राजस्थान में आया ‘गांवों की सरकार’ चुनने का समय, प्रत्याशियों को मिलेगी बड़ी राहत

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गांव की सरकार चुनने का समय आ चुका है. इस बार पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया गत पांच वर्ष पूर्व हुए चुनाव से जरा अलग होगी. इससे इस वर्ष गांव में चुनाव को लेकर रोमांच रहेगा. सरपंच का चुनाव ईवीएम और वार्डपंच का चुनाव मतपत्र से होगा. मतदान दल के कर्मचारियों की रात अब काली नहीं होगी. सरपंच का ईवीएम और वार्ड पंच का मतपत्र से निर्वाचन होगा.

वार्डपंचों के लिए मतदाताओं को छपे हुए मतपत्र देने का संभवतया यह पहला अवसर होगा. पहले मतदानकर्मियों को मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम हाथों से लिखने होते थे. मतदान दल के कर्मचारियों को दो दिन में होने वाली प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए नई व्यवस्था के तहत काफी समय मिलेगा.

जयपुर जिले में चार चरणों में होने वाले 14 पंचायत समितियों की 361 ग्राम पंचायतों में 1 हजार 876 मतदान केंद्रों पर 13 लाख 27 हजार 792 मतदाता अपने गांव की सरकार चुनेंगे. इस बार सरपंच और वार्ड पंच प्रत्याशियों को एक रात की जगह सात दिन का प्रचार-प्रसार करने का समय मिलेगा तो वहीं पोलिंग पार्टियों को मतदान संबंधी प्रकिया करने के लिए भी एक सप्ताह का पूरा समय मिलेगा. प्रथम चरण में 28 सितंबर को तीन पंचायत समिति आंधी, किशनगढ-रेनवाल और फागी की 70 ग्राम पंचायतों, दूसरे चरण में 3 अक्टूबर को चार पंचायत समिति बस्सी, माधोराजपुरा, दूदू और जोबनेर की 90 ग्राम पंचायतों, तीसरे चरण में 6 अक्टूबर को तीन पंचायत समिति कोटपूतली, जमवारामगढ़ और कोटखावदा की 94 ग्राम पंचायतों और चौथे चरण में चार पंचायत समिति चाकसू, शाहपुरा, सांभरलेक और तुंगा की 107 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्डपंचों के लिए मतदान होगा.

आपको बताते हैं कि पहले पूरा मतदान दल एक साथ ही मतदान के लिए रवाना होता था लेकिन इस बार प्रथम चरण के तय कार्यक्रम के अनुसार मतदान से सात दिन पहले आरओ और सहायक आरओ की दो सदस्यीय टीम सम्बंधित ग्राम पंचायतों में जाएगी. प्रत्याशियों से नामांकन-पत्र प्राप्त करने के एक दिन बाद दूसरे दिन नामांकन-पत्रों की जांच होगी. उसी दिन नाम वापसी का समय रहेगा. नाम वापसी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा. यह प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद आरओ और सहायक आरओ की दो सदस्यीय टीम वापस मुख्यालय लौट आएगी. इसके आधार पर सरपंच के लिए ईवीएम तैयार की जाएगी और वार्ड पंच के लिए मतपत्र को छपवाया जाएगा, जिसमें सरपंच का मतपत्र ईवीएम में लगेगा और वार्डपंच पर मुहर लगाई जाएगी.

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कोरोना को ध्यान मे रखते हुए मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या को 1100 से घटाकर 900 कर दिया गया है. साथ ही मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ा दी गई है. मतदान की टाइमिंग का समय भी एक घंटा बढ़ा दिया गया है. अब सुबह 7.30 से शाम 5.30 बजे तक रखा गया है. सोशल डिस्टेंसिंग की पालन करवाते हुए मतदान करवाया जाएगा. इस बार सरपंच का चुनाव ईवीएम मशीन और पंचों का चुनाव बेलट पेपर पर कराए जाने की घोषणा के तहत मतपत्रों को छपवाने की नौबत आ गई हैं. ईवीएम मशीन में छपे हुए मतपत्र रखे जाएंगे. पहले इन मतपत्रों में केवल चुनाव चिन्हित छपे हुए रहते थे. उम्मीदवारों के नाम हाथ से लिखे जाते थे. इससे मतदान दल के कर्मचारियों को ग्राम पंचायत के कुल मतदाताओं की संख्या के आधार पर मतपत्र लेकर उन पर उम्मीदवारों के नाम लिखने पड़ते थे. इस प्रक्रिया में कई बार रात की दो तीन बज जाती थी. कर्मचारी एक-एक मतपत्र पर हाथ से लिखते थे तो हैंडराइटिंग में फर्क रहता था. दो-तीन घंटे नींद निकालने के बाद सुबह फिर मतदान कक्ष को तैयार करना और दिनभर मतदान कराना होता था. इससे मतदान दल के सदस्य थकान और तनाव महसूस करते थे, लेकिन इस बार इससे राहत रहेगी तो कर्मचारी चैन से सोएंगे.

उपजिला निर्वाचन अधिकारी पुरूषोत्तम शर्मा ने बताया कि जिले में पहले 16 पंचायत समितियां थी. पुनर्गठन और परिसीमन के बाद 6 नई पंचायत समितियां किशनगढ-रेनवाल, जोबनेर, माधोराजपुरा, आंधी, तुंगा और कोटखावदा बनाई हैं. इससे अब बढ़कर 22 पंचायत समितियां हो गई हैं. इनमें से आठ पंचायत समितियों में पहले चुनाव हो चुके हैं. जिले में शेष रहीं 14 ग्राम पंचायतों में चार चरणों में पंचायतीराज चुनाव होंगे. सरपंच पद के लिए ईवीएम से मतदान कराए जाने की व्यवस्था से इनके मतों की गिनती में भी 15-20 मिनट का ही समय लगेगा. पहले शाम पांच-छह बजे तक मतदान प्रक्रिया के बाद मतदान कर्मियों को मतपत्रों की गिनती करनी होती थी. एक-एक मतपत्र की छंटनी कर उनकी गिनती होने में काफी रात हो जाती थी. गिनती के बाद किसी तरह का आक्षेप आने तथा रि-काउंटिंग कराने की नौबत आ जाती थी तो रात की दो-तीन तक बज जाती थी. इस बार रि-काउंटिंग कराने की स्थिति भी होगी, तब भी कुछ मिनटों में ही हो जाएगी.