राजस्थान के हर हिस्से में होगा ‘कारखाना’, गहलोत सरकार बना रही अहम प्लान

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राजस्थान नए निवेश की तरफ निगाहें जमाए हुए हैं. राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रीयल डवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट कॉपोरेशन करे यह टॉस्क दिया हुआ है. यहीं वजह है कि कोराना कॉल में भी जमीनों के सौदे में नंबर बनाए हुए हैं. आने वाले दिनों में नए औद्योगिक क्षेत्रों का रोडमैप तैयार है. चालु वित्त वर्ष में 25 नए औद्योगिक क्षेत्र लाए जा रहे हैं. प्रदेश सरकार नए रोजगार संभावनाओं की दिशा में इनका अहम रोल मान रही है.

कोराना संक्रमण के चलते उद्योग धंधों की रफ्तार मंदी है. रोजगार जाने की संख्या में जबरदस्त तेजी है. अकेले राजस्थान में 15 लाख लोगों का रोजगार सौ फीसदी प्रभावित हुआ है. इस बीच अगर कोई निवेश के सपने को जमीन मुहैया करवा रहा हो तो पहल अच्छी कही जा सकती है. जी हां, राजस्थान का उद्योग महकमा नए निवेश लाने में सफल रहा है. रीको ने कोराना कॉल में रिकॉर्ड जमीनें बेची हैं, जिनके परिणाम आने वाले दिनों में नए निवेश के रुप में दिखेंगे.

वहीं, अब नए प्लान के तहत प्रत्येक तहसील में कारखाना संचालन की तैयारी हैं. उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा का कहना है कि वो आने वाले दिनों में प्रदेश की सभी 338 तहसीलों में औद्योगिक क्षेत्र डवलप करने की तैयारी कर रहे हैं. यह औद्योगिेक क्षेत्र स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैश करवाने के साथ गांवों से हो रहे पलायन को रोकने में मदद करेंगे.  गौरतलब है कि आर्थिक आकड़ों की सुस्त रफ्तार के माहौल में रीको ने भूखंड बिक्री के नए आयाम स्थापित किए हैं. कम समय में 1500 करोड़ रुपए का राजस्व नए और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड बेच कर अर्जित किया है. आने वाले दिनों में रीको 25 नए औद्योगिक क्षेत्र ला रहा है. इनमें 3500 से अधिक औद्योगिक प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे. भूखंडों पर जल्द ही नए उद्योग स्थापित होंगे, इससे रोजगार के अवसर भी बढेंगे. राजस्थान निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां, सिंगल विंडो स्कीम, भूखंड की उपलब्धता और कौशल कार्यक्रमों के जरिए मानवश्रम की उपलब्धता पर का कर रहा है. जयपुर, नीमराणा, भिवाड़ी, जोधपुर, अलवर, अजमेर, उदयपुर सहित प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों में निवेशक अपने प्लांट लगाना चाहते हैं. प्रदेश सरकार ने इस बजट घोषणा के तहत अलवर, चुरू, सीकर, जालौर, टोंक, बूंदी, भरतपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्र खोलने की तैयारी हैँ. हालांकि ध्यान यह भी रखना होगी की रीको के भूखंड बेचने को ही निवेश का पैमाना नहीं माना जाए, तय समय में इंडस्ट्री लगाने की प्रभावी मॉनिटरिंग भी हो.

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