राजस्थान में पहली बार पुलिस-प्रशासन करने जा रहा है ये नया प्रयोग

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चुनावों में इस बार राजस्थान पुलिस अन्य राज्यों से सुरक्षा बल नहीं मंगवायेगी. उसके खुद के करीब 40 हजार पुलिसकर्मी इन चुनावों का जिम्मा संभालेंगे.

जयपुर. कोरोना काल में लॉकडाउन को सफल बनाने की बड़ी चुनौती का सामना कर चुकी राजस्थान पुलिस के सामने एक और बड़ी चुनौती आने वाली है. इस बार पूरे पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस ही संभालेगी. पंचायत चुनाव के लिये इस बार अन्य राज्यों और केन्द्र से सुरक्षा बल नहीं बुलाया जायेगा. 3848 ग्राम पंचायतों के चुनाव के लिये करीब 40 हजार पुलिसकर्मी-होमगार्ड्स लगाये जायेंगे. इन पंचायतों में चुनाव चार चरणों में होंगे. चुनाव आयोग के निर्देश पर संवेदनशील और अति संवेदनशील पंचायतें चिन्हित कर ली गई हैं. पंचायत चुनाव के लिये आगामी 28 सितंबर, 3, 6 और 10 अक्टूबर को मतदान होगा.

ग्राम पंचायत चुनाव में पहली बार ऐसा प्रयोग

प्रदेश के 3848 ग्राम पंचायतों में निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने का जिम्मा संभाल रहे एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद है. इस बार चुनाव में बाहरी राज्यों से सेवाएं नहीं ली जाएंगी. आमतौर पर होता आया हुआ कि चुनाव के समय मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों के होमगार्ड की सेवाएं ली जाती रही है. राजस्थान भी अन्य राज्यों द्वारा मांगने पर अपने होमगार्ड्स उपलब्ध कराता रहा है. लेकिन इस बार पहली दफा ग्राम पंचायत चुनाव में अन्य राज्यों के होमगार्ड की सेवाएं नहीं ली जायेंगी.

संवेदनशील और अतिसंवेदनशील पंचायतें चिन्हित

गृह विभाग के निर्देश पर पुलिस प्रशासन ने चुनाव के लिहाज से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील पंचायत क्षेत्र चिन्हित कर लिए हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त पीएस मेहरा ने अति संवेदनशील पंचायत क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस जाब्ता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं. संवेदनशील-अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में चुनाव परिणाम घोषित होने तक पुलिस बल मौजूद रहेगा. चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दौसा, अलवर और सवाई माधोपुर जिले की ग्राम पंचायतों को अतिसंवेदनशील क्षेत्र माना गया है. आयोग के अधिकारियों ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील पंचायतों का कानून व्यवस्था के लिहाज से खुलासा करने से इनकार किया है.

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