झुंझुनूं के SP जेसी शर्मा ने की अनूठी पहल, पुलिस कल्याण समिति का हुआ गठन

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पुलिसकर्मी आपस में कोई कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार है. ऐसी बातें तो आपने खूब अफसरों से सुनी होगी लेकिन झुंझुनूं में आने वाले दिनों में यह महसूस भी होगा क्योंकि एसपी जेसी शर्मा ने पुलिसकर्मियों को परिवार की तरह मान लिया है और अब उनके कल्याण के लिए नवाचार पर नवाचार किए जा रहे हैं.

झुंझुनूं पुलिस ने पुलिसकर्मियों के टॉपर बच्चों का सम्मान करने का निर्णय लिया है. वहीं पुलिस कल्याण समिति का भी गठन किया हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है. झुंझुनूं में जिस विद्यार्थी का सम्मान हो रहा है. वह कोई और नहीं, बल्कि कोतवाली में कार्यरत नरहड़ निवासी हेड कांस्टेबल सुभाषचंद्र का बेटा है. दरअसल हेड कांस्टेबल सुभाषचंद्र के पुत्र मयंक ने 10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं. एसपी जेसी शर्मा को जब इसका पता चला तो उन्होंने सम्मान करने की सोची तो उसमें साथ दिया एएसपी वीरेंद्र मीणा ने. जिन्होंने अपने पास से छात्र को 10 हजार रुपये की सम्मान राशि भी दी. वहीं सुभाषचंद्र को भी अहसास ​दिलाया कि मयंक केवल उनका नहीं. बल्कि झुंझुनूं पुलिस का बेटा है. जिसकी उपलब्धि पर पूरी झुंझुनूं पुलिस को गर्व है. मयंक भविष्य में इंजीनियरिंग करना चाहता है. जिसके लिए भी उसे झुंझुनूं पुलिस द्वारा पूरा सहयोग देने का आश्वासन मिला.

कोतवाली में हुए कार्यक्रम में पहुंचे एसपी जेसी शर्मा ने अपने हर पुलिसकर्मी झुंझुनूं पुलिस का पारिवारिक सदस्य है. इसी भावना को ध्यान में रखते हुए बताया कि वर्तमान में पुलिस की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. एक पुलिसकर्मी सभी लोगों की अपेक्षाएं पूरी करता है लेकिन इस बीच कहीं न कहीं परिवार को समय नहीं दे पाता. इसलिए पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान भी परिवार जैसी भावना को विकसित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.

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उन्होंने बताया कि झुंझुनूं पुलिस ने तय किया है कि पुलिसकर्मियों के वे बच्चे जो बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत या फिर इससे अधिक अंक प्राप्त करते हैं. तो उन्हें सामाजिक संस्थाओं और भामाशाहों के सहयोग से सम्मानित किया जाएगा. साथ ही उनके सपने पूरे हो. इसके लिए भी पूरी मदद की जाएगी. उन्होंने बताया कि जब पुलिसकर्मियों के मयंक जैसे बेटे—बेटियों को सम्मान मिलेगा. तो वो ना केवल गौरवान्व्ति महसूस करेंगे. बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों के बच्चों में भी पढ़ाई की भावना विकसित होगी.