Rajasthan Police Day: डीजीपी सिंह ने दिया भावुक संदेश, कहा- मुझे गर्व है आप जैसे कर्मवीरों पर

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ज राजस्थान पुलिस दिवस है. लॉकडाउन के दौरान प्रदेशभर में पुलिस की तारीफ हो रही है. कहीं लोग तालियां बजाकर तो कहीं पुष्प वर्षा कर पुलिसकर्मियों की ओर से निभाई जा रही कड़ी ड्यूटी का आभार (Gratitude) जता रहे हैं. पुलिसकर्मी दिन रात सड़कों पर तैनात होकर कोरोना वायरस के खतरे के बीच लॉकडाउन को सफल बनाने और लोगों को बचाने में जुटे हुए हैं. राजस्थान पुलिस दिवस पर पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने पुलिसकर्मियों के लिए एक भावुक संदेश दिया है. उन्होंने अपने संदेश में पुलिसकर्मियों के कार्यों की तारीफ भी की है और अपने जीवन के कुछ अनुभव भी साझा किए हैं. सीएम अशोक गहलोत ने भी इस मौके पर पुलिस महकमे को अपनी शुभकामनाएं दी हैं.

आज का दिन एक ख़ास अहमियत रखता
सिंह ने अपने संदेश कहा कि हमारे लिये आज का दिन एक ख़ास अहमियत रखता है. आज ही के दिन 16 अप्रैल,1949 को राजस्थान पुलिस (एकीकरण) अध्यादेश 1949 के जरिए राजस्थान पुलिस अस्तित्व में आई. इस दौरान राजस्थान पुलिस ने एक लंबी यात्रा तय की है. अपराध और अपराधियों से लड़ने के साथ ही साम्प्रदायिक एवं जातीय उन्माद से निपटे तो प्राकृतिक आपदाओं-विपदाओं का भी सामना किया. हमने 1965 एवं 1971 के युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर सेना का साथ दिया. प्रदेश की दोनों सीमाओं पर दस्युओं की समस्या का मुक़ाबला किया.

व्यक्तित्व एवं चरित्र की कठोर परीक्षा लेती है पुलिस

इस दौरान जिन योग्य अधिकारियों ने इस पुलिस बल का नेतृत्व किया उनकी दूरदृष्टि एवं योग्यता के प्रति हम सभी कृतज्ञ हैं. साथ ही जिन साथियों ने कर्तव्यपालन के दौरान अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये उनको हम सादर नमन करते हैं. पुलिस के अलावा शायद ही कोई अन्य व्यवसाय है जो व्यक्तित्व एवं चरित्र की इतनी कठोर परीक्षा लेता हो. शारीरिक एवं मानसिक रूप से थकाकर चूर करने वाली परिस्थितियों के बीच अपराध एवं अपराधियों द्वारा रचित काजल कोठरी में कार्य करने वाले अपने साथियों के साहसिक एवं स्नेहिल दोनों पक्षों का मुझे अनुभव हुआ है.

हमारी गलती चुभती है, हमें सजा भी ज्यादा मिलती है
DGP ने लिखा है कि सभी इंसानों और इंसानी संस्थाओं की तरह हम में भी दोष है. ग़लतियां करते हैं. हमारा काम कुछ ऐसा है कि गलतियां दिखती और चुभती ज़्यादा हैं. शायद इसी कारण हमें जनता के गु़स्से एवं आलोचना का सामना ज़्यादा करना पड़ता है. कभी सकारण, कभी अकारण. सज़ा भी दूसरे विभागों की तुलना में ज़्यादा ही मिलती है. लेकिन इन सबके बीच निरंतर अपना कर्तव्य निर्वहन करना और यथाशक्ति अपना बेहतरीन देने का प्रयास करना बड़े साहस का काम है.

हमारे साथी अपना सब कुछ झोंक देते हैं
आपदा और मुश्किल की घड़ी में हमारे साथी अपना सब कुछ झोंक देते हैं. चाहे अपनी जान ही जोखिम में क्यों न डालनी पड़े. इस जज़्बे को देखकर मुझे थियोडोर रुज़वेल्ट की उक्ति याद आती है कि ”श्रेय उसका है जो कर्मस्थली में जूझता है, जिसका चेहरा धूल, पसीने और खून से सना हुआ है, जो हर बार हिम्मत और बहादुरी से कोशिश करता है. वो गिरता पड़ता है, ग़लतियां करता है, कमियां रहती हैं. लेकिन इन सबसे सबक लेकर पूरी ताकत और उत्साह के साथ फिर अपने काम में जुट जाता है।” आप जैसे कर्मवीरों पर मुझे गर्व है.

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सिपाही के अपनत्व को कभी नहीं भुला पाऊंगा
सिंह ने अपने पुराने किस्से को याद करते हुए लिखा कि अपने साथियों की सदाशयता और सहृदयता के बहुत से किस्से मेरे स्मृति पटल पर अंकित हैं. ट्रेनिंग के समय भरतपुर में कड़ाके की सर्दी की रात में गश्त करने के दौरान एक सिपाही साथी द्वारा मुझे गर्म कोट उतारकर पहनाना कभी नहीं भूल सकता. चंबल के डांग और बीहड़ों में दस्यु विरोधी अभियानों के दौरान अपने सिपाही साथियों द्वारा बनाया भोजन साझा करना आज भी याद है. वर्षों पूर्व जयपुर में छोटी चौपड़ पर उपद्रव के समय जब मैंने अपना हेलमेट साथी मजिस्ट्रेट को दिया जिससे उनका बचाव हो सके. तब इलाके के थानाधिकारी ने यह देख तुरंत अपना हेलमेट उतारकर मुझे पहना दिया ताकि मैं सुरक्षित रह सकूं. दुर्भाग्यवश इसके कुछ ही देर बाद उन थानाधिकारी को एक भारी पत्थर सिर पर लगा और उन्हें लम्बी अवधि अस्पताल में बितानी पड़ी. ऐसे बहुत से किस्से हैं पर विस्तार से फिर कभी.

कोरोना वायरस के काल में हमारी बड़ी कठिन परीक्षा है
डीजीपी सिंह ने कोरोना वायरस के कारण प्रदेश में चल रहे लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में मैंने आप में से कई साथियों को चुपचाप असहायों, वृद्धजनों एवं निराश्रितों की मदद करते हुए देखा है. आज कोरोना वायरस की महामारी के हालात में हमारे चरित्र के दोनों पहलुओं की कठिनतम परीक्षा है. साहसपूर्वक अपना कार्य करते रहना है लेकिन अपना धैर्य एवं संतुलन नहीं खोना है. परेशान लोगों की परेशानियों को और नहीं बढ़ाना है उन्हें कम करना है. नियमों की सख़्ती से पालना करानी है लेकिन मानवीयता के साथ.

राजस्थान पुलिस यथाशक्ति अपना सर्वश्रेष्ठ देती रहेगी
जल्द ही कोरोना वायरस का ज्वार उतर जायेगा लेकिन हमारे लिए विश्राम नहीं होगा. नए सवालों और नई चुनौतियों से हमारा सामना होगा. लेकिन आज हम दूने उत्साह एवं समर्पण के साथ काम कर राज्य के नागरिकों को आश्वस्त करें कि उनकी सुरक्षा के लिये यथाशक्ति राजस्थान पुलिस अपना सर्वश्रेष्ठ देती रहेगी.

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