षों से की जाएग बात

अपने पत्र में बेनीवाल ने प्रधानमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि ईरान और बलूचिस्तान समेत जहां-जहां टिड्डी की उत्पत्ति हो रही है वहां के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों से भी बात की जाए. गौरतलब है कि अभी अफ्रीकन देशों में बड़ी तादाद में टिड्डियों का प्रजनन हो रहा है. बेनीवाल ने कहा कि अगर इन्हें खत्म नहीं किया गया तो इस बार टिड्डी बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगे. पिछले साल करीब 7 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों ने फसल को नुकसान पहुंचाया. अब एक बार फिर से किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है.